Skip to main content

View Articles

तेलंगना का संकट

राज्य पुनर्गठन की एक सुसंगत नीति पर विचार हो
अवधेश कुमार - 2011-07-15 08:56 UTC
आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। एक पृथक राज्य की मांग के पक्ष को सशक्त करने के लिए तेलंगना क्षेत्र के इतने विधायकों और सांसदों का इस्तीफा निश्चित रूप से अकल्पनीय घटना है। तेलंगना क्षेत्र के 119 विधायकों एवं विधान पार्षदों में ज्यादातर का इस्तीफा हो चुका है। इनमें कांग्रेस के साथ तेलुगू देशम एवं प्रजाराज्यम यानी सभी दलों के प्रतिनिधि हैं। इस इस्तीफे के पीछे की सोच बताने की आवश्यकता नहीं है। आंध्रप्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं मंत्री के. जनार्दन रेड्डी ने कहा कि उनका इस्तीफा कांग्रेस हाई कमान एवं केन्द्र को केवल तेलंगना क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं से अवगत कराने के लिए है। कांग्रेस पार्टी चाहे इस पर जो भी बयान दे, पर यह एक गंभीर राजनीतिक एवं संवैघानिक संकट का आगाज है।

स्पेक्ट्रम लूट की आंच अब कांग्रेसी मंत्रियों पर

उनके खिलाफ जांच कब होगी?
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-07-15 08:51 UTC
संचार मंत्रालय के 2 जी घोटाले के आरोप में दयानिधि मारन को भी अपने पद से हटना पड़ा। शायद अगले कुछ दिनों में वे भी ए राजा और कणिमाझी की तरह दिल्ली के तिहाड़ जेल में दिखाई पड़ें। लेकिन डीएमके के इन नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करके 2 जी घोटाले के दोषियों को सजा दिलवाने की कार्रवाई पूरी नही होती। सरकारी खजाने को करीब 2 लाख करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने वाले इस घोटाले में सिर्फ डीएमके के ये नेता ही शामिल नहीं रहे हैं। जनता पार्टी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी बहुत पहले से कह रहे हैं कि गृहमंत्री पी चिदंबरम भी इसमें शामिल रहे हैं। श्री स्वामी तो पी चिदंबरम को ही 2 जी घोटाले का मुख्य अभियुक्त तक मानते हैं। अब भाजपा नेता संसद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी भी कह रहे हैं कि पी चिदंबरम 2 जी घाटाले में शामिल रहे हैं और उन्हें भी मंत्रिमंडल से हटाकर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

राहुल का उत्तर प्रदेश अभियान

दिनों दिन मजबूत हो रही है कांग्रेस
प्रदीप कपूर - 2011-07-15 08:47 UTC
लखनऊः कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के अभियान के कारण दिनोंदिन कांग्रेस की स्थिति उत्तर प्रदेश में बेहतर होती जा रही है। श्री गांधी ने ताजा अभियान पिछले मई महीने में भट्टा पारसौल से शुरू किया था, जिसका उद्देश्य 2012 में अपने बूते पर प्रदेश में पार्टी की सरकार बनानी है। गौरतलब है कि भट्टा पारसौल में मई में 4 लोग मारे गए थे। उस समय किसान अपनी जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ वहां आंदोलन कर रहे थे।

आंध्र प्रदेश राष्ट्रपति शासन की ओर

कांग्रेस को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी
कल्याणी शंकर - 2011-07-15 08:41 UTC
आंध्र प्रदेश राष्ट्रपति शासन की ओर जाता दिखाई पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति में राज्य के लिए यही बेहतर विकल्प दिखाई पड़ रहा है। अगले 6 महीने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन के दौरान मामले को २शांत होने का मौका मिल जाएगा और इस बीच केन्द्र सरकार के पास भी मामले को सुलझाने के लिए सोच विचार का समय मिल जाएगा। मुख्यमंत्री किरण रेड्डी फिलहाल कुछ कर नहीं पा रहे हैं। बात बात में वे केन्द्र सरकार की ओर देख रहे हैं।

बंगाल के स्वास्थ्य प्रशासन में सुधार

ममता बनर्जी के सामने एक बड़ी चुनौती
आशीष बिश्वास - 2011-07-15 08:38 UTC
कोलकाताः सत्ता में आने के तुरंत बाद किसी राजनेता की क्षमता अथवा उपलब्ध्यिो के बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए भी यह सच है। उनके सत्ता में आए अभी 6 सप्ताह ही हुए हैं। इसलिए उनकी प्रशासनिक कुशलता के बारे मे कुछ कहना अभी उचित नहीं होगा।

तेलंगाना के मसले पर फंसी कांग्रेस

केन्द्र स्थितियों को और भी जटिल कर देता है
अमूल्य गांगुली - 2011-07-06 06:07 UTC
कांग्रेस आज यदि तेलंगाना और लोकपाल के मसले पर मुश्किल में फंसी हुई है, तो इसका कारण्स यही है कि यह राजनैतिक मसलों का हल नौकरशाही तरीके से करने की कोशिश करने लगती है। राजनैतिक मसलों को राजनैतिक तरीके से कैसे निबटा जाय, इसकी कला सरकार और कांग्रेस में बैठे लोग नहीं समझते हैं। यही कारण है कि इन दोनों मसलों पर केन्द्र सरकार और कांग्रेस इस तरह से फंस गई हैं कि उन्हें इनसे बाहर निकलने का कोई रास्ता नही दिखाई पड़ रहा है।

केरल में सरकार और विपक्ष टकराव की ओर

छात्रों पर हुए लाठीचार्ज से माहौल तनावपूर्ण
पी श्रीकुमारन - 2011-07-05 04:30 UTC
तिरुअनंपुरमः नई सरकार गटन के कुछ महीने बाद ही केरल में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनने लगी है। चुनाव के बाद आमतौर पर विपक्ष कुछ समय के लिए विश्राम की मुद्रा में चला जाता है और वह राज्य सरकार के अलोकप्रिय होने का थोड़ा इंतजार करता है, पर केरल में सरकार बनने के साथ ही विपक्ष टकराव की मुद्रा में आ गया है और सरकार ने भी उसे अपने खिलाफ आंदोलनरत होने के लिए मौका दे दिया है।

लोकपाल पर सर्वदलीय बैठक

क्या टकराव की ओर बढ़ रहा है राजनैतिक वर्ग?
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-07-04 05:16 UTC
लोकपाल के मसले पर प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक अनेक मामलों ेमें निराशाजनक रही। इस बैठक के अंत में एक मजबूत लोकपाल के निर्माण का संकल्प लिया गया, लेकिन यह संकल्प कितना सच्चा और कितना झूठा है, इसका पता तो बैठक में नेताओं के दिए गए भाषणों से लगता है। और यदि नेताओं के भाषण से कोई संकेत निकलता है, तो वह यही है कि वे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी मजबूत तंत्र के निर्माण को संभव नहीं होने देने के लिए संकल्पबद्ध हैं।

रामदेव की नई हुंकार

सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी करनी ही होगी
अवधेश कुमार - 2011-07-02 06:58 UTC
स्वामी रामदेव ने फिर से हुंकार भर दिया है। निश्चय ही 21 दिनों बाद राजधानी दिल्ली मंे उनके वक्तव्य एवं तेवर देखकर उनके समर्थकों में फिर से आत्मविश्वास वापस आना आरंभ हुआ होगा। 4- 5 जून की रात्रि में हुई पुलिस कार्रवाई का उच्चतम न्यायालय द्वारा लिए गए संज्ञान के बाद सरकार के पास भी उनको स्वतंत्र छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था। पुलिस की कार्रवाई तथा 15 दिनों के लिए दिल्ली प्रवेश पर प्रतिबंध को ध्यान में रखें तो उन्हंे किसी प्रकार बाधित न करने का पुलिस का रवैया समर्थकों को राहत पहुंचाने वाला था। उन्होंने जिस आक्रामक अंदाज में सरकार पर हमला किया एवं अपना संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया उसकी आवश्यकता उनके समर्थक महसूस कर रहे थे। पूरा देश इस बीच उठ रहे प्रश्नों, लगाए जा रहे आरोपों के उत्तर के साथ यह भी जानना चाहता था कि वे अब आगे क्या करने वाले हैं। यह मानने मंे कोई हर्ज नहीं है कि उन्होंने सारे प्रश्नों का बड़ी बेवाकी से जवाब दिया तथा अपनी भावी कार्ययोजना भी रखी।

बढ़ती महंगाई के लिए सरकार पर चौतरफा हमला

तेल कीमतों के निर्धारण को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए
कल्याणी शंकर - 2011-07-02 06:53 UTC
केन्द्र सरकार ने एक बार फिर डीजल, रसोई गैस और किरासन तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है। इसका असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा। लोग पहले से ही भयानक महंगाई का सामना कर रहे हैं और जरूरी वस्तुओं की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं। डीजल की कीमत में की गई वृदिध महंगाई को और भी बढ़ा देगी, क्योंकि इसका इस्तेमाल माल की ढुलाई करने वाली गाड़ियों में होता है। डीजल की कीमत में हुई वृद्धि का पूरा असर सितंबर महीने तक देखने को मिलेगा। खाने की वस्तुओं की कीमतें 15 फीसदी तक बढ़ जाने की आशंका है। क्रिसिल द्वारा किए गए एक आकलन के अनुसार पिछले तीन सालों में महंगाई के कारण देश के उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति में 5 दशमलव 8 लाख करोड़ रुपए की कमी आई है।