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भारत

ओबीसी आंकड़े बनेंगे बिहार में चुनावी मुद्दा

भाजपा का दिल्ली वाला हश्र हो सकता है वहां
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-07-16 16:54 UTC
बिहार में लालू यादव ने जाति के आंकड़े को एक बड़ा मुद्दा बनाने में सफलता पा ली है। नीतीश कुमार इस मसले पर शुरू में स्पष्ट नहीं थे, लेकिन अब उन्होंने भी इस आंकड़ों को सार्वजनिक करने को एक चुनावी मुद्दे के रूप में देखना शुरू कर दिया है। जिस रोज दिल्ली में नीति आयोग की बैठक हो रही थी, उस दिन उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जाति के आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग कर दी है। यदि इसे सार्वजनिक नहीं किया गया, तो चुनावों मंे इसे एक बड़ा मुद्दा बनने से कोई रोक नहीं सकता।

भारत में औद्योगिक उत्पादन को बड़ा बढ़ावा मिले

घरेलू मांग बढ़ाकर विकास दर बढ़ाया जा सकता है
के आर सुधामन - 2015-07-15 15:35 UTC
केन्द्र सरकार का ’’मेक इन इंडिया‘‘ अभियान भले ही जोर नहीं पकड़ पा रहा हो, लेकिन इसने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसका प्रमाण अर्थव्यवस्था की विकास दर में देखी जा रही वृद्धि है। केन्द्र सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद विकास की वृद्धि को मापने का तरीका बदल दिया है और कुछ लोग इसके कारण जारी की जा रही विकास दरों के आंकड़ों पर सवाल खड़े कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहतर हो रही है और इसके कारण भविष्य में और भी तेज विकास की उम्मीद की जा सकती है। इस साल विकास की दर का अनुमान साढ़े सात फीसदी लगाया जा रहा है, लेकिन यदि यह दर 8 फीसदी तक पहुंच जाय, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
भारत

विकास की राजनीति: अदानी के मसले पर असमंजस में सरकार

पी श्रीकुमारन - 2015-07-14 15:36 UTC
तिरुअनंतपुरमः विझिंजम बंदरगाह का मामला केरल सरकार के गले की हड्डी बन गया है। उसे निर्णय करने में समस्या हो रही है कि अदानी को वह बंदरगाह अवार्ड किया जाना सही है या नहीं।
भारत

कांग्रेस ने किया मध्यप्रदेश बंद का आह्वान

मुख्यमंत्री सहित संघ नेताओं पर निशाना
एल एस हरदेनिया - 2015-07-13 15:31 UTC
भोपालः सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्यापम घोटाले की जांच सीबीआई जांच के आदेश देने से कांग्रेस और खासकर इसके नेता दिग्विजय सिंह का मनोबल बढ़ा है। इससे दोनों की प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। कांग्रेस और खासकर इसके नेता दिग्विजय सिंह इसकी सीबीआई जांच की मांग लगातार कर रहे थे। उन्होंने इसके लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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बिहार विधानपरिषद के चुनाव नतीजे

क्यों भारी पड़ गई भाजपा?
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-07-11 15:29 UTC
बिहार विधान परिषद की 24 सीटों में लिए हुए मतदान में भारतीय जनता पार्टी के 11, उससे समर्थित लोकजनशक्ति पार्टी के एक और उससे समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई है। जबकि जद(यू) के 5, उसके सहयोगी राजद के 4 और कांग्रेस के एक उम्मीदवार जीते हैं। इस तरह भाजपा गठबंधन 13 सीटों पर जीत हासिल कर नीतीश गठबंधन पर भारी पड़ गया है। जीत का अंतर कोई बहुत बड़ा नहीं है। पटना क्षेत्र से विजयी निर्दलीय उम्मीदवार रीतलाल यादव को राजद का समर्थन हासिल था। हालांकि वहां नीतीश के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे, पर फिर भी रीतलाल यादव को नीतीश-लालू खेमे में गिन लें तो मामला 13 और 11 का ही रह जाता है।
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भाजपा से दो दो हाथ करने को कांग्रेस तैयार

भगवा कैप के अंदरूनी संघर्ष से पैदा हो रहा है संकट
कल्याणी शंकर - 2015-07-10 16:32 UTC
कांग्रेस पार्टी में अभी उत्साह का माहौल है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मात खाने के बाद पहली बार उसे लग रहा है कि वह अपनी खोई हुई जमीन फिर से वापस पा सकती है। भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी सरकार ने इसके लिए उसे अच्छा अवसर भी प्रदान कर दिया है। आज भ्रष्टाचार के मामले एक के बाद एक सामने आ रहे हैं पहले सुषमा स्वराज का भ्रष्टाचार सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ललित मोदी का गैरवाजिब साथ दिया। फिर ललित मोदी और वसुंधरा के संबंधों का खुलासा हुआ। महाराष्ट्र सरकार के भ्रष्टाचार के कुछ मामले भी मीडिया की सुर्खियों में आए और उसके बाद तो मध्यप्रदेश का व्यापम घोटाला राष्ट्रीय मीडिया में छाने लगा और अब यह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। भाजपा की छत्तीसगढ़ की सरकार पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे।
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लालू के वंशवाद को चुनौती

राजद सुप्रीमो की राजनीति का त्रासद अंत
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-07-10 16:28 UTC
कबीर दास का एक दोहा है, ’’ आये हैं सो जाएंगे, राजा रंक फकीर। एक सिंहासन चढ़ चले, एक बंधे जंजीर ’’। कबीर ने यह दोहा 5 सौ साल से भी पहले लिखा था, लेकिन इसमे एक सनातन सत्य छिपा है और वह आज लालू यादव पर सही साबित हो रहा है। पिछले दिनों वे बिहार के वैशाली जिले के महुआ विधानसभा क्षेत्र में विधानपरिषद के लिए हो रहे चुनाव के लिए लोगों को संबोधित करने के लिए एक मंच पर थे। मंच पर उनका बड़ा बेटा भी था। उसने वहां से आगामी विधानसभा के लिए अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी और उसके बाद वहां का जो नजारा था, वह दंग कर देने वाला था। एकाएक लालू और उनके वंशवाद के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। नारेबाजी उनके दल के विरोधी लोग नहीं कर रहे थे, बल्कि उनके अपने लोग ही कर रहे थे। उनके दल क्या उनकी अपनी जाति के लोग, जिन्हें लालू अपना राजनैतिक जनाधार कहते हैं, के लोग ही लालू यादव मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे।
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चौहान पर इस्तीफा के लिए दबाव बढ़ा

व्यापम मौतों ने भाजपा नेतृत्व को किया विभाजित
एल एस हरदेनिया - 2015-07-08 15:27 UTC
भोपालः क्या शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के पद से हट रहे हैं? स्थानीय अखबारों में छप रही खबरें इसी तरह का संदेश जारी कर रही हैं। जो अखबार मुख्यमंत्री की चापलूसी करने के लिए कुख्यात हैं, वे भी कुछ इसी तरह की खबरें छाप रहे हैं। दैनिक भाष्कर ने अपने पहले पेज पर एक संपादकीय लिखा है। पहले पेज पर संपादकीय असामान्य परिस्थितियों में ही लिखा जाता है।
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भाजपा नेतृत्व असुरक्षा बोध से पीड़ित

कांग्रेस कर रही है उबरने की कोशिश
अमूल्य गांगुली - 2015-07-07 14:42 UTC
भारतीय जनता पार्टी कितना असुरक्षित महसूस कर रही है, इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि उसके प्रवक्ता सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे सिंधिया के बचाव में पागलपन की हद तक जाकर एक के बाद एक मूर्खतापूर्ण तर्क देते जा रहे हैं।
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व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच जरूरी

यदि निर्दोष हैं, तो चौहान को डर क्यों?
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-07-06 16:19 UTC
मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) में हुए घोटाले की जांच जारी है और इस बीच उस घोटालों से जुड़े लोगों की मौत का सिलसिला भी जारी है। कभी इस घोटाले का आरोपी की मौत होती है, तो कभी किसी गवाह की मौत हो जाती है और कभी इसकी जांच में शामिल किसी शख्स की मौत हो जाती है। इन सबके बीच इस घोटाले से जुड़ी एक मौत की पड़ताल करने पहुंचे एक पत्रकार की भी मौत हो गई। ये सारी मौत में एक और चीज काॅमन है और वह यह है कि ये सारी की सारी अप्राकृतिक अकाल मौतें हैं। इनमें से कुछ को आत्महत्या का नाम दिया जा सकता है, तो कुछ को हम साजिशन हत्या की वारदात भी कह सकते हैं। अनेक कथित आत्महत्याओं से भी साजिश की बू आती है।