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घटता बजट और आकारहीन नीतियां

सर्वग्राही स्वास्थ्य सेवा अभी भी एक सपना है
अरुण मित्रा - 2018-02-06 10:11 UTC
स्वास्थ्य सभी की चिंता हैं। केवल स्वस्थ व्यक्ति ही सामाजिक विकास में योगदान कर सकता है। इस प्रकार देश को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है जहां हर नागरिक के स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता होती है। इसी संदर्भ में 1 फरवरी 2018 के स्वास्थ्य पर 52800 करोड़ रुपए की राशि के बजटीय प्रावधानों को देखा जाना चाहिए।

छोटे और मझोले उद्योगों की एक बार फिर अनदेखी

बेरोजगारी कैसे दूर होगी?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-02-03 08:24 UTC
मोदी सरकार के वर्तमान कार्यकाल का यह अंतिम पूर्ण बजट था और उम्मीद की जा रही थी कि देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई बेरोजगारी की समस्या पर इसमें सीधा सीधा हमला होगा। बेरोजगारी की समस्या का समाधान लधु और मध्यम उद्योगों द्वारा ही संभव है। इसलिए यह उम्मीद की जा रही थी कि सरकार इस सेक्टर को बढ़ावा देने पर अपना ध्यान केन्द्रित करेगी। लघु और मध्यम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए गुप्ता कमिटी की सिफारिशें केन्द्र सरकार के पास 2015 से पड़ी हुई हैं। उम्मीद यह भी की जा रही थी कि गुप्ता रिपोर्ट की सिफारिशों को ज्यादा से ज्यादा लागू करने की कोशिश इस बजट में की जाएगी।

जेटली का बजट: खोदा पहाड़ निकली चुहिया

डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-02-02 09:55 UTC
केन्द्र सरकार ने फरवरी माह में आम बजट पेश तो कर दिया पर बजट पूर्व जिस तरह की उम्मीदें की जा रही थी, वैसा कुछ भी नजर नहीं आया । वर्तमान वित्त मंत्री अरूण जेटली से जिस तरह की उम्मीद की जा रही थी, बजट वैसा ही है। उसमें किसी वर्ग को कोई खास लाभ नजर नहीं आ रहा है। मघ्यम वर्ग व नौकरी पेशा वालों को तो सबसे ज्यादा निराशा हुइ र्है। सातवें वेतन आयोग से बढ़े वेतन के बदले में राहत पाने की दिशा में आयकर सीमा एवं कर दायरे में छूट की उम्मीद लगाये बैठे रहे पर इस बजट में उन्हें निराशा ही हुई।

जेटली का केन्द्रीय बजट रस्म अदायगी तक सीमित

उपेन्द्र प्रसाद - 2018-02-01 10:37 UTC
इस बजट को आगामी लोकसभा चुनाव के पहले का पूर्ण बजट माना जा रहा था। जाहिर है, इसे चुनावी बजट भी हम कह सकते हैं। लेकिन क्या यह वास्तव में चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है? शायद चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया हो और सरकार आर्थिक नीतियों के मोर्चे पर जिस क्रूरता के लिए अब प्रसिद्ध हो गई है, उस क्रूरता से बचने की कोशिश की गई हो, लेकिन इस बजट से ऐसा कुछ भी नहीं लगता कि सरकार ने लोगों के दिलों अपना स्थान बनाने के लिए कोई प्रावधान किए हों।

मध्यप्रदेश में दो विधानसभाओं के उपचुनाव

कांग्रेस तैयारी के मामले में भाजपा पर भारी
एल एस हरदेनिया - 2018-01-31 08:26 UTC
भोपालः कोलारास और मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए मतदान की तारीखों की घोषणा के साथ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी सक्रिय हो गई हैं। सदस्यों की मौत के कारण ये उपचुनाव हो रहे हैं। दोनों सीटें कांग्रेस के पास थीं। मुंगावली का प्रतिनिधित्व ज्योतिरादित्य सिंधिया के वफादार महेंद्र सिंह कलुखेड़ा कर रहे थे। कांग्रेस तैयारियों के संदर्भ में भाजपा से आगे है और इसके उम्मीदवारों की घोषणा भी हो गई है। भाजपा के चयन में देरी राज्य और स्थानीय नेतृत्व के बीच मतभेदों के कारण हो रही है। स्थानीय निकाय चुनावों में जीत ने कांग्रेस को मजबूत किया गया है। भाजपा उम्मीदवार नौ अध्यक्ष की सीटों पर जीते थे। कांग्रेस को भी 9 पर ही जीत हासिल हुई थी, लेकिन कांग्रेस एक बागी ने 19वीं सीट जीती थी। इस तरह कांग्रेस का पलड़ा भारी हो गया। सबसे बड़ी बात यह कि कांग्रेस की सीटें बढ़ीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी की सीटे घट गई थीं।

क्या लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ साथ होंगे?

राष्ट्रपति के अभिभाषण में एक बार फिर जिक्र
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-01-30 13:11 UTC
सत्ता संभालने के बाद ही प्रधानमंत्री लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा के साथ साथ होने चाहिए। इस बार राष्ट्रपति के संसद मे दिए गए अभिभाषण में भी इसका जिक्र आया है। गौरतलब हो कि राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार के इरादों और आकलन की ही अभियक्ति होती है। सवाल उठता है कि क्या वास्तव में नरेन्द्र मोदी एक साथ चुनाव कराने के लिए गंभीर हैं?

भारत के लिए आसियान क्यों महत्वपूर्ण है?

दक्षिण पूर्व एशिया से प्र्र्रगाढ़ संबंध हमारे हित में है
निलंजन बनिक - 2018-01-29 09:49 UTC
जब कभी विश्व अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा करने की बात आती है, तो चीनी अजगर हमेशा भारतीय हाथी के खिलाफ हाथ जीत जाता है। विश्व व्यापार में भारत का हिस्सा 2011 से करीब 1.8 प्रतिशत पर है, जबकि चीन के लिए यह करीब 12 प्रतिशत है। 2020 तक चीन से आधा होने के लिए भी भारत का निर्यात आंकड़ा की सालाना वृद्धि दर 30 प्रतिशत से अधिक करने की जरूरत है। यह एक कठिन काम प्रतीत होता है, लेकिन भारत को आसियान में एक सच्चा दोस्त मिल गया है। हम उसकी दोस्ती का लाभ उठाकर असंभव को भी संभव कर सकते हैं।

दिल्ली के 20 विधानसभा क्षेत्र: चुनाव हुए तो भाजपा की दुर्गति दिखेगी

उपेन्द्र प्रसाद - 2018-01-27 11:06 UTC
नई दिल्लीः दिल्ली विधानसभा की 20 सीटें अभी खाली हैं, क्योंकि उनका प्रतिनिधित्व करने वाले आम आदमी पार्टी के विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। उन पर लाभ के पद पर आसीन होने का आरोप लगाया गया था। निर्वाचन आयोग ने उस आरोप को सही पाया और राष्ट्रपति ने आयोग की अनुशंसा के अनुरूप आदेश जारी कर उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी।

मध्य प्रदेश की महिलाएं शराब अहातों को बंद करने के खिलाफ

महिला शिक्षकों ने अपनी मांग मनवाने के लिए बाल घुटवाये
एल एस हरदेनिया - 2018-01-25 11:23 UTC
भोपालः मध्य प्रदेश में अजीब बातें हो रही हैं। महिलाओं को आम तौर पर शराब की दुकानें, बार और अन्य ऐसे आउटलेट के खिलाफ माना जाता हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में इसका उलटा हो रहा है। यहां महिलाएं शराब के अहातों को बंद करने के सरकार के निर्णय का विरोध कर रही हैं।

भारतीय गणतंत्र के 68 साल

लोकतंत्र की नींव में दरारें पड़ गई हैं
एल.एस. हरदेनिया - 2018-01-24 14:15 UTC
इस वर्ष 26 जनवरी को हमारे गणतंत्र की स्थापना हुए 68 वर्ष हो जाएंगे। सन् 1950 की 26 जनवरी को हमारे गणतंत्र के तीनों अंग अस्तित्व में आए गए थे। वैसे ये तीनों अंग ब्रिटिश शासन के दौरान भी किसी न किसी रूप में अस्तित्व में थे। ये तीनों अंग हैं विधायिका, न्यायपालिका एवं कार्यपालिका। इनमें विधायिका एवं न्यायपालिका अपने आप में पूर्ण स्वतंत्र हैं जबकि कार्यपालिका पर विधायिका का अप्रत्यक्ष नियंत्रण रहता है।