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केरल कांग्रेस (मणि) दो फाड़

कांग्रेस नेतृत्व वाले मोर्चे को झटका
पी श्रीकुमारन - 2016-03-05 11:42 UTC
तिरुअनंतपुरमः कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के लिए अभी खराब समय चल रहा है। कानूनी मोर्चे पर यूडीएफ को दो बड़े झटके लगे और अब उसको एक करारा राजनैतिक झटका भी लगा है।

भाजपा और बीजद के बीच सौदा

ओडिसा के मुख्यमंत्री की भूमिका निर्णायक
अशोक बी शर्मा - 2016-03-04 11:24 UTC
स्मार्ट सीटी की सूची में भुवनेश्वर सबसे ऊपर है और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने रेलमंत्री सुरेश प्रभु की पहली बार प्रशंसा की है और कहा है कि उनके प्रदेश ओडिसा के प्रति बहुत ही उदार हैं। इन सबसे कांग्रेस को लग रहा है कि भारतीय जनता पार्टी और नवीन पटनायक के बीजू जनता दल के बीच कोई न कोई सौदेबाजी हुई है। नवीन पटनायक एक पोंजी और खनिज घोटाले में फंसे हुए हैं और उन घोटालों की जांच सीबीआई कर रही है। वे चाहते हैं कि सीबीआई के काम में सुस्ती आ जाए।

उत्तर प्रदेश में दलित वोटों के लिए मारामारी

चुनावों में इनकी भूमिका निर्णायक
प्रदीप कपूर - 2016-03-03 10:45 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में दलित वोटों के लिए राजनैतिक पार्टियों के बीच घमासान मच गया है। प्रदेश में अनुसूचित जातियों की आबादी कुल आबादी की 20 फीसदी से भी ज्यादा है। चुनावी नतीजे प्रभावित करने मंे उनकी भूमिका सबसे ज्यादा होती है। यही कारण है कि सभी पार्टियां उनके मतों के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा में कर रही हैं।

भारत में राजनैतिक पतन का दौर

भाजपा और उसके सहयोगी साबित हो रहे हैं अक्षम
बी के चम - 2016-03-02 11:58 UTC
चंडीगढ़ः भारत का राजनैतिक पतन तेजी से हो रहा है। 2015 में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण हो रहा था, जिसके कारण देश की एकता और अखंडता को खतरा पैदा हो गया था। और अब जातिगत ध्रुवीकरण का दौर शुरू हो गया है। इससे देश के सामाजिक ताने बाने को खतरा पैदा हो गया है। इन घटनाओं के पीछे संघ परिवार के लोगों का हाथ है। वे अखंड भारत की बात करते हुए भारत को खंडित करने की कोशिश कर रहे हैं।

मोदी सरकार का तीसरा बजट: मध्यवर्ग के लिए कोई राहत नहीं

उपेन्द्र प्रसाद - 2016-03-01 11:34 UTC
अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए इस तीसरे बजट को मोदी सरकार का पहला असली बजट माना जा रहा था। उम्मीद थी यह बजट कठोर होगा, क्योंकि लोकप्रिय बजट तब पेश किया जाता है, जब सरकारी पार्टियों को चुनाव का सामना करना पड़ता है। चूंकि चुनाव 2019 में है, इसलिए 2016 और 2017 मे पेश किए गए बजट को कठोर बनाने में सरकारी पार्टियों को कोई नुकसान होता दिखाई नहीं पड़ता है।

लवलीन केस की विलंबित सुनवाई

पी विजयन और सीपीएम के खेमे में खुशी
पी श्रीकुमारन - 2016-02-29 11:44 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल की सीपीएम ईकाई के लिए लवलीन मामले की अंतिम सुनवाई को हाई कोर्ट द्वारा दो महीने तक टालने की घटना एक वरदान के रूप में आई है। इस मामले से सीपीएम के नेता पी विजयन का नाम जुड़ा हुआ है, इसलिए पी विजयन के लिए तो यह बहुत ही राहत का सबब लेकर आया है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में जलसंकट

सामाजिक सेक्टर में कटौती से प्रदेश को झटका
एल एस हरदेनिया - 2016-02-27 10:25 UTC
भोपालः विधानसभा का सत्र 23 फरवरी से शुरु हुआ। इस बात को लेकर शंका व्यक्त की जा रही है कि क्या इस सत्र में कुछ काम भी हो पाएगा या यह भी बेकार जाएगा।

हरियाणा का जाट आंदोलन

मुख्यमंत्री खट्टर ने कर दी भारी गड़बड़ी
कल्याणी शंकर - 2016-02-26 12:37 UTC
हरियाणा के जाट आंदोलन ने न केवल एक प्रदेश को, बल्कि दिल्ली तक को हिला दिया। आरक्षण से आसपास के प्रदेश भी प्रभावित हुए। उसमें हजारों करोड़ रुपयों की सरकारी और गैरसरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ और कम से कम 19 लोग उसमें मारे भी गए।

यूडीएफ में सीट बंटवारे को लेकर संकट

केरल कांग्रेस (मणि) विभाजन की ओर
पी श्रीकुमारन - 2016-02-25 12:39 UTC
तिरुअनंतपुरमः बाहर से से सबकुछ ठीक दिख रहा है, लेकिन अंदर से यूडीएफ के घटक दलों में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने के लिए जंग छिडी हुई है।

मोदी सरकार द्वारा नागरिक अधिकारों पर हमला जारी

अघोषित आपातकाल की स्थिति बन गई है
बी के चम - 2016-02-24 12:19 UTC
जो डर था, वह सही साबित हो रहा है। मोदी सरकार के तहत भारत में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। शायद उससे भी बदतर स्थिति का सामना कर रहे हैं हम। काली बर्दी में गुंडे छात्र पर हमला कर रहे हैं। वे छात्रों से सहानुभूति रखने वाले लोगों पर भी हमल कर रहे हैं और पत्रकारों पर भी। वे महिला पत्रकारों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। और यह सब अदालत के प्रांगन में पुलिस की उपस्थिति में हो रहा है। दिल्ली पुलिस गेस्टापो में तब्दील हो चुकी है। गेस्टापो हिटलर की निजी सेना थी। कुछ राज्यों की पुलिस भी वैसी ही बन गई है। उन राज्यों में पंजाब भी शामिल है, जहां भारतीय जनता पार्टी शिरोमणि अकाली दल के साथ सत्ता में है। हमारे नेताओं को लेखक सलमान रुश्दी का वह कथन याद करना चाहिए, जिसमें उन्होंने पूछा है कि अभिव्यक्ति की आजादी आखिर है क्या? जवाब देते हुए वे खुद कहते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी किसी को नाराज कर देने की आजादी है। यदि व्यक्ति से नाराज करने की आजादी छीन ली जाय, तो फिर अभिव्यक्ति की आजादी रह ही नहीं जाती है।