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विपक्षी एकता: विचारधारा की उलझनें

विपक्षी पार्टियों के पास मोदी-विरोध का कोई साझा मुद्दा नहीं
अनिल सिन्हा - 2018-05-05 10:37 UTC
दिल्ली के कंस्टीच्यूशन क्लब में 1 मई को लगी विपक्षी नेताओं की जमघट असरदार थी। कई पार्टियों ने इसमें हिस्सा लिया। समाजवादी अंादोलन के शीर्ष नेताओं में से एक मधु लिमये की जयंती पर आयोजित इस सभा का विषय भी मौके के मुताबिक ही था-प्रगतिशील ताकतों की एकता। मधु लिमये आरएसएस और भारतीय जनसंघ (भारतीय जनता पार्टी का पुराना संस्करण) के कट्टर विरेाधी तथा समाजवादी और साम्यवादी पार्टियां की एकता के हिमायती थे। हालांकि गैर-कांग्रेसवाद और इंदिरा गांधी के तीखे विरोध की राजनीति में वे आगे रहे, लेकिन अपनी धारा के वे शायद अकेले नेता थे जिन्होंने आरएसएस की राजनीति का उस समय इतना तीव्र विरोध किया था जब कोई उसे बड़ा खतरा मानने को तैयार नहीं था। वे हिंदुत्व को देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते थे। उन्होंने 1977 में सत्ता में आई जनता पार्टी के उन सदस्यों को आरएसएस की सदस्यता छोड़ने के लिए कहा था जो भारतीय जनसंघ के विलय के बाद पार्टी में आए थे।

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का हर घर पहुंचने की योजना

मध्यप्रदेश के चुनावों में सोशल मीडिया पर रहेगा जोर
राजु कुमार - 2018-05-05 03:58 UTC
मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ भाजपा ने आज से चुनावी शंखनाद कर दिया। भोपाल में आयोजित भाजपा के प्रदेश स्तरीय विस्तारित बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की। इसमें भाजपा के मंडल स्तरीय पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर अमित शाह ने पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में भाजपा बहुत अधिक मार्जिन से जीत को सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी हर घर तक जाएं। प्रदेश में हर व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचनी चाहिए और उनकी अपेक्षाएं पार्टी तक आनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस विभाजनकारी नीतियों पर चल रही है। कांग्रेस के लोग संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपमानित करने का काम कर रही है।

कांग्रेस एवं भाजपा के लिए प्रतिष्ठा बना कर्नाटक का चुनाव

पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा बन सकते हैं किंगमेकर
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-05-04 10:31 UTC
दक्षिण भारत के कर्नाटक में, जहां कांग्रेस सŸााधारी है, मई माह के दूसरे सप्ताह में होने जा रहे विधान सभा चुनाव क्षण प्रति क्षण रोचक बनते जा रहे है जहां देश के प्रमुख दो राष्ट्रीय राजनैतिक दल भाजपा एवं कांग्रेस आमने सामने है जिनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। वहां कांग्रेस अपनी सŸाा को बरकरार रखने के प्रयास में जी तोड़ मेहनत कर रही है वहीं भाजपा पूर्वोत्तर भारत की त्रिपुरा एवं मेघालय राज्य में अपना परचम लहराने के बाद दक्षिण भारत की प्रमुख विधान सभा क्षेत्र कर्नाटक पर अपना विजय पताका फहराकर यह साबित करने के अथक प्रयास में जुटी दिखाई दे रही है कि देश के चारो ओर उसी का सम्राज्य स्थापित हो चला है।

सीरिया और तुर्की में असुरक्षित अभिव्यक्ति

वैश्विक स्तर पर सिकुड़ती प्रेस की आजादी
प्रभुनाथ शुक्ल - 2018-05-03 16:07 UTC
अभिव्यक्ति की आजादी का सीधा सवाल प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा है। जिस मुल्क में वैचारिक आजादी की स्वतंत्रता नहीं, वहां कभी सच्चे लोकतंत्र की स्थापना नहीं की जा सकती है। अभिव्यक्ति की स्वाधीनता न सिर्फ बोलने, लिखने की आजादी देता है बल्कि समता, समातना की स्थापना कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाती है। वैश्विक स्तर पर बदलते हालता प्रेस की आजादी पर सवाल खड़े करते हैं। मीडिया संस्थानों में अब निष्पक्ष तौर से काम करना जोखिम भरा हो गया है।

राष्ट्रीय अपराध है राष्ट्रीय धरोहरों की यह सौदेबाजी

आखिर सरकार ऐसा कर क्यों रही है?
अनिल जैन - 2018-05-03 07:57 UTC
देश के बेशकीमती संसाधनों- जल, जंगल, जमीन के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, सेना, रेलवे, एयरलाइंस, संचार आदि सेवाएं तथा अन्य बडे-बडे सार्वजनिक उपक्रमों को मुनाफाखोर उद्योग घरानों के हवाले करने के बाद अब सरकार देश के लिए ऐतिहासिक महत्व की विश्व प्रसिद्ध धरोहरों को उनके रख-रखाव के नाम पर कारपोरेट घरानों के हवाले कर रही है, वह भी उनसे औपचारिक तौर पर कुछ पैसा लिए बगैर ही। सवाल है कि जो ऐतिहासिक धरोहरें सरकार के लिए सफेद हाथी न होकर दुधारू गाय की तरह आमदनी का जरिया बनी हुई हैं, उन्हें सरकार क्यों निजी हाथों में सौंप कर अपने नाकारा होने का इकबालिया बयान पेश कर रही है?

सीपीएम की 22वीं कांग्रेस

बड़ी चुनौती और येचुरी के बंधे हाथ
अनिल सिन्हा - 2018-05-01 11:35 UTC
अखिरकार लोगों की आशंकाओं को गलत साबित करते हुए सीपीएम की पार्टी कांगे्रस ने केंद्रीय समिति की ओर से पेश किए गए राजनीतिक मसविदे में परिवर्तन कर दिया। आमतौर पर ऐसा होता नहीं है और केंद्रीय समिति के प्रस्ताव को ही पार्टी कांग्रेस में मंजूरी दी जाती है। लेकिन पार्टी ने इस बदलाव के जरिए यह दिखा दिया कि वह परिस्थितियों के हिसाब से जरूरी लचीलापन अपना सकती है। इसे फैसले ने पार्टी को एक बड़े भीतरी मतभेद से भी बचा लिया है।

संघीय मोर्चा क्या राजनैतिक विकल्प दे पाएगा?

के चन्द्रशेखर राव की पहल
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-04-28 11:25 UTC
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव ने गैर कांग्रेस और गैर भाजपा विकल्प के निर्माण के लिए कमर कस ली है। यह नरेन्द्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी को विकल्प के रूप में पेश करने की कांग्रेस की कोशिश को दी जा रही चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। यदि भाजपा को अपने सहयोगी पार्टियों के साथ भी लोकसभा के आगामी चुनाव के बाद बहुमत नहीं मिले, तो फिर क्या फिर सरकार किस पार्टी के नेतृत्व में बने और उस गठबंधन का नेता कौन हो, यह आज का सबसे मौजू सवाल है।

जजों की नियुक्तियांः इस युद्ध का अंत नहीं

केएम जोसेफ के खिलाफ भाजपा को अनेक आधार हैं
सुशील कुट्टी - 2018-04-27 11:17 UTC
न्यायाधीशों पर युद्ध निरंतर जारी है। यदि युद्ध रेखाएं खींची जाती हैं, तो युद्ध के मैदान के कैनवास दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। अब, मामला सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्तियों तक पहुंच गया है। जबकि एक न्यायाधीश को कांग्रेस और बीजेपी दोनों की सहमति से नियुक्त किया गया है, तो मलयाली न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की नियुक्ति पर संघर्ष चल रहा है।

क्या हम तीसरे युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं?

यदि यह युद्ध हुआ तो तो फिर महाविनाश ही होगा
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-04-26 10:58 UTC
आज फिर से विश्व की महाशक्तियां एक दूसरे को चुनौती देने लगी है जिससे तीसरे विश्वयुद्ध की स्थितियां बनती नजर आने लगी है जिसका स्वरूप पहले से भी कहीं ज्यादा भयानक एवं विध्वंशक हो सकता है। दूसरे विश्वयुद्ध की भयानक स्थिति को नकारा नहीं जा सकता जिससे विश्व के प्रभावित देश जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी आज तक नहीं सुधर सके। वहां आज भी उसके विकृृत प्रतिकूल प्रभाव जन्म लेने वाली पीढ़ियों पर देखा जा सकता । आज जबकि पहले से कहीं ज्यादा मानव अहितकारी विध्वंसक परमाणु से लेकर रसायनिक हथियार सभी के पास विशाल मात्रा में पड़े है, जो सभी के लिये खतरे की घंटी बने हुये है। जब इस तरह के हथियारों की गूंज हवा में टकरायेगी, मानवता का विनाश होना निश्चित है, जहां किसी के बचने की कहीं गुंजाईश नजर नहीं आती ।

उत्तर प्रदेश में भाजपा आ गई है चुनावी मोड में

गांवों और दलितों तक पहुंच बनाने का अभियान शुरू
प्रदीप कपूर - 2018-04-25 11:08 UTC
लखनऊः बीजेपी अब 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए उत्तर प्रदेश में चुनाव मोड में आ गई है। लोकसभा सीटों के लिए हुए गोरखपुर और फुलपुर के दो उपचुनावों में अपमानजनक हार के बाद नुकसान को कम करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य की राजधानी का दौरा किया और मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ-साथ वरिष्ठ पार्टी के नेताओं के साथ भी चर्चा की।