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उत्तर प्रदेश के मतदान का निर्णायक दौर

समाजवादी पार्टी के गढ़ को जीतने की भाजपा की कोशिश
प्रदीप कपूर - 2017-02-25 11:41 UTC
लखनऊः अंतिम तीन चरण में 142 विधानसीटों के लिए मतदान होना अभी बाकी है और इन सीटों में ज्यादा से ज्यादा पर विजय हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी- कांग्रेस गठबंधन, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने अपनी सारी ताकत लगा रखी है।

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव

क्या समाप्ति की ओर बढ़ रही है कांग्रेस?
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-02-24 10:34 UTC
महाराष्ट्र के नगर निगमों के चुनाव के नतीजे इसलिए चैंकाने वाले हैं, क्योंकि नोटबंदी से संबंधित सारे मिथ के ध्वस्त हो जाने के बाद इसके लिए मतदान हुए थे। जो भी मोदी सरकार ने नोटबंदी से संबंधित दावे किए थे, वे सारे के सारे गलत साबित हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि परेशानियां कुछ दिनों तक ही होगी, लेकिन वे बहुत लंबी खिंच गई। विपक्षी पार्टियों ने नोटबंदी के मसले पर केन्द्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी को लगातार घेरा। लेकिन इससे भारतीय जनता पार्टी को कोई चुनावी नुकसान महाराष्ट्र के इन नगर निगम चुनावों में नहीं हुआ। उसे सभी पार्टियों से ज्यादा सीटें मिलीं। 8 नगर निगमों पर तो उसका कब्जा हो गया है और सबसे प्रतिष्ठित बृहन्मुंबई महानगर पालिका के चुनाव में भी उसने शानदार जीत दर्ज की। उसने अकेले अपने बूते ही 82 सीटें हासिल कर लीं और शिवसेना के सामने इस पर काबिज होने के रास्ते में बड़ी चुनौती पेश कर दी है।

अभिनेत्री अपहरण कांड: विजयन सरकार रक्षात्मक मुद्रा में

पी श्रीकुमारन - 2017-02-23 11:41 UTC
तिरुअनंतपुरमः मलयालम फिल्मों की एक मशहूर अभिनेत्री का अपहरण और कथित बलात्कार के मसले केरल सरकार को सांसत में डाल दिया है। उस घटना के पहले बीटेक के एक छात्र की मौत के कारण सरकार पहले से ही परेशान थी। अपराधियों के एक गिरोह ने उस अभिनेत्री का अपहरण किया था। कहा तो यह भी जा रहा है कि उसमें फिल्मी दुनिया के लोगों का ही हाथ है।

मोदी को अकेले करना है चुनौतियों का सामना

2017 के चुनाव 2019 के चुनाव का लिटमस टेस्ट
अमूल्य गांगुली - 2017-02-22 13:00 UTC
जब नरेन्द्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी और अन्य नेताओं को सक्रिय राजनीति से बाहर कर दिया था, तो उन्हें अस बात के लिए बहुत सकूल मिला होगा कि पार्टी पर उनका पूर्ण नियंत्रण हो गया है। लेकिन उनको इस बात का अंदाजा नहीं लगा होगा कि उन्होंने अपने ऊपर कितना भार ले लिया है। हो रहे विधानसभा चुनावों के दौरान उन्हें अब इस बात का आभास हो गया होगा कि उन्होंने अपने सिर पर कुछ ज्यादा ही बोझ उठा रखा है।

हमारे प्रधानमंत्री की भाषा

राजनीतिक विमर्श के पतन का नया कीर्तिमान
अनिल जैन - 2017-02-21 11:54 UTC
बात 1962 के चीनी हमले के बाद की है। चीन ने भारत पर हमला कर एक बडे भू-भाग पर कब्जा कर लिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू चीन की तरफ से मिले इस धोखे से बुरी तरह आहत थे। संसद में चीनी हमले को लेकर बहस हो रही थी। नेफा पर चीन के कब्जे को लेकर नेहरू ने कह दिया कि वह तो बंजर इलाका है, वहां घास का एक तिनका तक नहीं उगता। उनके इस कथन पर उन्हें टोकते हुए विपक्ष के दिग्गज सांसद महावीर त्यागी ने जवाबी सवाल दागा, ’पंडित जी, आपके सिर पर भी एक बाल नहीं उगता तो क्या उसे भी चीन को भेंट कर देंगे?’ शायद नेहरू को भी तत्काल अहसास हो गया था कि उन्होंने कमजोर और गलत दलील पेश कर दी है, लिहाजा उन्होंने अपने मूल स्वभाव के मुताबिक कुतर्क के उस सिलसिले को आगे बढाए बगैर अपना भाषण पूरा किया। सदन में न तो नेहरू के कथन पर और न ही महावीर त्यागी के जवाबी कथन पर कोई हंगामा या नारेबाजी हुई।

प्रधानमंत्री का सांप्रदायिक राग

बिहार जैसी घबराहट दिखा रही है भाजपा
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-02-20 13:35 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एकाएक रमजान और दिवाली की चर्चा करना यह जाहिर करता है कि उत्तर प्रदेश के पहले दो चरण के मतदान से भाजपा उसी तरह घबरा गई है, जिस तरह वह बिहार में पहले दो चरण के मतदान के बाद घबरा गई थी।

तीसरे दौर का चुनाव अखिलेश के लिए निर्णायक

भाजपा मुस्लिम वोटों के विभाजन पर निर्भर
प्रदीप कपूर - 2017-02-18 16:27 UTC
लखनऊः पहले दो दौर के मतदान में समाजवादी पार्टी- कांग्रेस गठबंधन अपने दोनों प्रतिद्वंद्वियों से आगे चलता दिखाई दे रहा है। दूसरे दौर में भारी मतदान हुआ है। इससे स्पष्ट है कि विधानसभा के त्रिशंकु बनने के कोई आसार नहीं है।

जुमलों और नारों के नीचे दब गए बुनियादी मसले

पहल तो नागरिक समुदाय को ही करनी होगी
अनिल जैन - 2017-02-17 12:32 UTC
पांच में से तीन राज्यों पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जा चुके हैं, जबकि उत्तर प्रदेश और मणिपुर में अभी चुनाव प्रक्रिया जारी है। जैसा कि हर चुनाव के समय होता है, इस बार भी चुनाव में भाग ले रहे प्रमुख दलों ने तरह-तरह के आकर्षक वायदों से युक्त अपने-अपने घोषणा पत्र जारी किए हैं। इन घोषणा पत्रों में सूबे के बुनियादी मसलों का भी जिक्र है और लोगों को मुफ्त लैपटाप, मुफ्त स्मार्ट फोन, मुफ्त प्रेशर कूकर, 25 रुपए किलों देशी घी और सस्ती दरों पर बिजली-पानी देने जैसे वायदे भी हैं। लेकिन इन घोषणा पत्रों का जारी होना महज रस्म अदायगी बन कर रह गया है। कोई भी दल और उसके स्टार प्रचारक अपने चुनाव प्रचार अभियान में घोषणा पत्र में शामिल बुनियादी मुद्दों का जिक्र नहीं कर रहा है।

मायावती के लिए ’करो या मरो’ की लड़ाई

क्या दलित-मुस्लिम समीकरण काम कर पाएगा?
अमूल्य गांगुली - 2017-02-16 13:27 UTC
उत्तर प्रदेश चुनाव मायावती के लिए अपने अन्य सारे प्रतिस्पर्धियों से ज्यादा मायने रखता है। विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार हारना उनके भविष्य के लिए बहुत ही घातक हो सकता है। वैसे ही पिछले लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को एक भी सीट हासिल नहीं हो सकी थी।

अब मोदी की नजर 2019 के चुनाव पर

पूरे हो रहे हैं हजार दिन
कल्याणी शंकर - 2017-02-15 11:56 UTC
19 फरवरी को मोदी सरकार अपना 1000 दिन पूरा कर लेगी। इसलिए यह समय उसके लिए सिर्फ पीछे देखने का नहीं है, बल्कि आगे देखने का भी है। 1000 दिन की उसकी उपलब्धियां क्या हैं? क्या वह बहुत अको के साथ सफल रही है, जैसा की वह दावा कर रही है या वह पूरी तरह विफल हो गई है, जैसा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष कह रहा है?