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भारतीय अर्थव्यवस्था खतरे में

पर सरकार को खबर नहीं
नंतू बनर्जी - 2019-08-20 14:02 UTC
एनडीए सरकार ने सामाजिक-राजनीतिक मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया और जम्मू-कश्मीर राज्य को पुनर्परिभाषित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करके भी ठीक किया, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था जर्जर है। इसकी तत्काल मरम्मत की जरूरत है। जब तक सरकार तेजी से कार्य नहीं करती है और नुकसान को नियंत्रित नहीं करती है, तब तक अर्थव्यवस्था प्रमुख सामाजिक परिणामों को आमंत्रित करते हुए सिकुड़ सकती है। हजारों की संख्या में नौकरियां हैं क्योंकि अभूतपूर्व मंदी ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जो ऑटोमोबाइल उद्योग एक उदाहरण है। यह देश की औद्योगिक मंदी का नेतृत्व कर रहा है।

परमाणु हमले की धमकी

भारत को इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए
बरुन दास गुप्ता - 2019-08-19 13:26 UTC
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत अभी भी अपनी “नो फर्स्ट यूज” परमाणु नीति के लिए प्रतिबद्ध है, “भविष्य में क्या होता है यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है।” मौका, समय और जगह को देखते हुए उनका यह बयान काफी महत्वपूर्ण है।

धन अर्जित करने वालों का सम्मान

प्रधानमंत्री का लाल किले से भाषण
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-08-17 17:22 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 15 अगस्त के अपने भाषण में अनेक महत्वपूर्ण बातें कहीं और उनमें से एक बात धन पैदा करने वालो के प्रति हमारे देश के लोगों के रवैये से संबंधित है। उन्होंने सबकुछ स्पष्ट रूप से नहीं कहा, लेकिन जितना कहा उससे यह स्पष्ट होता है कि संपत्ति या धन पैदा करने वालों के प्रति लोगों के वर्तमान रवैये से निराश दिखे। यह कोई छिपी बात नहीं है कि धनवान और ज्यादा संपत्ति वालों को लेकर अनेक प्रकार के धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष साहित्य हमारे देश में लिखे गए हैं और उनमें से अधिकांश देश के धनिकों को हेय भाव से देखते हैं। उन्हें कुछ इस तरह दिखाया जाता है, मानों उन्होंने कहीं से या किसी की चोरी करके वह धन इकट्ठा किया हो। उनके बारे में जो वर्तमान धारणा है, उनमें बदलाव की अपील मोदीजी ने 15 अगस्त के अपने भाषण में की हैं।

अमेरिकी चीन व्यापार युद्ध और भारत

कमजोर होता युआन भारत की नई चिंता
नन्तू बनर्जी - 2019-08-16 09:48 UTC
संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध ने पिछले सप्ताह एक अधिक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश किया क्योंकि बीजिंग ने अपनी मुद्रा को और कमजोर करने की अनुमति दी। गिरते हुए युआन न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि बाकी दुनिया के लिए भी एक बड़ी चिंता बन गए हैं। लोअर युआन चीन को अपने निर्यात को अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर अधिक डंप करने में मदद करेगा। चीन को निर्यात करना अधिक कठिन होगा। राष्ट्रपति ट्रम्प के ट्रेजरी विभाग ने औपचारिक रूप से चीन को मुद्रा हेरफेर करार दिया है क्योंकि चीनी उद्यमों ने अमेरिका से कृषि उत्पादों की ताजा खरीद बंद कर दी है। जहां तक भारत का संबंध है, कमजोर युआन भारतीय बाजार में चीनी सामानों की बाढ़ ला सकता है और देश के आर्थिक विकास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक-इन-इंडिया अभियान पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

कश्मीर समस्या के लिए नेहरू नहीं अमेरिका और ब्रिटेन जिम्मेदार

उन्होंने कश्मीर में जनमतसंग्रह नहीं होने दिया, क्योंकि वह तब भारत के साथ था
एल एस हरदेनिया - 2019-08-15 18:16 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी सहित संपूर्ण संघ परिवार जवाहरलाल नेहरू को कश्मीर की समस्या के लिए उत्तरदायी मानते हैं। परंतु कश्मीर समस्या के इतिहास का बारीकी से अध्ययन करने पर यह ज्ञात होता है कि समस्या को उलझाने में ब्रिटेन व अमेरिका द्वारा की साजिशों की निर्णायक भूमिका थी। अमेरिका और ब्रिटेन, और विशेषकर ब्रिटेन यह चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर का पाकिस्तान में विलय हो जाए।

मुस्लिम कार्ड खेलने में मायावती व्यस्त

बीजेपी की चुनौती का सामना करने को हो रही हैं तैयार
प्रदीप कपूर - 2019-08-13 09:24 UTC
लखनऊः लोकसभा चुनाव में संतोषजनक प्रदर्शन के बाद जब पार्टी को 10 सीटें मिलीं तो बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती उत्तर प्रदेश में अपना वोट बैंक मजबूत करने में व्यस्त हो गई हैं। गौरतलब हो कि मायावती की पार्टी को 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी। उस पृष्ठभूमि में पार्टी को 2019 के चुनाव में 10 सीटें मिलना एक शानदार उपलब्धि ही कही जा सकती है।

6 अगस्त के बाद कश्मीर से भिड़ गया है भारत

370 को समाप्त करने के नतीजे कुछ भी हो सकते हैं
ज्ञान पाठक - 2019-08-10 10:16 UTC
कभी जम्मू-कश्मीर नाम के भारत संघ में एक राज्य था। भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद राज्य को समाप्त कर दिया गया, इसे संघ द्वारा शासित एक क्षेत्र तक सीमित कर दिया गया इसके साथ लद्दाख नाम का एक और केन्द्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आया। यह राज्य में अपने नागरिकों की आवाज को शांत करने के लिए संसद में बहुमत के जानवर बल पर संभव बनाया गया। इस निर्णय पर लोगों की राय विभाजित हैं। कुछ कहते हैं कि कार्रवाई जिस तरह से की गई, वह अनैतिक, नासमझभरा और अनुचित थी। कश्मीरियों ने इस घटना को ‘काला दिन’ कहा। हमें, उसके परिणामों का सामना करना होगा।

समाप्त होना ही 370 की नियति थी

स्थिति सामान्य करने में हमें सरकार की मदद करनी चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-08-09 11:02 UTC
संसद ने संविधान की धारा 370 के उन प्रावधानों को समाप्त कर दिया है, जिनसे जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिलता था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय होगा, इसका पता तो तभी लगेगा, जब सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आएगा। फिलहाल हम कह सकते हैं कि उस राज्य का विशेष दर्जा समाप्त हो गया है। भारत का अभिन्न अंग तो वह पहले से ही है, लेकिन विशेष दर्जा समाप्त होने से अब वह देश के अन्य प्रदेशों जैसा ही हो गया है।

नफ़रत की राजनीति की आयु लंबी नहीं होती, पर बहुत नुकसानदायक होती है

नफरत की राजनीति से मुकाबला के लिए एकजुटता जरूरी
विशेष संवाददाता - 2019-08-08 16:47 UTC
हमारे देश के और दुनिया भर के बेहतरीन वैज्ञानिकों की अपने समाज के विषय में स्पष्ट समझ होती है जो मानवीय मूल्यों की ही पक्षधर होती है लेकिन हमारे यहां और दुनिया के कई देशों में आज जो सत्ता पर काबिज़ ताकतें हैं वे तमाम मनगढ़ंत अवधारणाओं को अपने हितों के लिए उभार रही हैं, जो कि समाज के लिए खतरनाक है। यह विचार प्रख्यात ऊर्जा विज्ञानी व जन विज्ञान कार्यकर्ता प्रबीर पुरकायस्थ के हैं। भोपाल में “आज के हालात - चुनौतियां और विकल्प” विषय शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए।

मौलाना आजाद और भारत छोड़ो आंदोलन

जरा याद करो कुर्बानी
एल एस हरदेनिया - 2019-08-08 09:16 UTC
सच पूछा जाए तो कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन की तिथि तय नहीं की थी। वास्तव में अप्रत्यक्ष रूप से भारत छोड़ो आंदोलन की तिथि अंग्रेज़़ों ने तय कर दी थी। हुआ यह कि 7 और 8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का अधिवेशन आयोजित किया गया था। अधिवेशन में ही 8 अगस्त को यह प्रस्ताव पारित हुआ कि अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद को कह दिया जाए कि अब आप भारत को छोड़ दें। गांधी जी को उम्मीद थी कि इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद शायद अंग्रेज़ शासक कांग्रेस को बातचीत के लिए आमंत्रित करेंगे। परंतु ऐसा नहीं हुआ और 9 अगस्त की प्रातः 4 और 5 बजे के बीच कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया उनमें महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुलकलाम आज़ाद, सरोजनी नायडू आदि शामिल थे। सच पूछा जाए तो कांग्रेस की पूरी की पूरी कार्यकारिणी के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया था।