बहुदलीय व्यवस्था पर आधारित भारत की लोकतांत्रिक नींव खतरे में
सत्तारूढ़ भाजपा देश की राजनीति से विपक्ष को समाप्त करने पर आमादा
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2026-06-20 11:24 UTC
ब्रिटिश राजनेता सर एंथनी ईडन ने भारत की संविधान निर्माण प्रक्रिया को अभूतपूर्व पैमाने पर लोकतांत्रिक अभ्यास का एक “विशाल और अद्भुत प्रयास” माना था। उन्होंने इसे पश्चिमी मॉडल की मात्र नकल नहीं, बल्कि एक साहसिक लोकतांत्रिक प्रयोग के रूप में देखा, जिसका वैश्विक प्रभाव दूरगामी हो सकता था। उन्होंने कहा था कि भारतीय प्रयास “हमारे यहां की व्यवस्था की फीकी नकल नहीं, बल्कि उसका कहीं अधिक व्यापक और विस्तृत रूप है, जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी।” यह कहते हुए उन्होंने इतनी विविधताओं से भरी विशाल आबादी को एकजुट करने की चुनौती को भी स्वीकार किया और माना कि “यदि यह सफल होता है, तो एशिया पर इसका सकारात्मक प्रभाव असीमित होगा।” ईडन ने भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने वालों की मंशा के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया था।