भारत में अभी बयानबाजी की नहीं बल्कि राजनेतृत्व की जरूरत
प्रधानमंत्री का भाषण भी था मुख्य रूप से उनके चुनावी आधार पर केन्द्रित
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2025-05-15 10:34 UTC
युद्ध दुख और मौतें लेकर आता है। पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवाने ने पुणे में कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “युद्ध न तो रोमांटिक है और न ही कोई बॉलीवुड फिल्म।” उन्होंने कहा कि कूटनीति उनकी पहली पसंद होगी, “सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में सदमा है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, जिन्होंने गोलाबारी देखी है और जिन्हें रात में आश्रयों की ओर भागना पड़ता है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके लिए यह सदमा पीढ़ियों तक रहेगा।” उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों ने भयानक दृश्य देखे हैं, उनमें पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीडीएस) है, जो 20 साल बाद पसीने से तरबतर हो उठते हैं और उन्हें मनोचिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता होती है। युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए, कूटनीति को आगे बढ़ना चाहिए।