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अनिश्चितता का साल होगा 2014

राजनैतिक चक्र तेजी से चलेगा
कल्याणी शंकर - 2014-01-03 12:17 UTC
साल 2014 एक अनिश्चितताओं का साल होगा। इनकी घटनाओं के बारे में अभी से दावे से कुछ भी नहीं कहा जा सकता। सच तो यह है कि इसके बारे में अनुमान लगाना भी खतरे से खाली नहीं है। इसका कारण यह है कि राजनैतिक और आर्थिक मोर्चे पर आज अभूतपूर्व अनिश्चय बना हुआ है और उसके साथ विदेश नीति और विदेशों से हमारे संबंधों पर भी अनिश्चय के बादल मंडरा रहे हैं।

आप क्या तीसरा विकल्प बन सकती है?

हिंदी प्रदेशों में इसकी जमीन तैयार है
उपेन्द्र प्रसाद - 2014-01-02 10:43 UTC
दिल्ली में अपनी सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता आगामी लोकसभा चुनाव मे ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार खड़ा करने की बातें कर रहे हैं। दिल्ली देश की राजधानी है और यहां घटी इस एक अभूतपूर्व घटना का असर देश भर में पड़ना स्वाभाविक है। यही कारण है कि देश भर में, खासतौर से हिंदी प्रदेशों मे आम आदमी पार्टी को लेकर खासा उत्साह बन गया है और इसमें शामिल होने के लिए भारी संख्या में लोग आॅनलाइन पंजीकरण कराने मे लगे हुए हैं।

अखिलेश पर भारी दबाव, पर मुख्यमंत्री विवश हैं

प्रदीप कपूर - 2014-01-01 12:14 UTC
लखनऊः अरविंद केजरीवाल के दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भारी दबाव में हैं। उन पर इस बात को लेकर भारी दबाव है के लोकसभा चुनाव के पहले कुछ कर दिखाएं।

कांग्रेस का गंदा खेल जारी

नहीं सुधरने की खा रखी है इस पार्टी ने कसम
नन्तू बनर्जी - 2013-12-31 10:26 UTC
पिछले विधानसभा चुनावों में हिंदी के चार प्रदेशों मे कांग्रेस का सूफड़ा साफ हो गया। दिल्ली, राजस्थान और मध्यप्रदेश में इसे भारी पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद समझा जा रहा था कि कांग्रेस कुछ सीखेगी और अपने आपमें कुछ ऐसा सुधार करेगी, ताकि यह अपने भविष्य को सुरक्षित रख सके। पर हार के बाद उसने जो रवैया अपनाया है, उससे साफ लगता है कि उसने कसम खा रखी है कि वह न तो कुछ सीखेगी और न ही सुधरेगे।

देश की राजनीति में केजरीवाल का उदय

मोहभंग के माहौल में एक नये मोह का केन्द्र
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-12-30 12:30 UTC
अरविंद केजरीवाल दिल्ली का मुख्यमंत्री बन चुके हैं और देश की राजनीति में वे क्या गुल खिलाएंगे, इसके बारे में तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। स्थापित नेताओं में अघिकांश ऐसे हैं, जो समझते हैं कि आम आदमी पार्टी का उदय जितनी तेजी से हुआ है, उसका अस्त भी उतनी ही शीघ्रता से होगा। पर वैसे लोग गलत भी हो सकते हैं।

क्या केजरीवाल लोगों की उम्मीदों को पूरा कर पाएंगे?

कल्याणी शंकर - 2013-12-27 12:43 UTC
दो दशक पहले जब वीपी सिंह की सरकार केन्द्र की सत्ता में आई थी, तो मेरी उस समय के वित्त मंत्री मधु दंडवते जी से एक दिलचस्प बातचीत हुई थी। वित्तमंत्री तब किसानों के 10 हजार करोड़ रुपये के लोन को माफ करने के लिए बजटीय गुना भाग करने में लगे हुए थे। उनके लिए वह काम बहुत ही मुश्किल साबित हो रहा था। अब चूंकि उनकी पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में कहा गया था कि उनकी पार्टी सत्ता में आने के बाद किसानों के लोन को माफ कर देगी, तो वैसा करना उनकी मजबूरी भी थी।

कांग्रेस और भाजपा की चिंताएं बढ़ी

आप ने तीसरे मोर्चे की आस बढ़ा दी है
अशोक बी शर्मा - 2013-12-27 12:40 UTC
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सफलता ने देश भर में तीसरे मोर्चे की सफलता की उम्मीदें बढा दी है। यह पार्टी मात्र एक साल नई है और यह दिल्ली में सरकार बनाने जा रही है। उसे दिल्ली विधानसभा में 28 सीटें मिली, जबकि भाजपा को 31 सीटें और उसके सहयोगी अकाली दल को एक सीट मिली। कांग्रेस का तो सूफड़ा ही साफ हो गया, जिसे मात्र 8 सीटें ही मिल पाईं। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा में मात्र 70 सदस्य होते हैं।

दिल्ली में आप की सरकार

आग से खेल रही है कांग्रेस
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-12-24 11:12 UTC
हमारे देश में वह हो रहा है, जिसके बारे में कुछ दिन पहले सोचा तक नहीं जा सकता था। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में प्रमुख पार्टियां बहुमत जुटाकर सरकार बनाने के लिए एक से एक गंदा खेल खेला करती थीं। कोई विरोधी पार्टी सरकार न बना ले, इसके लिए भी मशक्कत की जाती थी। विधायकों की फौज को लेकर शहर शहर घूमा जाता था, ताकि विरोधी पार्टियों के प्रभाव से वे बचे रहें। लेकिन दिल्ली में विधानसभा चुनाव के बाद यहां की दो मुख्य पार्टियों ने नई गठित आम आदमी पार्टी को अल्पमत में होते हुए भी सरकार गठन को बाध्य कर दिया।

तमिलनाडु में इस बार होंगे दिलचस्प मुकाबले

जयललिता भी चाहती हैं प्रधानमंत्री बनना
एस सेतुरमन - 2013-12-23 12:29 UTC
पिछले कई दशकों के बाद कांग्रेस आज एक ऐसी स्थिति में आ खड़ी हुई है कि उसे अगला चुनाव तमिलनाडु में अकेले ही लड़ना होगा। इसके पहले तमिलनाडु में सत्ता खोने के बाद वह कभी डीएमके और कभी एआइएडीएमके के साथ चुनाव लड़ती रही है। इसके पहले के दो लोकसभा चुनाव उसने डीएमके के साथ मिलकर लड़े थे और इसका अच्छा फायदा भी उसे मिला था। 2004 और 2009 के चुनाव में केन्द्र में सरकार बनाने के पीछे तमिलनाडु की उसकी और उसके गठबंधन की सफलता भी एक मुख्य कारण थी। तमिलनाडु और पुदुचेरी में कुल मिलाकर 40 सीटें हैं और कांग्रेस को अब इन सीटों पर अपने दम ही चुनाव लड़ना होगा।

मुख्यमंत्री चांडी के घर की घेरेबंदी पर मतभेद

क्रुद्ध आम औरत ने पार्टियों को सबक सिखाई
पी श्रीकुमारन - 2013-12-21 13:30 UTC
मुख्यमंत्री ओमन चांडी के घर की घेरेबंदी को लेकर विपक्षी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के घटकों में मतभेद पैदा हो गये हैं। सीपीआई और आरएसपी के नेताओं को इस तरह के आंदोलन से परहेज है।
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