जनहित व राष्ट्रहित में अपराध मुक्त लोकतंत्र का होना जरूरी
- 2017-05-24 12:48 UTCस्वतंत्रता उपरान्त स्थापित लोकतंत्र में धीरे - धीरे अपराध जगत ने अपनी जगह बना ली जिससे लोकतंत्र का स्वरूप ही बदल गया । इस बदले स्वरुप ने लोकतंत्र की काया को ही विकृृत कर डाला, जिसके कारण आज संसद एवं विधान सभा की मर्यादाएं भंग होती नजर आने लगी है। जनप्रतिनिधियों द्वारा विरोध प्रदर्शन के तौर तरीके हुड़दंगबाजी के स्वरुप में बदल गये है। संसद एवं विधानसभा में गाली गलौज से लेकर जुते चप्पल चलाना, सामने लगे माईक से प्रहार करना आम बात हो गई है। सभा अध्यक्ष की गरिमा का तो कोई ख्याल ही नहीं। उसके बार - बार मना करने के बावजूद भी चीखना, चिल्लाना, अभद्र व्यवहार करना विरोध प्रकट करने के तेवर में समा चुका है। लोकतंत्र में बाहुबलियों के प्रभाव के कारण इस तरह के हालात उभर चले है। आज देश का कोई भी राजनैतिक दल इस तरह के परिवेश से परे नहीं है।