मोदी ने बदलाव के लिए योजना की जरूरत स्वीकारी
नीति आयोग को 15 साल का दृष्टिपत्र तैयार करने को कहा गया है
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2016-08-02 17:32 UTC
आखिरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके वरिष्ठ सहयोगियों ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि न तो विकास और न ही रोजगार सृजन के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले इन दोनों पर बढ़चढ़कर बातें की जा रही थी। सबका विकास करना भारतीय जनता पार्टी का एक प्रमुख चुनावी नारा था और उसके लिए सबका साथ मांगा जा रहा था। अच्छे दिन की लाने की बात की जा रही थी और उसके लिए बेरोजगारों को रोजगार देने के वायदे किए गए थे। लेकिन अभी जिस तरह के बदलाव हो रहे हैं, उन्हें देखते हुए कहा जा सकता है कि मोदी ने जितनी उम्मीदें पैदा कर दी थीं, उन्हें वे पूरा नहीं कर सकते।