स्वास्थ्य को सार्वजनिक बहस का विषय बनाना चाहिए
स्वास्थ्य संगठन लोगों की राय बदलने में सहायक हो सकते हैं
-
2017-11-04 12:39 UTC
स्वास्थ्य सभी लोगों की चिंता का विषय है। उत्पादकता में एक स्वस्थ व्यक्ति ही योगदान कर सकता है। इसके कारण ही ‘स्वास्थ्य ही धन है’ वाली कहावत बनी है। पिछले कुछ सालों में जीवन शैली में बदलाव के कारण अनेक बीमारियां अस्तित्व में आ गई हैं। डेंगू, चिकनगुनिया, एचआईवी व अन्य अनेक प्रकार के वाइरल बुखार लोगों को होने लगे हैं। पहले से ही उपस्थित बीमारियों के अलावा ये नई बीमारियां हमारे गंभीर विवेचन के विषय होने चाहिएं। चूंकि हमारे देश के स्वास्थ्य का जिम्मा मुख्य रूप से अब निजी क्षेत्र के पास है, इसलिए लोगों की चिंता अब कई गुना बढ़ गई है। एक बीमार व्यक्ति अपनी आमदनी खो देता है। वह बीमारी के दौरान दवाइयों और स्वास्थ्यवदर््धक भोजन पर आश्रित हो जाता है। उसे अपनी बीमारी के इलाज का भी खर्च उठाना पड़ता है। एक स्वस्थ व्यक्ति से ज्यादा उसे खर्च करना पड़ता है, जबकि उसकी आमदनी या तो समाप्त हो जाती है या कम हो जाती है।