विवेकानंद को बौना बनाने का भौंडा प्रयास
कट्टरवादी हिन्दू उन्हें हजम नहीं कर सकते
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2018-09-12 12:16 UTC
शिकागो (अमेरिका) में 125 वर्ष पहले 11 सितंबर 1893 को हुए धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने अपने ऐतिहासिक वक्तव्य के माध्यम से भारत की एक वैश्विक सोच को सामने रखते हुए हिंदू धर्म का उदारवादी चेहरा दुनिया के सामने रखा था। पूरी दुनिया ने उनके भाषण को सराहा था। वह सम्मेलन किसी एक धर्म विशेष का सम्मेलन नहीं था, लेकिन उस सम्मेलन में विवेकानंद के दिए गए उस वक्तव्य की याद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद ने वहां जो आयोजन किया, वह घोषित रूप से ‘हिंदू सम्मेलन’ था, जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर संघ के मुखिया मोहन भागवत ने अपने भाषण में निहायत ही घटिया शब्दावली में अपने हिंदुत्व के संकीर्ण दर्शन को पेश किया। यही नहीं, उन्होंने अपने उस दर्शन को विवेकानंद की विरासत से जोडते हुए प्रकारांतर से विवेकानंद की स्वीकार्यता को भी सीमित करने का भौंडा प्रयास किया।