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कश्मीर में स्थिति सामान्य होने की संभावना किधर है?

राज्यपाल के विचार ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर डाला
नित्य चक्रबर्ती - 2019-08-31 11:51 UTC
जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने शुक्रवार को प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के साथ किसी भी बातचीत को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मुख्यधारा के राजनीतिक दलों या अलगाववादियों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने राजनीतिक संवाद को महत्वपूर्ण बताते हुए अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया और कहा कि हम कश्मीरी नागरिक समाज के साथ बात करेंगे।ं साक्षात्कार महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला जैसे मुख्यधारा के नेताओं के खिलाफ अपमान और दुर्भावना से भरा है और यह धारणा बनती है कि सरकार मुख्यधारा के राजनीतिक दलों की अनदेखी कर राजनीतिक बातचीत के लिए कश्मीर में चुने हुए लोगों की तलाश करेगी।

कश्मीर में नागरिक स्वतंत्रता की उपेक्षा कर रहा है सुप्रीम कोर्ट

वहां मौलिक अधिकारों का हो रहा है हनन
अमृतानंद चक्रवर्ती - 2019-08-30 11:47 UTC
बुधवार, 28 अगस्त, 2019 को, सुप्रीम कोर्ट ने अंततः कश्मीर में 70 लाख लोगों के 24 दिनों के पूर्ण लॉकडाउन के बाद क्रमशः 5 अगस्त और 6 अगस्त को राष्ट्रपति आदेशों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की और उन्हें निर्देश दिया। याचिकाओं पर अक्टूबर, 2019 से 5 न्यायाधीशों की एक संविधान पीठ द्वारा सुनवाई की जाएगी, क्योंकि इसमें कानून के पर्याप्त प्रश्न शामिल थे। इन याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार की आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसमें सीमा पार से होने वाले नुकसान भी शामिल हैं।

दिल्ली में मुफ्त पानी, मुफ्त बिजली

क्या चुनाव जीत पाएंगे केजरीवाल
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-08-29 11:12 UTC
पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के हाथों आम आदमी पार्टी की करारी हार हुई थी। दिल्ली लोकसभा की सातों सीट पर चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मात्र दो सीटों पर ही दूसरे नंबर पर आ सके थे। यानी शेष 5 सीटों पर उसके उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे थे और उनमें से अधिकांश की जमानतें जब्त हो गई थीं। भारतीय जनता पार्टी को 50 फीसदी से भी ज्यादा मत मिले थे, जबकि केजरीवाल की पार्टी को मात्र 18 फीसदी मत ही मिले थे। उससे ज्यादा मत तो कांग्रेस को मिले थे। शीला दीक्षित तक कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्षा थीं और उन्होंने अपने आपको भी चुनाव मैदान में उतार दिया था। इसके अलावा दिल्ली प्रदेश के अन्य कांग्रेसी महारथी भी चुनाव के अखाड़े में खुद उतर आए थे। खुद शीला दीक्षित, पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल, अजय माकन, लवली और महावल मिश्र चुनाव लड़ रहे थे और वे सभी के सभी हार तो गए, लेकिन आम आदमी पार्टी को धूल चटाने में भाजपा की मदद कर दी। कांग्रेस के वे सारे दिग्गज दूसरे स्थान पर रहे और इस तरह उन्होंने केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को सदमे में भेज दिये।

जिंदगी बचाने के लिए पानी का कुप्रबंधन रोकें

जलशक्ति मंत्रालय को हल ढूंढ़ना होगा
ज्ञान पाठक - 2019-08-28 10:52 UTC
भारत को दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी के लिए पानी का प्रबंधन करने की आवश्यकता है लेकिन दुनिया के ताजा पानी के संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत ही यहां है। यद्यपि वार्षिक उपयोग योग्य पानी सतही जल स्रोतों से 690 अरब घन मीटर (बीसीएम) और भूजल से 447 बीसीएम है, लेकिन पानी की आपूर्ति इतनी कुप्रबंधित है कि हर साल लगभग दो लाख लोग अपर्याप्त पानी, और अस्वच्छता के कारण मर जाते हैं। व्यक्तिगत रूप से असुरक्षित पानी का बोझ चीन की तुलना में 40 गुना अधिक है, और श्रीलंका की तुलना में 12 गुना अधिक है। प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में अपशिष्ट जल उत्पन्न होने के साथ, सतही और भूजल दोनों को दूषित करने वाले अपशिष्ट जल के कुप्रबंधन, तरल अपशिष्ट प्रबंधन की कमी, स्वच्छता की खराब स्थिति ने जल जनित बीमारियों से पीड़ित आबादी की संख्या बढ़ाने में योगदान दिया है।

जेटली और चिदंबरम

दिल्ली के दो दोस्तों की अनूठी दास्तान
अनिल जैन - 2019-08-27 10:46 UTC
अरुण जेटली और पलानिअप्पन चिदंबरम! दोनों लंबे समय तक देश के वित्त मंत्री रहे। अरुण जेटली लंबे समय तक बीमारी से जूझते हुए इस दुनिया से कूच कर गए और चिदंबरम लंबे समय तक कानूनी प्रक्रियाओं से बचते रहने के बाद फिलहाल जमानत और जेल के बीच सीबीआई की रिमांड पर हैं। दो परस्पर धुर विरोधी दलों की नुमाइंदगी करते हुए भी जेटली और चिदंबरम निजी तौर पर गहरे दोस्त रहे। लंबे समय तक देश की अर्थव्यवस्था के नियामक रहे दोनों नेताओं के व्यक्तित्व में कई तरह की समानताएं रहीं। संभवतः ये समानताएं ही उनकी दोस्ती का आधार थी।

मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी अपने चरम पर

रतुल पुरी की गिरफ्तारी पर भाजपा साध रही है कमलनाथ पर निशाना
एल. एस. हरदेनिया - 2019-08-26 09:48 UTC
भोपालः सत्तारूढ़ कांग्रेस में असंतोष के स्वर उठने लगे हैं। ऐसी ही एक आवाज कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री के पी सिंह ने उठाई है। एक वीडियो, जो वायरल हो गया है, में के पी सिंह ने राज्य नेतृत्व पर गंभीर हमला किया है। कांग्रेस, जो विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा के दो विधायकों का समर्थन हासिल करने के बाद काफी आश्वस्त थी, अब एक बार फिर से बेचैन हो गई है। वीडियो में सिंह सरकार की आलोचना करते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में उन्हें कांग्रेस पार्टी के खिलाफ खुलकर बोलते हुए भी दिखाया गया है। सिंह सरकार को भ्रष्ट और बेकार करार दे रहे हैं। वीडियो में दिखाया गया है कि सिंह सरकार से खुश नहीं हैं।

हांगकांग विद्रोह पर चीन बैकफुट पर

‘एक देश, दो व्यवस्था’ का फ्रेमवर्क काम नहीं कर पा रहा है
अरुण श्रीवास्तव - 2019-08-24 10:56 UTC
चीनी सरकार इस बात से अवगत है कि विश्व बंधुत्व के लिए उदार चेहरा दिखाए बिना कोई भी कठोर कार्रवाई दुखद साबित होगी। यह हांगकांग की अंतर्राष्ट्रीय छवि को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाएगा, और बड़ी संख्या में मुख्य भूमि चीन के हमवतन की भावनाओं को गंभीर रूप से आहत करेगा, जो चीन निश्चित रूप से नहीं चाहेगा। इस पृष्ठभूमि में हॉन्ग कॉन्ग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैरी लैम का कथन महत्वपूर्ण है कि ‘बेहद घिनौने हिंसक अपराध को कानून के अनुसार कड़ी सजा दी जानी चाहिए’।

अनुप्रिया पटेल को डंप करने मे लगी भाजपा

मिर्जापुर के रमाशंकर पटेल को योगी ने मंत्री बनाया
प्रदीप कपूर - 2019-08-23 11:14 UTC
लखनऊः अनुप्रिया पटेल के अपना दल (एस) पर निर्भर रहने के बजाय भाजपा अपने कुर्मी पिछड़े नेताओं को बढ़ावा देने का मन बना चुकी है।

जनसंख्या विस्फोट पर प्रधानमंत्री की चिंता के मायने

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सरकार की नाकामी से ध्यान हटाने का उपक्रम
अनिल जैन - 2019-08-22 12:46 UTC
तेजी से बढती हुई जनसंख्या सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के और भी कई देशों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। क्योंकि जिस गति से जनसंख्या बढ रही है, उसके लिए जीवन की बुनियादी सुविधाएं और संसाधन जुटाना सरकारों के लिए चुनौती साबित हो रहा है। इसीलिए जब स्वाधीनता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताई तो उसका आमतौर पर स्वागत ही हुआ। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जो बेतहाशा जनसंख्या विस्फोट हो रहा है, वह हमारी आने वाली पीढियों के लिए कई तरह के संकट पैदा करेगा। यह संभवतः पहला मौका रहा जब लंबे समय बाद किसी प्रधानमंत्री ने लाल किले से अपने भाषण में बढती जनसंख्या की समस्या पर चिंता जताई हो। लेकिन सवाल है कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी इस चिंता को लेकर क्या वाकई गंभीर हैं?

गरीबों पर ध्यान दे रहे हैं कमलनाथ

नेहरू पर भाजपा का हमला जारी
एल. एस. हरदेनिया - 2019-08-21 14:04 UTC
भोपालः मध्य प्रदेश सरकार ने कुछ ऐसे फैसले लिए हैं जो गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की मदद करने के लिए लंबा रास्ता तय करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय बिजली बिल पर दी गई रियायत से संबंधित है। अन्य निर्णय सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने का है।