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राज्यसभा चुनाव में ‘आप’ भी ‘गुप्त रोग’ की शिकार!

केजरीवाल का जवाब नहीं
अनिल जैन - 2018-01-08 10:17 UTC
दिल्ली से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए इसी महीने होने वाले चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान करने के साथ ही न सिर्फ आम आदमी पार्टी एक बार फिर सवालों से घिर गई है, बल्कि यह सवाल भी फिर ताजा हो गया है कि संसद का यह उच्च सदन आखिर किन लोगों के लिए है और यह किसका प्रतिनिधित्व करता है?

अनर्गल बहस राष्ट्रहित में कदापि नहीं

इससे देश का नुकसान ही हो रहा है
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-01-06 09:15 UTC
आजादी से लेकर आजतक पाक का रवैया सदा से भारत के खिलाफ ही रहा है। वह आजतक एक अच्छा पड़ोसी नहीं बन सका, जबकि पाक से बेहतर संबंध बनाने की दिशा में हर संभव प्रयास भारत सरकार द्वारा बराबर किये जाते रहे । इस दिशा में वर्षो से बंद पड़ी सदभावना रेल सेवा को शुरू भी किया गया पर परिणाम जो मिला सभी के सामने है। पाक के इरादे सदा से ही नापाक रहे है। जिसकी वजह से सीमा पर सदा तनाव बने रहते है। कब सीमा पर तनाव बढ़ जाय, कुछ कहा नहीं जा सकता । इस तरह के परिवेश के पीछे पाक में पनाह ले रहे आतंकवादी गिरोह के साथ - साथ अंतर्रराष्टीªय स्तर पर हो रही भारत विरोधी गतिविधियां भी शामिल है जो किसी भी कीमत पर भारत को पनपने नहीं देना चाहती । इस तरह के हालात पाक भारत रिश्तें को कभी बेहतर नहीं बनने देंगे। पाक की बदलती सत्ता एवं सत्ता पर आतंकवादी गिरोह का अप्रत्यक्ष कब्जा पाक - भारत रिश्ते के मार्ग में रोड़ा है।

कोरेगांव की हिंसा और उसके बाद

झूठे इतिहास का डंक
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-01-05 10:26 UTC
नये साल की शुरुआत भारत के लिए शुभ नहीं कही जा सकती, क्योंकि पहले दिन ही देश में जातीय हिंसा शुरू देखी गई। यह हिंसा मराठों और दलितों के बीच हुई। कोरेगांव की वह घटना, जिसमें दलित शौर्य दिवस के उत्सव में हिस्सा लेने वालों पर मराठों ने हमले किए, कोई ऐसी घटना नहीं है, जो तात्कालिक रूप से घटित होकर विस्मृति की भेंट चढ़ जाय। दरअसल यह घटना किसी क्षणिक क्रिया की प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि यह मराठों के दिल में पिछले कुछ सालों से बन रहे गुबार का परिणाम था। वह गुबार उन्हें दलित विरोधी बना रहा है।

आजाद भारत में इस शौर्य दिवस का मतलब क्या ?

भीमा गाँव की हिंसा भारत को बाँटने की साजिश
प्रभुनाथ शुक्ल - 2018-01-04 10:14 UTC
हिंदुस्तान से अंग्रेज विदा हो गए , लेकिन फूट डालो और राज करो का बीज जो उन्होंने बोया था, वह आज विशाल वटवृक्ष बन गया, जिसकी वजह से हमारा समाज जाति , धर्म , भाषा , नस्लवाद और दलित, अगडे, पिछड़े , हिंदुत्व और इस्लाम में विभाजित है। बाकि बची रिक्तता को राजनीति और नेताओं की गंदी सोच पूरा कर दी है ।

रजनीकांतः एक और केजरीवाल?

कर पाएंगे तमिलनाडु में व्यवस्था परिर्वतन?
अमूल्य गांगुली - 2018-01-04 10:10 UTC
कुछ समय के लिए राजनीति में आने और जल्द बाहर निकल जाने के बाद अमिताभ बच्चन ने भारत की राजनीति को गंदे नाले की संज्ञा दी थी। जब से देश की राजनीति ऐसी हो गई है, गंदगी साफ करने की घोषणा करते झाड़ू लिए सजे-धजे शूरवीर का विचार लोगेंो को सम्मोहित करता है।

अनंत हेगड़े की बड़बड़ाहट

हेगड़े की बदजुबानी से मोदी सरकार को सबक
के रविंद्रन - 2018-01-03 12:54 UTC
केन्द्रीय कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्री अनंत कुमार हेगडे की एक अपील ने देश में हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने देश के मंत्री होने के नाते अपने को सेकुलर बताकर गौरवान्वित होने के बजाय जाति तथा धर्म की पहचान को गाढ़ा करने के इरादे से कह डाला कि ‘सेकुलर’ लोग बिना ‘‘मां-बाप’’ के हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि सेकुलर शब्द हटाने के लिए वह संविधान को भी बदल डालेंगे। ये और बात है कि हेगडे के व्यवहार से मंत्रिमंडलीय उनके सहयोगियों समेत सभी को झटका लगा और मंत्रियों ने उनके बयान से खुद और सरकार को अलग रखने में कोई देरी नहीं की।

क्या मुसलिम औरतों का मददगार हो पायेगा नया कानून

ज्ञान पाठक - 2018-01-03 12:50 UTC
मुसलिम महिला (अधिकार संरक्षण तथा विवाह) विधेयक, 2017 लाया तो मुसलिम महिलाओं की सुरक्षा के लिये गया था पर कहीं ऐसा न हो कि फायदे के बदले यह ज्यादा नुकसानदेह साबित हो जाये। जाहिर है इसके कानून बनने के बाद उठने वाले मुद्दों पर ठीक से सोचा नहीं गया।

क्या रजनीकांत की आध्यात्मिक राजनीति सफल होगी?

तमिलनाडु पर कब्जे के लिए सुपरस्टार को स्पष्ट नजरिए की जरूरत होगी
कल्याणी शंकर - 2018-01-03 12:45 UTC
सुपरहिट फिल्म कबाली में रजनीकांत का पंच लाइन था, ‘उन्हें कह दो कि मैं आ गया हूं’। पिछले रविवार को रजनीकांत ने उजला कु्र्ता और पैंट पहनकर अपने करोड़ों फैन को बताया कि राजनीति में मेरा प्रवेश निश्चित है। उनकी इस घोषणा के साथ ही उनके राजनीति में प्रवेश को लेकर पिछले दो दशकों से चल रहा कयास समाप्त हो गया है।

बैंक कर्मचारी एसोसिएशन विरोध करेंगे एफआरडीआई बिल का

जमाकर्ताओं के लिए खतरनाक है बिल
सी एच वेंकटचलम - 2018-01-02 10:06 UTC
सरकार ने एफआरडीआई बिल (फाइनांसियल रिजोल्यूशन एंड डिपोजिट इंश्योरेंस बिल) को संसद के पिछले सत्र में पेश किया था। फिलहाल इस पर संसदीय संयुक्त समिति विचार कर रहा है।

मयार्दाहीन होती चुनावी राजनीति

गुजरात चुनाव प्रचार का पोस्टमार्टम
अनिल सिन्हा - 2018-01-02 10:02 UTC
गुजरात चुनावों की चर्चा अब थम गई है। राजनीतिक दल और मीडिया अब इसे बीत गई घटना मान कर आगे बढ चुके हैं। उन्हें इन चुनावों से उठे गंभीर सवालों में भले ही कोई रूचि नहीं हों, वे भारी महत्व के हैं। भारत की मयार्दाहीन होती चुनावी राजनीति का चेहरा गुजरात ने फिर से सामने ला दिया है।