रक्षाबंधन महज कलाई पर एक धागा बांधने की रस्म नहीं
स्नेह की डोर में बंधा प्यारा रिश्ता
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2018-08-24 11:44 UTC
श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले रक्षाबंधन पर्व की भारतीय समाज और संस्कृति में कितनी महत्ता है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि बहनों के हाथ अपने भाईयों की कलाईयों पर राखियां बांधने के लिए मचल उठते हैं और कलाई पर बांधे जाने वाले मामूली से दिखने पड़ने वाले इन्हीं कच्चे धागों से पक्के रिश्ते बनते हैं। पवित्रता तथा स्नेह का सूचक यह पर्व भाई-बहन को पवित्र स्नेह के बंधन में बांधने का पवित्र एवं यादगार दिवस है। इस पर्व को भारत के कई हिस्सों में श्रावणी के नाम से जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में ‘गुरू महापूर्णिमा’, दक्षिण भारत में ‘नारियल पूर्णिमा’ तथा नेपाल में इसे ‘जनेऊ पूर्णिमा’ के नाम से जाना जाता है।