तोड़-फोड़ की राजनीति राष्ट्रहित में कदापि नहीं
आंदोलन अहिंसक ही होना चाहिए
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2018-04-04 10:51 UTC
आजादी के बाद देश में जब भी विरोध जताने की प्रक्रिया शुरू होती है, तोड़ - फोड़ की राजनीति शुरू हो जाती है। देश में कार्यरत वोट बटोरने की राजनीति से प्रेरित राजनीतिक पार्टियां अपने स्वहित में इस तरह के आंदोलन को शांत करने के बजाय और उग्र बनाने की दिशा में सक्रिय हो उठती है। इससे इस तरह के आंदोलन को भडकाने में और ज्यादा शह मिलने लगती है। इस तरह के आंदोलन में शामिल वास्तविकता से काफी दूर खड़ी भीड़ अपने ही देश को बर्वादी के कगार पर पहुंचाने में मददगार होती है।