नरेंद्र मोदी के बड़े पैमाने पर प्रचारित मेक इन इंडिया की पोल खुली
केंद्र सरकार की 23 अरब डॉलर की पीएलआई योजना धरी रह गयी
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2025-03-28 10:44 UTC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुमलों के सुपर सेल्समैन के रूप में जाने जाते हैं। जनधन खाते से लेकर हर साल युवाओं के लिए दो करोड़ नौकरियां पैदा करने तक, 2014 से भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के सभी प्रचार-प्रसार एक बड़ी विफलता साबित हुए हैं। पिछले कुछ सालों में भी भाजपा की चुनावी मशीनरी या आधिकारिक एजंसियों ने प्रधानमंत्री के इन दो वायदों का कभी जिक्र नहीं किया। लेकिन उनका सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम मेक इन इंडिया था, जिसकी घोषणा केंद्र में उनके कार्यभार संभालने के तुरंत बाद की गयी थी। 23 अरब अमेरिकी डॉलर की उत्पादकता से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, जो 2021 में एमआईआई कार्यक्रम का प्रमुख कार्यक्रम है, के बारे में मोदी ने घोषणा की थी कि मेक इन इंडिया कार्यक्रम के कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप 2025 में देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक होने के साथ भारत दुनिया का उत्पादन केंद्र बन जायेगा। अब 2025 आ गया है, लेकिन सरकार ने बिना किसी आधिकारिक घोषणा के चुपके से मेक इन इंडिया के लिए बनायी गयी 23 अरब डॉलर की पीएलआई योजना को समाप्त कर दिया है।