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तोड़-फोड़ की राजनीति राष्ट्रहित में कदापि नहीं

आंदोलन अहिंसक ही होना चाहिए
भरत मिश्र प्राची - 2018-04-04 10:51 UTC
आजादी के बाद देश में जब भी विरोध जताने की प्रक्रिया शुरू होती है, तोड़ - फोड़ की राजनीति शुरू हो जाती है। देश में कार्यरत वोट बटोरने की राजनीति से प्रेरित राजनीतिक पार्टियां अपने स्वहित में इस तरह के आंदोलन को शांत करने के बजाय और उग्र बनाने की दिशा में सक्रिय हो उठती है। इससे इस तरह के आंदोलन को भडकाने में और ज्यादा शह मिलने लगती है। इस तरह के आंदोलन में शामिल वास्तविकता से काफी दूर खड़ी भीड़ अपने ही देश को बर्वादी के कगार पर पहुंचाने में मददगार होती है।

बड़े पैमाने पर बैंक फ्राॅड और बढ़ता राजनैतिक जोखिम

वैश्विक निवेश बैंकर्स भारत को लेकर भयभीत
नन्तू बनर्जी - 2018-04-03 09:49 UTC
यह असामान्य दिख सकता है कि गोल्डमैन सैक्स और नोमुरा के नेतृत्व में वैश्विक निवेश बैंकर अचानक एक बेहतर निवेश और विकास गंतव्य के रूप में भारत के बारे में अपनी धारणा बदल रहे हैं। पिछले महीने भारत पर नोमुरा की शोध रिपोर्ट कहती है कि भारत में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ रही है और ‘सत्तारूढ़ बीजेपी बैकफुट पर है’। नोमुरा रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि राजनीतिक जोखिम निश्चित रूप से बड़ा है। निवेश बैंक की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से निष्कर्ष निकालती है कि 2018-19 की तीसरी तिमाही (सितंबर-दिसंबर) में लोकसभा चुनाव हो सकता है। गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट 2 अरब डॉलर से अधिक की पीएनबी धोखाधड़ी के मद्देनजर भारत के पूर्वानुमानों को घटाकर देखती है। वैश्विक निवेश बैंकर ने चेतावनी दी है कि बढ़ते बैंक धोखाधड़ी से बैंकिंग क्षेत्र में विनियमन सख्त हो सकता है, जो क्रेडिट वृद्धि को बाधित कर सकता है।

हिंदुत्व बिहार की नई मुसीबत

इसे अपनी अस्मिता की तलाश करने की जरूरत
अनिल सिन्हा - 2018-04-02 09:36 UTC
बिहार ने पिछले 23 मार्च को 106 साल पूरे होने का जश्न मनाया। लेकिन ठीक इसी समय, राज्य के आठ शहरो मंे संाप्रदायिकता की आग भड़क उठी। इस आग से बचे रहने वाले बिहार में ऐसी स्थिति का आना राज्य के सामने नए खतरे का संकेत देता है। हर कसौटी पर पीछे चल रहे इस राज्य के पास दंगों और उपद्रव का दौर देखने का समय नहीं है। जातिवाद से झुुलस रहे इस राज्य में मजहबी जुनून इसे और भी पीछे ले जाएगा।

प्रश्नपत्र लीक घोटाला मोदी सरकार की छवि पर एक और धब्बा

उपेन्द्र प्रसाद - 2018-03-31 10:18 UTC
जैसे जैसे आगामी लोकसभा का चुनाव नजदीक आता जा रहा है, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की चुनावी जीत की संभावना कम होती जा रही है। एक समय था, जब भाजपा के विरोधियों को भी लगता था कि 2019 के चुनाव में नरेन्द्र मोदी को हराना असंभव है। निष्पक्ष राजनैतिक विश्लेषक भी मानते थे कि विपक्षी पार्टियों की कमजोर स्थिति के माहौल में भारतीय जनता पार्टी को अगला चुनाव जीतने में कोई मुश्किल नहीं होगी। कुछ लोग यह भी कहते थे कि विपक्ष में नरेन्द्र मोदी को पराजित करने का माद्दा नहीं हैं और यदि मोदी हारते हैं, तो वे अपने ही कारणों से हारेंगे।

असंगठिज क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक असाधारण कदम

बीजेपी राज्य विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ प्राप्त करने की कोशिश कर रही है
एल एस हरदेनिया - 2018-03-30 10:44 UTC
भोपालः जैसे-जैसे 2018 विधानसभा चुनाव की तारीख करीब आ रही है, बीजेपी की अगुवाई वाली मध्यप्रदेश सरकार समाज के वंचित वर्गों को चांद लाकर देने का वादा कर रही है।

कर्नाटक चुनाव भाजपा के लिए ‘करो या मरो’ की लड़ाई

उपेन्द्र प्रसाद - 2018-03-29 10:51 UTC
कर्नाटक विधानसभा के आमचुनाव की तारीखों की घोषणा हो गई है। वैसे पहले से ही वहां कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी चुनावी मोड में है। दोनों पार्टियों के लिए यह चुनाव काफी मायने रखता है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए वह कुछ ज्यादा ही मायने रखता है। इसका एक कारण तो यह है कि वहां इस समय कांग्रेस की सरकार है और भारतीय जनता पार्टी के पास सत्ता विरोधी जनभावना का लाभ उठाने का अच्छा मौका है। अब तक भारतीय जनता पार्टी इस तरह के मौके का लाभ उठाती रही है। पिछले दिनों ही उसने त्रिपुरा में भी जीत हासिल की थी और उसकी जीत का मुख्य कारण यही था कि वहां की जनता बदलाव चाहती थी।

लोकतंत्र की रक्षा के लिये लोकपाल पर अमल जरूरी

पर वह निर्वाचित लोकपाल होना चाहिए
भरत मिश्र प्राची - 2018-03-28 09:54 UTC
भारतीय लोकतंत्र में देश की संसद सर्वोपरि होती है, जिसके सम्मानीय सदस्य जनता द्वारा चुने जाते है। उनके हाथों में प्रशासन से लेकर देश की सुरक्षा, अस्मिता, विकास एवं समस्त प्रकार की कार्यप्रणाली संभलाई गई है। यदि इस व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमिताएं पाई जाय तो इसपर अंकुश लगाने के लिये भरतीय लोकतंत्र में संसद से बढ़कर कोई और फिलहाल सुप्रीम पाॅवर नहीं है।

ग्रामोदय मेला में मिली राष्ट्रीय लोक संस्कृति की झलक

ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर लोकरंग की धमक
राजु कुमार - 2018-03-27 10:20 UTC
बुरहानपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र की सीमा पर बसे धामनगांव में मां वाघेश्वरी का देवी मंदिर है। मंदिर के प्रति यहां के लोगों में गहरी आस्था है, इसलिए नवरात्रि के दरम्यान आसपास के गांव के साथ-साथ बुरहानपुर से भी लोग पूजा करने यहां आते हैं। इन्हीं दिनों में मंदिर प्रांगण में बने एक कुटियानुमा कमरे में बैठती हैं मध्यप्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस।

सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा नेतृत्व सकते में

भाजपा विरोध के नाम पर विपक्षी पार्टियां हो रही हैं एक
प्रदीप कपूर - 2018-03-27 10:17 UTC
लखनऊः गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सफलता के बाद, सपा-बसपा गठबंधन 2019 के चुनावों में गेम चंेजर की भूमिका अदा करने के लिए तैयार हो रहा है।

राहुल गांधी का ‘पांडव’ शायद काम करे

कांग्रेस 2019 के चुनाव को महाभारत के रूप में लड़ना चाह रही है
हरिहर स्वरूप - 2018-03-26 09:20 UTC
कांग्रेस के सभी पूर्ण अधिवेशन सत्र लोगों को कुछ न कुछ खास संदेश भेजता रहा है। जब कांग्रेस ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे करते हुए जून 1985 में बॉम्बे में अपना शताब्दी साल का सम्मेलन किया था, जो उस समय राजीव गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थे और प्रधानमंत्री भी। उन्होंने अपना प्रसिद्ध ‘शक्ति के दलाल’ वाला भाषण दिया। उस समय कांग्रेस भारत की राजनीति में अपने शीर्ष पर थी। उसे लोकसभा चुनाव मे तब 400 से अधिक सीटें मिली थीं। अधिकांश राज्यों में सरकार भी तब उसकी ही थी।