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अंडमान में अमेरिकी नागरिक की हत्याः आखिर चूक कैसे हुई ?

उपेन्द्र प्रसाद - 2018-11-26 09:45 UTC
अमेरिकन नागरिक जाॅन एलन चाउ अंडमान निकोबार की एक टापू पर मारा गया। सच कहा जाय, तो उसकी हत्या नहीं हुई, बल्कि उसने आत्महत्या कर ली। उसे पूरी तरह से पता था कि जो कुछ वह करने जा रहा है, उसका अंजाम उसकी मौत भी हो सकती है। उसने अपने परिवार वालों को यह संदेश भी छोड़ दिया था कि यदि वह वहां से वापस नहीं लौटता है और मारा जाता है, तो इसके लिए वे उस टापू के लोगों यानी उसके हत्यारों को जिम्मेदार न समझें और उन्हें माफ कर दें।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में मां और मामा बन रहे हैं मुद्दे

कांग्रेसी चक्रव्यूह को तोड़ने की भाजपाई कोशिश
राजु कुमार - 2018-11-24 12:18 UTC
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस शुरुआत से ही भाजपा पर भारी पड़ रही है। बीच में ऐसा लगने लगा था कि भाजपा की रणनीति के आगे कांग्रेस पिछड़ रही है, लेकिन भाजपा जिस तरीके से इमोेशनल कार्ड खेलने लगी है, उससे लगता है कि वह कांग्रेसी चक्रव्यूह को भेद नहीं पाई है। यद्यपि यह कहना मुश्किल है कि किसकी रणनीति कारगर साबित होगी और किसकी सरकार बनेगी, लेकिन चुनाव के आखिरी दिनों में मां और मामा मुद्दे बनने लगे हैं।

अयोध्या विवाद पर तनातनी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं कर लेते?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-11-24 11:31 UTC
उधर मामला सुप्रीम कोर्ट में लटका हुआ है और इधर अयोध्या में अभूतपूर्व स्थिति बन गई है। मंदिरवादी अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने को भी तैयार नहीं और वे किसी भी सूरत में मंदिर के निर्माण का काम शुरू करने पर उतावला हो रहे हैं। इसमें सबसे गंभीर बात तो यह है कि मंदिर निर्माण की धमकियों के बीच न तो केन्द्र की मोदी सरकार और न ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की ओर से कुछ भी कहा जा रहा है, हालांकि विवादित स्थल की सुरक्षा के लिए वहां पुलिस की भारी पैमाने पर तैनाती की जा रही है। पर सवाल यह है कि पुलिस वहां क्या कर लेगी? फैसला तो सरकार के राजनैतिक नेतृत्व यानी नरेन्द्र मोदी को करना है और वे क्या करेंगे, इसके बारे में वे किसी प्रकार का संकेत नहीं दे रहे हैं।

गठबंधन न करने के लिए सपा और बसपा का कांग्रेस पर हमला

सत्ता विरोधी लहर से भाजपा मुश्किल में
एल एस हरदेनिया - 2018-11-23 11:00 UTC
भोपालः कांग्रेस को तीन-तरफा हमले का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी के अलावा, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने भी कांग्रेस की कड़ी आलोचना की है। दोनों पक्षों ने कांग्रेस पर राज्य के 15 साल के भगवा शासन को समाप्त करने के लिए भाजपा विरोधी मतदाताओं को एकजुट होने से रोकने का आरोप लगाया है।
मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव

माइक्रो मैनेजमेंट और इमोशन पर जोर दे रही कांग्रेस और भाजपा

आप, बसपा, सपा किंगमेकर बनने की राह पर
राजु कुमार - 2018-11-22 16:10 UTC
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में महज चंद दिन रह गए हैं। मध्यप्रदेश में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में ही है, लेकिन बसपा, सपा और आम आदमी पार्टी को भी उम्मीद है कि इस बार विधानसभा में उनकी उपस्थिति होगी। राजस्थान की तरह मध्यप्रदेश को लेकर कोई स्पष्ट कहने को तैयार नहीं है कि अगली सरकार किसकी होगी? मध्यप्रदेश में कई सारे फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से अंदाजा लगाना मुश्किल है कि जनता का रूख क्या होगा? पिछले तीन विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत को लेकर बहुत कम संशय रहा है। सीटों की संख्या को लेकर ही अटकलें लगती रही थीं। लेकिन 2018 की परिस्थितियां पहले की तरह नहीं है। कांग्रेस आश्वस्त है कि इस बार जनता उसे ही सत्ता सौंपेगी, तो दूसरी ओर भाजपा को अपने मजबूत संगठनात्मक ढांचे पर भरोसा है।

सभी धर्मों में सम्माननीय हैं गुरू नानक

योगेश कुमार गोयल - 2018-11-22 10:22 UTC
गुरू नानक जयंती प्रतिवर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है लेकिन यह कारण अभी तक ज्ञात नहीं है कि उनकी जयंती किसी एक निर्धारित तिथि को न मनाकर कार्तिक मास की पूर्णिमा को ही क्यों मनाई जाती है? सिख धर्म के आदि संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म तलवंडी (जो भारत-पाक बंटवारे के समय पाकिस्तान में चला गया) में सन् 1469 में हुआ था। गुरू नानक देव सिखों के पहले गुरू हुए हैं और वे न केवल सिखों में बल्कि अन्य धर्मों के लोगों में भी उतने ही सम्माननीय रहे हैं।
राजस्थान विधानसभा चुनाव

टिकट वितरण में गड़बड़ी कांग्रेस को भारी पड़ सकती है

रमेश सर्राफ - 2018-11-21 10:12 UTC
राजस्थान में कुछ दिनो पूर्व तक लग रहा था कि कांग्रेस भारी बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। कांग्रेस भाजपा सरकार को पूर्ण विफल साबित करने में सफल लग रही थी। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के चयन में मुख्यमंत्री राजे का केन्द्रीय नेतृत्व से चले टकराव से भाजपा की आन्तरिक गुटबाजी सडक पर आ गयी थी। पहले जयपुर राजघराने से सम्बन्धित राजमहल प्रकरण, फिर आनन्दपाल एनकाऊंटर प्रकरण ने राजपूत समाज को प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री से नाराज कर दिया था। पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह जसौल के पुत्र मानवेन्द्र सिंह के भाजपा छोडकर कांग्रेस में शामिल हो जाने से लगने लगा था कि इस बार राजपूत समाज भी खुलकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करेगा।

कुछ हिन्दू कट्टरवादियों ने किया एक महान संगीतज्ञ का अपमान

कांग्रेस ने साध रखी है आपराधिक चुप्पी
एल एस हरदेनिया - 2018-11-20 09:25 UTC
पता नहीं क्यों प्रतिक्रियावादी दक्षिणपंथियों को संगीत नहीं भाता। यदि गुलाम अली की गजलों का कार्यक्रम घोषित होता है तो ये धमकी देते हैं कि हम उसे नहीं होने देंगे। अभी हाल में इन्होंने ऐसी ही घिनौनी हरकत की जब उन्होंने घोषणा की कि स्मिक मैके और एयरपोर्ट अथॉरिटी के संयुक्त तत्वाधान में होने वाले एक संगीत समारोह का आयोजन वे नहीं होने देंगे। उनकी आपत्ति थी कि इस संगीत समारोह में कर्नाटक संगीत के महान गायक टीएम कृष्णा भाग ले रहे हैं और कृष्णा का अपराध यह है कि उनका संगीत ईसाई और मुस्लिम विषयवस्तु पर आधारित है।

राजस्थान चुनाव में कोई लहर नहीं

बगावती तेवरों के बीच कांटे की है टक्कर
भरत मिश्र प्राची - 2018-11-19 10:50 UTC
विधान सभा चुनाव के प्रारम्भिक दौर में राजस्थान प्रदेश में राजनीतिक हलचलें तेज हो चली है जहां 7 दिसम्बर को चुनाव होने वाले है। प्रदेश में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ढोल - नगारे के साथ कोई हाथी पर तो कोई ऊंट पर तो कोई घोड़े पर सवार अपना नामांकन कराने चुनावी मुख्य कार्यालय को विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि पहुंचने शुरू हो गये है। इस बार प्रदेश में कोई पूर्व की तरह विशेष चुनावी लहर नजर नहीं आ रही है जिसका लाभ पूर्व की भाॅति राजनीतिक दल को मिल सके । जिसके कारण अभी भी उम्मीद सत्ता पक्ष भाजपा को बनी हुई है।

मोदी की असली चुनौती विधानसभा चुनावों के बाद

एससी एसटी एक्ट पड़ सकता है भारी
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-11-17 10:06 UTC
पांच प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव के नतीजों के बाद आगामी लोकसभा चुनाव का मूड तैयार हो जाएगा और वह चुनाव अन्य चुनावों से काफी अलग होगा। उसमें एक बार फिर नरेन्द्र मोदी की निजी प्रतिष्ठा दांव पर लगी होगी। पिछले 2014 का लोकसभा चुनाव भ्रष्टाचार के खिलाफ चले एक बहुत बड़े आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुआ था। उस आंदोलन ने कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों की चूलें हिला दी थी। राजनीति में एक निर्वात पैदा हो गया था, जिसे नरेन्द्र मोदी ने अपने मार्केटिंग कौशल से भर दिया। सोशल मीडिया और टीवी मीडिया का इस्तेमाल करके भी एक ऐसा माहौल तैयार किया गया, जिसमें लगने लगा कि नरेन्द्र मोदी ही देश की सभी समस्याओं का समाधान हैं। भारतीय जनता पार्टी की स्थिति उस समय कांग्रेस से बेहतर नहीं थी। भ्रष्टाचार का आंदोलन भी उसके नेतृत्व में नहीं हुआ था। वह आंदोलन एक अराजनैतिक नेता अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुआ था, जो आंदोलन के बाद अपने गांव वापस लौट गए थे और उससे पैदा हुए माहौल को भुनाने का मौका नरेन्द्र मोदी पर छोड़ दिया।