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अनंतकुमार ने मंत्रियों का मजाक उड़ाया

मुख्यमंत्री को मुत्रिमंडल में फेरबदल की खुली छूट
एल एस हरदेनिया - 2010-09-16 13:29 UTC
भोपालः भारतीय जनता पार्टी के महासचिव और मध्यप्रदेश के पार्टी प्रभारी ने उस समय फिर एक नया विवाद खड़ा कर दिया, जब उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रियों को अपने मंत्रिमंडल से शराबी और अय्याश मंत्रियों का निकाल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में अनेक मंत्री ऐसे हैं जो जमकर पीते हैं और देर सुबह तक सोए रहते हैं। उनके पास पार्टी कार्यकर्त्ताओं व आमलोगों से मिलने का समय नहीं है। ऐसे लोगों को मंत्रिमंडल से निकाल दिया जाना चाहिए और उनकी जगह गंभीर लोगों को मंत्रिपरिषद में जगह दी जानी चाहिए।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर संशय बरकरार

क्या केरल सरकार के सामने झुकेगा टेकॉम
पी श्रीकुमारन - 2010-09-14 13:24 UTC
तिरुअनंतपुरमः क्या स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट हकीकत बन पाएगा? अथवा यह लाल फीताशाही का शिकार हो जाएगा? इन सवालों का जवाब इसी 15 सितंबर को मिल जाएगा।

जाति जनगणना हकीकत बनी

इससे जाति अंततः कमजोर ही होगी
उपेन्द्र प्रसाद - 2010-09-13 13:21 UTC
आखिरकार केन्द्र सरकार ने जाति जनगणना का फैसला कर ही लिया। इस तरह की जनगणना के लिए देश भर में राजनैतिक सहमति बन गई थी, लेकिन केन्द्र सरकार खुद असमंजस की शिकार बनी हुई थी। शुरू शुरू में जब शरद यादव, लालू यादव और मुलायम सिंह यादव ने इसकी मांग जोरदार तरीके से की और उन्हें भाजपा के गोपीनाथ मुंडे और बसपा के दारा सिंह सहित तमाम गैर कांग्रेसी पार्टियों का इस मसले पर समर्थन मिला, तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने जाति जनगणना पर अपनी सहमति दे डाली।

मनमोहन के मजबूत संकेत

अब सरकार में उन्हीं की चलेगी
कल्याणी शंकर - 2010-09-10 13:17 UTC
संपादकों के सम्मेलन में जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार किया, तो अनेक लोगों की भौहें तन गईं। आखिर इसका मतलब क्या है? उनके खिलाफ विपक्ष ही नहीं बल्कि मीडिया की ओर से खासी आलोचनाएं हो रही हैं। कांग्रेस के अंदर से भी उनकी सरकार के खिलाफ आलोचना के स्वर उठ रहे हैं। क्या यह माना जाए कि इन आलोचनाओं के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सब्र का बांध टूट चुका है।

असम की राजनीति में नया मोड़

प्रफुल्ल मोहंता की असम गण परिषद में वापसी
बरुण दास गुप्ता - 2010-09-09 13:12 UTC
कोलकाताः प्रफुल्ल कुमार मोहंता की असम गण परिषद (अगप) में वापसी राज्य की एक महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना है, जिसका असर राज्य की राजनीति पर पड़ेगा। श्री मोहंता राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और अगप के गठन में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्हें पार्टी ने 2005 में पार्टी से निकाल दिया था। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप भी लगाया गया था।

बंद से मणिपुर की अर्थव्यवस्था घ्वस्त

केन्द्र बना हुआ है मूक दर्शक
बरुण दास गुप्ता - 2010-09-08 12:53 UTC
कोलकाताः किसी देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ की अनुमति जरूरी है, लेकिन किसी भारत के किसी राज्य में इसी तरह का प्रतिबंध लगाने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं पड़ती। मुट्ठी भर लोग जब चाहें ऐसा कर सकते हैं।

मायावती के सामने मजबूत विपक्षी चुनौती

कानून व्यवस्था मुख्सय मुद्दा
प्रदीप कपूर - 2010-09-07 12:48 UTC
लखनऊः जैसे जैसे 2012 का विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है मुख्यमंत्री मायावती के सामने विपक्षी चुनौतियां भी मजबूत होती जा रही हैं। उन्हें सरकार के स्तर पर ही नहीं, बल्कि अपने संगठन के स्तर पर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा को जबर्दस्त सफलता मिली थी, लेकिन आज बसपा सुप्रीमो अपने आपको राजनैतिक रूप से पूरी तरह अलग थलग पा रही हैं। राज्य की सभी पार्टियों से उनका संवाद टूटा हुआ है।

बिहार में राहुल गांधी

क्या कांग्रेस की कायापलट हो पाएगी?
उपेन्द्र प्रसाद - 2010-09-06 12:45 UTC
राहुल गांधी ने बिहार का चुनावी अभियान शुरू कर दिया है। अभियान के पहले दौर में उनकी सभाओं में जुटी भीड़ की संख्या के लिहाज से कहा जा सकता है कि कांग्रेस में अब लोगों की दिलचस्पी फिर से बढ़ने लगी है। पर सवाल उठता है कि क्या उनकी सभा में उमड़ी भीड़ कांग्रेसी वोटों की शक्ल ले सकेगी?

खाद्य सुरक्षा विधेयक पर संशय

राष्ट्रीय सलाहकार समिति और सरकार में मतभेद
कल्याणी शंकर - 2010-09-04 12:40 UTC
प्रस्तावित खाद्य सूरक्षा विधेयक पर सहमति बनती नहीं दिखाई पड़ रही है। यूपीए के पिछले कार्यकाल में सोनिया गांधी की नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद नरेगा और सूचना के अधिकार जैसे दो महत्वपूर्ण कानून को बनाने में सफल हो गई थी, लेकिन दूसरे कार्यकाल में खाद्य सुरक्षा कानून से संबंधित विधेयक को संसद से पारित करवाना उसके लिए कठिन साबित हो रहा है। इसका कारण यह है कि इस विधेयक के कुछ बिन्दुओं पर केन्द्र सरकार और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के बीच मतभेद है।

आईयूएमएल की उग्रवाद विरोधी बैठक क्या छलावा थी?

बाद में कुछ नहीं होना लीग की मंशा पर सवाल खड़ा करता है
पी श्रीकुमारन - 2010-09-03 12:36 UTC
तिरुअनंतपुरमः पिछले महीने इंडियन नेशनल मुस्लिम लीग ने मल्लपुरम जिले के कोटाक्कल शहर में उग्रवाद के खिलाफ एक बैठक आयोजित की थी। उस बैठक मेें बहुत ही लंबी लंबी बातें कही गई थीं और बहुत कुड करने का दंभ भरा गया था, लेकिन बैठक के बाद कुछ हुआ नहीं। इसलिए अब सवाल किया जा रहा है कि क्या लीग द्वारा आयोजित की गई वह बैठक महज एक दिखावा थी?