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लाभ का पद और दिल्ली के विधायक

निर्वाचन आयोग का अनुचित फैसला
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-01-24 14:13 UTC
आखिर दिल्ली में वही हुआ, जिसकी आशंका थी। वैसे यह गलत हुआ। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत की इसमें पूरी तरह अवहेलना हुई। यह सिद्धांत यह है कि आरोपी को अपना पक्ष रखने का पूरा समय दिया जाता है और उसके बाद ही कोई निर्णय किया जाता है। लेकिन राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग ने उन विधायकों को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया, जिन पर लाभ के पद पर रहने का आरोप लगाया गया था।

मायावती ने अपने समर्थकों को चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा

समय से पहले लोकसभा चुनाव की भविष्यवाणी की
प्रदीप कपूर - 2018-01-23 11:01 UTC
लखनऊः बसपा प्रमुख मायावती को लगता है कि मोदी सरकार समय से पहले ही चुनाव करवा सकती है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के लिए एक साल बाद चुनाव लड़ना कठिन साबित हो सकता है। उन्होंने यह बात अपने जन्मदिन के दिन आयोजित एक समारोह में कही।

बीमार होती बैंकिंग व्यवस्था कैसे पटरी पर आए?

राजकोष का भी हाल खस्ता
उपेन्द प्रसाद - 2018-01-22 09:41 UTC
बैंकों की हालत बदतर होती जा रही है। उन्होंने जो कर्ज जारी किए हैं, उनमें से 8 लाख करोड़ से भी ज्यादा डूबने वाले कर्जो की श्रेणी में आ गए हैं। अपने खस्ताहाल को ठीक करने के लिए बैक जो कदम उठा रहे हैं, उनसे उनकी साख जमाकत्र्ताओं के बीच गिरती जा रही है। इस गिरती साख के कारण भी उसके नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि लोग अपनी बचत के लिए कोई और तरीका ढूुंढ़ रहे हैं। सरकार से राजकोष से बैंकों को मदद पहुंचान की कोशिश कर रही है, लेकिन उसके राजकोष भी इतना मजबूत नहीं है कि वह बैंकों को सपोर्ट कर सके। आखिर इस तरह का संकट पैदा कैसे हुआ?

बेरोजगारी से कैसे निबटें

केन्द्र सरकार को लघु उद्योगों की शरण में जाना होगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-01-20 10:00 UTC
वस्तु सेवा कर (जीएसटी) के अमल में आने के बाद आम बजट अब पहले की तरह नहीं रहेगा, जब अप्रत्यक्ष कर की दरों में बदलाव पर लोगों की नजर टिकी होती थी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बजट अब बेजान होंगे। नई आर्थिक नीतियों के तहत निजीकरण के ढाई दशक से ज्यादा बीत जाने के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था को दिशा देने वाली यदि कोई नीतिगत दस्तावेज है, तो वह आम बजट ही है।

जनोपयोगी बजट ही आम आदमी को राहत दे पायेगा

डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-01-19 13:29 UTC
केन्द्र सरकार फरवरी माह में आम बजट लाने की तैयारी कर रही है। यह बजट इस सरकार के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण रहेगा। इस वर्ष देश के अधिकांश भाग में विधानसभा चुनाव है और उनमें से ज्यादा में भाजपा की सरकार क्रियाशील है। आगामी वर्ष में लोकसभा के चुनाव भी होने है । गुजरात चुनाव उपरान्त देश का हर चुनाव केन्द्र की भापजा शासित सरकार के लिये चुनौती बना हुआ है। केन्द्र की नई आर्थिक नीति के तहत जारी बैंक नीति एवं जीएसटी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के ज्यादा आसार बनते दिखाई दे रहे है, जिसके लिये केन्द्र सरकार आंतरिक मन से ज्यादा चिंतित नजर आ रही है। बजट में इस गंभीर मुद्दे को लेकर चर्चा हो सकती है। एक तरह से यह चुनावी बजट भी हो सकता है जहां सरकार आम आदमी को विशेष राहत देने की भरपूर कोशिश करेगी पर बजट में आम आदमी को कितना राहत वर्तमान सरकार दे पायेगी, बजट उपरान्त ही पता चल पायेगा ।

हज सब्सिडी हटाकर अच्छा किया

अन्य सभी तीर्थयात्राओं से भी सब्सिडी हटा लेनी चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-01-18 11:58 UTC
सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में यह आदेश दिया था कि मुसलमानों को हज यात्रा में दी जाने वाली सब्सिडी को 2022 तक पूरी तरह समाप्त कर दिया जाय। मोदी सरकार ने इस 2018 से ही समाप्त कर दिया। यह निर्णय एकाएक नहीं हुआ है, बल्कि पिछले साल ही यह बता दिया गया था इस साल से हज यात्रा के लिए दी जाने वाली सब्सिडी पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी। सरकार का दावा है कि सब्सिडी समाप्त करने से 700 करोड़ रुपये की बचत होगी और उसे मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा।

आधार आथोरिटी का चेहरा नहीं बदला

भारत की छवि को नुकसान
के रवींद्रन - 2018-01-17 11:21 UTC
यूनिक आइडेंटिफिकेशन आथोरिटी आफ इंडिया की छवि कभी अच्छी नहीं रही। इसे चलाने वाले बाबू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में अठारहवीं सदी का तर्क इस्तेमाल करते हैं। इसलिए वह जो करना चाहते हैं और जो करते हैं उसमें कोई मेल नहीं होता है। संस्था के नाम की तरह उनका काम भी विचित्र ही है।

ऐसे तो अपना बचा-खुचा जनाधार भी गंवा देगी कांग्रेस

‘नरम हिन्दुत्व’ की राजनीति उसे डुबा देगी
अनिल जैन - 2018-01-17 11:18 UTC
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस इन दिनों अपने जीवन के सबसे चुनौती भरे दौर से गुजर रही है। देश की आजादी के बाद लगभग चार दशक तक (ढाई साल के जनता पार्टी के दौर को छोडकर) केंद्र के साथ ही देश के अधिकांश राज्यों में लगभग निर्बाध रूप से सत्ता पर काबिज रही यह पार्टी आज केंद्र शासित प्रदेश समेत महज पांच अपेक्षाकृत छोटे राज्यों में सिमटकर रह गई है। लोकसभा में उसकी सदस्य संख्या महज 46 है।

भाजपा का धार्मिक धु्रवीकरण ही सहारा

कर्नाटक भी गुजरात के रास्ते पर
अनिल सिन्हा - 2018-01-16 11:08 UTC
जहां तक चुनाव के मुद्दों का सवाल है, कर्नाटक गुजरात के रास्ते पर है। तीन-चार महीनों के भीतर चुनाव में जा रहे इस राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी के लिए असली मुद्दा यही है कि हिंदुओं का नेतृत्व कौन करे। भाजपा का रवैया साफ है कि हिंदुत्व को ही अपना हथिार बनाएगी। कांग्रेस की ओर से भी जो जवाब आ रहे हैं उसकी ध्वनि गुजरात के ‘नरम हिंदुत्व’ वाली आवाज से मिलती-जुलती है। लेकिन कर्नाटक के सामाजिक बनावट के हिसाब से कांग्रेस के लिए यह मुश्किल होगा कि वह नरम हिंदुत्व के रास्ते पर अधिक दूर तक बढ़ सके। इसकी वजह है कर्नाटक में मुसलमानों की आबादी का 16 प्रतिशत होना। गुजरात में मुसलमानों की आबादी सिर्फ 9 प्रतिशत है।

भारत में शासन-प्रणाली में बदलाव की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट की ईमानदारी तथा विश्वसनीयता दांव पर
ज्ञान पाठक - 2018-01-15 12:01 UTC
भारत की शासन प्रणाली के तीन हिस्सों-कार्यपालिका, विधायिका तथा न्याययापालिका के ईमानदार तथा निष्पक्ष होने को लेकर आम तौर पर विश्वास है। विधायिका के सदस्यों, कार्यपालिका में बड़े ओहदे पर बैठे अधिकारियों तथा मंत्रियों और न्यायपालिका के जजों की अनियमिताओं और अन्याय के सामने पूरी तरह लाचार है। लोगों को अन्याय के खिलाफ सीमित उपचार था, और उनमें से कई पूरी तरह असहाय हैं, यह सच्चाई बाहर आ गई है और मुख्य न्यायाधीश के ठीक नीचे के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने इसे प्रेस के सामने स्वीकार किया है। उन्होंने यहां तक आारोप लगाया कि ‘न्यायालय के नियमों की अवहेलना कर मुकदमे पसंदीदा खंडपीठों को सौंपे जाते हैं।’ यह भारत में पहली बार हुआ है कि कार्यपालिका के ‘असली मुखिया‘ और ’न्यायपालिका के ’वास्तविक प्रधान’ दोनों के पर ’परंपराओं तथा मानदंडों’ के खिलाफ अपनी मनमर्जी से काम करने के आरोप हैं।