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केरल शिखर सम्मेलन के समापन के बाद भी प्रस्तावों में कोई कमी नहीं

एलडीएफ सरकार ने परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया
पी. श्रीकुमारन - 2025-02-26 10:30 UTC
तिरुवनंतपुरम: ‘इन्वेस्ट केरल ग्लोबल समिट’ की सफलता इस बात से स्पष्ट है कि दो दिवसीय सम्मेलन के समाप्त होने के बाद भी प्रस्ताव आना जारी है।

तीस्ता नदी परियोजना पर बांग्लादेश ने भारत के विरुद्ध चीन से मदद मांगी

ट्रंप के दिल्ली का पक्ष लेने के बाद यूनुस शासन बीजिंग मान रहा अपना रक्षक
आशीष विश्वास - 2025-02-25 11:40 UTC
यह कोई रहस्य नहीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अंतरिम बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार डॉ. मोहम्मद यूनुस के बीच कोई खास रिश्ता नहीं है। कुछ हद तक विरोधाभासी रूप से, दोनों में एक असामान्य विशेषता है - यदि आवश्यक हो तो मौजूदा राजनयिक मानदंडों और परंपराओं को रौंदने का उनका दृढ़ संकल्प, क्योंकि वे कम से कम समय में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहते हैं।

क्या यूएसएआईडी ने अन्ना हजारे आंदोलन को धन दिया जिसके कारण यूपीए सरकार गिरी?

मौजूदा विवाद के बीच सच्चाई का पता लगाने के लिए गहन जांच की आवश्यकता
गिरीश लिंगन्ना - 2025-02-24 10:55 UTC
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह दावा करके नई दिल्ली में खलबली मचा दी है कि भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (यूएसएआईडी) ने वोटर टर्नआऊट के लिए 21 मिलियन डॉलर की अमेरिकी सहायता दी थी। प्रकारान्तर से कहा गया कि उस धन का इस्तेमाल भारत के पिछले लोकसभा चुनाव 2024 को प्रभावित करने के लिए किया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने देश की राजनीति में विदेशी हस्तक्षेप के आरोप लगाये हैं।

दिल्ली में भाजपा सरकार के सामने हैं अनेक मुश्किल काम

बहुत से वायदे जिन्हें पूरा करना कठिन, और मजबूत विपक्ष का सामना भी
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-02-22 11:02 UTC
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में अब भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में है, जिसके सामने अनेक चुनौतियां हैं। चुनाव अभियान के दौरान भाजपा ने बहुत से चुनावी वायदे दे रखे हैं जिन्हें पूरा करना एक बहुत ही कठिन कार्य है, और विपक्ष बहुत ही सतर्क और मजबूत है। यह बात मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार, जिसने 20 फरवरी को आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाला, के पहले कैबिनेट फैसले और उसपर विपक्षी आप नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी की प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट हो गयी।

फडणवीस शिंदे के बीच बढ़ती दरार से महायुति की स्थिरता पर सवाल

शिवसेना के एक धड़े को आशंका - भाजपा कर देगी उसका जनाधार खत्म
सुशील कुट्टी - 2025-02-21 10:57 UTC
किसी को यह समझने में मुश्किल नहीं होनी चाहिए कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके द्वारा विस्थापित पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच दरार बढ़ती जा रही है। फडणवीस अभी महाराष्ट्र के वर्तमान उपमुख्यमंत्री भी हैं और वह मुख्यमंत्रियों के खिलाफ जाने के लिए हमेशा तैयार ही रहते हैं जैसा कि उन्होंने उद्धव बालासाहेब ठाकरे जैसे नेता के मुख्यमंत्रित्व काल में किया था। क्या यह एक बेतुकी बात होगी, जो मूल मुद्दे से भटकती है, कि मुंबई शहर में सब कुछ ठीक नहीं है, जहां जल्द ही निकाय चुनाव होने वाले हैं? मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अपनी कमर कस लेनी चाहिए। मीडिया ऐसा दिखा रहा है जैसे शिंदे खलनायक हैं और फडणवीस एक चमकता हुआ योद्धा। शिंदे को "हमारे बीच 'ठंडा ठंडा, कूल कूल' रिश्ता है" जैसे बेतुके बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जैसे कि यह कोला का विज्ञापन हो!

चुनाव आयोग के साथ विपक्ष के समीकरणों में तनाव बोया गया

दोनों पक्ष जनता का विश्वास जीतने के लिए विवेकपूर्ण तरीके से काम करें
के रवींद्रन - 2025-02-20 10:40 UTC
नये मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति के इर्द-गिर्द विवादास्पद परिस्थितियों ने कांग्रेस पार्टी और चुनाव आयोग के बीच अविश्वास की भावना को जन्म दिया है। इससे मुश्किल और तनावपूर्ण संबंधों वाली परिस्थिति बन गयी है। तनाव पहले से भी था जो तब और बढ़ गया जब राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति व्यक्त की, जिससे इस अविश्वास को संस्थागत रूप मिला। हालांकि उन्होंने नियुक्त व्यक्ति पर सीधे व्यक्तिगत हमले करने से परहेज किया, लेकिन चयन प्रक्रिया के बारे में उनकी चिंताओं ने एक अपरिहार्य दरार पैदा कर दी है। एक प्रमुख राजनीतिक दल और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार एक संस्था के बीच ऐसा सम्बंध लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनता के विश्वास को कमजोर करने का खतरा पेश करता है।

डोनाल्ड ट्रम्प के नाटो से दूरी बनाने के बाद यूरोप की परीक्षा की घड़ी

यूरोपीय राष्ट्रों की अमेरिका के बिना सुरक्षा गारंटी की संरचना पर अलग-अलग राय
नित्य चक्रवर्ती - 2025-02-19 10:56 UTC
1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के अस्सी साल बाद, यूरोप, विशेष रूप से पश्चिमी यूरोप अव्यवस्थित सा हो गया है, क्योंकि आठ दशकों से उनका ट्रान्साटलांटिक सहयोगी, संयुक्त राज्य अमेरिका, नये ट्रम्प सिद्धांत के तहत नाटो से संबंधित यूरोपीय देशों की सुरक्षा की गारंटी देने से इनकार कर रहा है। इससे पहले भी अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद थे, लेकिन उनका महाद्वीप की भू-राजनीति पर इतना व्यापक प्रभाव कभी नहीं पड़ा, जितना 2025 में पड़ रहा है।

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में सरकारी हिस्सेदारी कम करने का लक्ष्य हो तेज विकास

केवल बजट घाटे के वित्तपोषण के लिए विनिवेश करना एक गलत नीति
नन्तू बनर्जी - 2025-02-18 10:50 UTC
भारत के राज्य-नियंत्रित उद्यमों में सरकार द्वारा विनिवेश हमेशा स्वागत योग्य है, यदि इसका उद्देश्य उन्हें तेज़ विकास के लिए पेशेवर रूप से प्रबंधित इकाई बनाना है। दुर्भाग्य से, सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में बेतरतीब ढंग से किये गये विनिवेश का केवल एक ही उद्देश्य प्रतीत होता है - वार्षिक केंद्रीय बजट घाटे के एक हिस्से का वित्तपोषण करना। यह प्रथा पिछले कई वर्षों से चल रही है।

क्या बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भारत के प्रति अपना रुख नरम करेगी?

यूनुस सरकार दबाव में, दिल्ली को ढाका से निपटने में अमेरिका का समर्थन
नित्य चक्रवर्ती - 2025-02-17 11:30 UTC
व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के नतीजे का असर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर पड़ सकता है, जिसका नेतृत्व डॉ. मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं, जो 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के हटने के तीन दिन बाद 8 अगस्त, 2024 से सत्ता में हैं।

डोनाल्ड ट्रंप जो चाहते थे वह सब नरेंद्र मोदी से हासिल किया

अमेरिका से हथियारों और तेल के निर्यात में भारी वृद्धि होगी
टी एन अशोक - 2025-02-15 11:06 UTC
वाशिंगटन: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस समय भू-राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है और कई देशों में नये नेता सत्ता संभाल रहे हैं। गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मोदी की निर्धारित बैठक से अमेरिका के लिए उनके व्यापार विस्तार के मामले में सकारात्मक परिणाम सामने आये, लेकिन भारत के लिए सटीक लाभ का आकलन अभी किया जाना बाकी है। हालांकि एक बात स्पष्ट है। ट्रंप आप्रवासियों पर अपनी नीति पर अड़े रहे और मोदी ने इस पर सहमति जतायी। भारतीय प्रधानमंत्री ने ट्रंप की प्रशंसा की, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाये जाने वाले भारी ‘पारस्परिक’ टैरिफ से बचने की कोशिश की। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की अपनी पहली यात्रा के लिए वस्तुतः व्हाइट हाउस लौटे, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल 2016 से 2020 के दौरान बनाये गये संबंधों को मजबूत किया जा सके और आपसी लाभ के लिए अपने सौहार्द को और आगे बढ़ाया जा सके।
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