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मध्यप्रदेश में आप की बढ़ती सक्रियता

पोहा चौपाल व किसान यात्रा पर है जोर आप का
राजु कुमार - 2018-04-14 09:17 UTC
मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनावों की सघन तैयारी में जुट गई है। पार्टी ने प्रदेश के हर घर तक पहुंचने के लिए रणनीति बनाई है। पिछले एक साल से आप मध्यप्रदेश में अपनी संगठनात्मक विस्तार देने में लगी है। अब मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कुछ महीने ही रह गए हैं। ऐसे में आप की कोशिश है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उसकी सशक्त उपस्थिति हो। आप एक ओर आम जनता से अपने को कनेक्ट करने के लिए पोहा चैपाल एवं किसान यात्रा पर जोर दे रही है, तो दूसरी ओर संभावित उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया भी शुरू कर चुकी है। राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सक्रियता भी मध्यप्रदेश में बढ़ गई है।

बीजेपी अब देश के क्रोनी कैपिटलिस्टों की डार्लिंग

विशाल धन 2019 के चुनाव में इसकी सबसे बड़ी ताकत
नित्य चक्रवर्ती - 2018-04-13 13:02 UTC
भारतीय जनता पार्टी केंद्र में और देश के कुल 29 राज्यों में से 21 में सत्ता में होने का लाभ उठाते हुए अपना खजाना लगातार बढ़ाती जा रही है। राजनीतिक दान प्राप्त करने के मामले में राजनीतिक दलों के बीच भाजपा की नंबर एक की स्थिति के बारे में एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की नवीनतम रिपोर्ट में कोई नई बात नहीं है, लेकिन जो खुलासा हुआ है, वह यह है कि भाजपा और मुख्य विपक्ष कांग्रेस के बीच अंतर काफी बढ़ गया है। 2016-17 में बीजेपी के खजाने में आमद 81 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि कांग्रेस के खजाने में आमद 14 फीसदी की। इसका अर्थ है कि 2016-17 में भाजपा की आमदनी कांग्रेस के चार गुना से अधिक है।
कर्नाटक विधानसभा का चुनाव

खराब हो चुकी है भाजपा की राजनैतिक जमीन

उपेन्द्र प्रसाद - 2018-04-13 07:09 UTC
राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में हुए उपचुनावों में हार का सामना करने के बाद कर्नाटक की जीत भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह सच है कि इस समय उसकी या उसकी भागीदारी वाली सरकारें देश के 21 राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों में है, लेकिन उसके लिए अगला लोकसभा चुनाव जीतना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। यदि लोकसभा मे उसकी जीत नहीं हुईं, तो फिर 21 राज्यों में से अनेक में उसकी सरकारें जाती रहेंगी। और लोकसभा में जीत दर्ज करने के लिए उसे देश के उन राज्यों के मतदाताओं पर अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी, जहां से लोकसभा की ज्यादा सीटें आती हैं।

यह देश अपनों का देश है किसी और का नहीं

आंदोलन के तौर तरीकों को हमें बदलना होगा
भरत मिश्र प्राची - 2018-04-13 07:05 UTC
देश को आजादी तो मिली पर आज तक किसी ने इसे अपना नहीं समझा। सभी इसे आज तक इसे अपने अपने तरीेके से स्वहित में कमजोर बनाने में लगे है। आजतक आंदोलन के तौर तरीेके पूर्व की भाॅति ही देखे जा सकते जहां तोड़ - फोड़, आगजनी, रेल पटरी उखड़ने जैसी अहितकारी घटनाएं आज भी जारी हैं, जिनमें सबसे ज्यादा सार्वजनिक एवं राष्टीªय सम्पति का नुकसान ही होता है जिसकी भरपाई किसी और को नहीं , अपने को ही करनी पड़ती है। आज यह देश किसी और का नहीं , अपनो की ही देश है जिसे समझना बहुत जरूरी है। इस तथ्य को नहीं समझने के कारण आज भी लुटेरे इस देश को लूट रहे है। देश में सबकुछ रहते हुए भी विकास के कदम से कई कदम हम पीछे खड़े है। बाजारवाद में कभी अग्रणी रहा हमारा देश आज पीछे खड़ा है जहां विदेशी सामानों की भरमार है। सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की तहत लगे देश में बड़े उद्योग बंदी की कगार पर है। आंदोलन के तहत देश की करोड़ो की सम्पदा का आज तक नुकसान पहुंचा चुके है।

कौन है संसद में हंगामे के गुनहगार?

लोकतंत्र के भविष्य के लिए यह अशुभ संकेत है
अनिल जैन - 2018-04-10 09:21 UTC
देश की सबसे बडी पंचायत यानी संसद में जिस तरह का अभूतपूर्व गतिरोध इस बजट सत्र के दौरान बना, उसे देखते हुए डेढ दशक पुराना वाकया याद आता है। साल 2003 की बात है। उस समय देश में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में राष्ट्रीय गठबंधन की सरकार थी। अमेरिका ने इराक पर हमला बोल दिया था। विपक्षी पार्टियां संसद में अमेरिका के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कराने की मांग कर रही थीं। विदेश मंत्रालय एक वक्तव्य जारी कर उस हमले की निंदा कर चुका था लेकिन तत्कालीन विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा संसद में निंदा प्रस्ताव लाने के पक्ष में नहीं थे। कुछ दिनों तक हंगामे की वजह से संसद में गतिरोध बना रहा। अंततः वाजपेयी ने सिन्हा और तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री सुषमा स्वराज को बुलाकर उन्हें समझ दी कि संसद सुचारू रूप से चले यह जिम्मेदारी सरकार की होती है, लिहाजा हमें विपक्ष से सिर्फ मीडिया के माध्यम से ही संवाद नहीं करना चाहिए बल्कि संसद से इतर अनौपचारिक तौर पर भी बात करते रहना चाहिए।

चौहान की वोट बैंक राजनीति उलटी पड़ी

समर्थन कम विरोध ज्यादा
एल एस हरदेनिया - 2018-04-09 11:29 UTC
भोपालः मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मतदाताओं का समर्थन जीतने के लिए जो कदम उठाए, उसका असर उल्टा हुआ। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से 62 साल करने का निर्णय लिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह निर्णय राज्य सरकार के कर्मचारियों और उनके परिवारों के वोटों को उनके वोट बैंक में जोड़ देगा। लेकिन इस निर्णय ने सरकारी कर्मचारियों की एक बड़ी संख्या को संतुष्ट नहीं किया बल्कि इसके कारण सरकार को बेरोजगार युवाओं के क्रोध का सामना करना पड़ा, जिनकी संख्या लाखों में है। सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से बेरोजगारों के लिए रोजगार की संभावनाएं कम हो जाती हैं। इसके अलावा, यह अस्थायी कर्मचारियों की संभावनाओं को भी प्रभावित करता है जो अपनी नौकरी स्थाई होने की उम्मीद में कम वेतन पर भी काम करते रहते हैं।

तमिलनाडु में सत्ता संघर्ष चरम पर

सत्तारूढ़ एआईडीएमके को मिल रही है जबर्दस्त चुनौती
एस सेतुरमन - 2018-04-07 11:32 UTC
दिसंबर 2016 में अपने सबसे दुर्जेय एआईएडीएमके मुख्यमंत्री, सुश्री जे जयललिता के निधन के बाद से तमिलनाडु में राजनीतिक उथल-पुथल में रहा है। पहले अम्मा की विरासत का दावा करने वाले दो प्रतिद्वंद्वी गुट सत्ता के लिए एक हो गए और बिना स्पष्ट बहुमत के सत्ता पर काबिज हैं। अब उसको जबर्दस्त चुनौती मिल रही है। यह चुनौती न केवल विपक्षी डीएमके से मिल रही है, बल्कि पार्टी से बाहर कर दिए गए दिनकरण भी सत्ता को डांवाडोल करने का प्रयास कर रहे हैं। डीएमके तो स्टालिन के नेतृत्व में तेजी से प्रदेश की राजनीति में उभर रहा है।

जाटलैण्ड की खाप क्या बंद नहीँ कर पाएगी हुक्का- पानी?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमली जामा पहनाना एक बड़ी चुनौती
प्रभुनाथ शुक्ल - 2018-04-06 09:24 UTC
सर्वोच्च न्यायलय ने हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट समुदाय पर कानूनी चाबुक चला जातीय फैसलों के खिलाफ खाप को सोचने पर मजबूर कर दिया है। फैसले पर सरकार और खाप कितनी संवेदनशील होंगी यह तो वक्त तय करेगा, लेकिन खाप पंचायतों और उनके अस्तित्व पर खतरा खड़ा हो गया है। उनकी मनमर्जी अब नहीँ चलेगी। जातीय फैसलों के चलते खाप कभी लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर तालिबानी फैसला सुनाती हैं, तो कभी आॅनर किलिंग को लेकर चर्चाओं में रहती हैं। सर्वोच्च अदालत का यह फैसला गैर सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी की एक याचिका पर आया है। इस फैसले से क्या जातीय पंचायतों यानी खाप अब लोगों के हुक्के - पानी नहीँ बंद कर पाएगी ?

निमोनिया व दिमागी बुखार से बचाव की पहल

पीसीवी टीका से कवर होगा संपूर्ण मध्यप्रदेश
राजु कुमार - 2018-04-06 09:20 UTC
मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में से है, जहां शिशु मृत्यु दर, बाल मृत्यु दर एवं कुपोषण बहुत ही ज्यादा है। शिशु मृत्यु दर एवं बाल मृत्यु दर को कम करना सरकार के लिए चुनौती रहा है। अभी भी आशातीत सफलता नहीं मिल पाई है, यद्यपि आईएमआर एवं आईएमआर में पिछले कुछ सालों में गिरवाट आई है। इसके लिए कारक बीमारियों से बचाव में टीकाकरण की भूमिका महत्वपूर्ण है।

सांसत में सरकार,दलित एक्ट पर पलटा

उपेन्द्र प्रसाद - 2018-04-05 12:22 UTC
अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारक) कानून, जिसे दलित या हरिजन एक्ट के रूप में भी जाना जाता है, आज नरेन्द्र मोदी की सरकार के गले का फंदा बन गया है। मोदी सरकार और खुद प्रधानमंत्री मोदी इस कानून को लेकर सांसत में पड़ गए हैं और उनकी उतनी फजीहत केन्द्र में सत्ता मे आने के बाद कभी नहीं हुई, जितना आज इस एक्ट के कारण हो रहा है।