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'खालिस्तानी' लोकसभा सांसद अमृतपाल सिंह को लेकर केंद्र असमंजस में

रियासी आतंकी हमला दर्शाता है अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण की सीमाएं
आशीष बिस्वास - 2024-06-12 10:56 UTC
सिख अलगाववादी अमृतपाल सिंह पंजाब के खडूर साहिब संसदीय क्षेत्र से विजयी होने से से केंद्र सरकार असमंजस में है। भारत सरकार इस बात पर अनिर्णीत है कि उनके साथ क्या किया जाना चाहिए। इस बात को लेकर अटकलें लगायी जा रही हैं कि क्या उन्हें असम के डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल से अंतरिम जमानत पर रिहा किया जायेगा, जहां उन्हें रखा गया है, या अन्य उपायों पर विचार किया जा रहा है।

मोदी के तीसरे कार्यकाल में गठबंधन राजनीति की लगाम

प्रधान मंत्री के गले पड़े अनिश्चित नायडू और अविश्वसनीय नीतीश
कल्याणी शंकर - 2024-06-11 10:55 UTC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन सरकार ने अभी-अभी कार्यभार संभाला है, और यह अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि यह कैसा प्रदर्शन करेगी, यहाँ तक कि यह अपना पाँच साल का कार्यकाल पूरा करेगी भी या नहीं। यह सर्वविदित है कि भारत में बहुदलीय सरकारों का इतिहास गड़बड़ा गया है। दिवंगत भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने भी 1998 से 2004 तक 24 दलों के गठबंधन को चलाया था। गठबंधन सरकारों के साथ भारत का अनुभव कुछ हद तक उथल-पुथल भरा रहा है।

नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक समय

बाइडेन की युद्ध विराम योजना से हमास और इज़रायल दोनों पर दबाव
जेम्स एम डोर्सी - 2024-06-10 10:32 UTC
आने वाले एक या दो सप्ताह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भाग्य का निर्धारण कर सकते हैं और इज़रायल के गाजा युद्ध के लिए बाइडेन प्रशासन के समर्थन को नया आकार दे सकते हैं। यानी, अगर नेतन्याहू युद्ध कैबिनेट के सदस्य बेनी गैंट्ज़ की इस मांग को पूरा करने में विफल रहते हैं कि प्रधानमंत्री युद्ध के बाद के प्रशासन के लिए एक योजना तैयार करें, तो उनके साथ युद्ध कैबिनेट के सदस्य और इज़राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ़ गैबी ईसेनकोट भी शामिल हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भी जारी रहेगा बेरोजगारी संकट

गुणवत्तापूर्ण रोजगार देने के लिए रोजगारहीन विकास मॉडल में बदलाव की जरूरत
डॉ. ज्ञान पाठक - 2024-06-08 11:49 UTC
2014 के बाद से जारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले दो कार्यकालों में अभूतपूर्व बेरोजगारी संकट उनके तीसरे कार्यकाल में भी जारी रहने की संभावना है, जब तक कि वर्तमान रोजगारहीन विकास मॉडल में बदलाव नहीं किया जाता। लगभग एक अरब कामकाजी आयु वर्ग की आबादी में से, पिछले कुछ वर्षों से रोजगार में लगे लोगों की संख्या लगभग 40 करोड़ के आसपास रही है, जो चिंता का विषय है।

तीन महाद्वीपों में तीन राष्ट्रीय चुनावों ने दिये जीवंत लोकतंत्र के संकेत

दक्षिण अफ्रीका, मैक्सिको और भारत की जनता ने दिये अहम फैसले
नित्य चक्रवर्ती - 2024-06-07 11:50 UTC
इस सप्ताह तीन दिनों की अवधि में, तीन बड़े आबादी वाले देशों - दक्षिण अफ्रीका, मैक्सिको और भारत के राष्ट्रीय चुनावों के परिणाम मिले और तीनों ने प्रत्येक देश में जीवंत लोकतंत्र की विजयी यात्रा के संकेत दिये। परिणामों ने दिखाया कि कैसे सतर्क मतदाताओं ने भारत की बहुसंख्यक हिंदू दक्षिणपंथी पार्टी भाजपा को अल्पमत में लाकर दंडित किया, अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के बहुमत को 40 प्रतिशत तक कम कर दिया और आम लोगों की आजीविका में सुधार के लिए उत्कृष्ट कार्य करने के लिए अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को शानदार जीत देकर मैक्सिको के वामपंथी मोरेना गठबंधन को पुरस्कृत किया।

नवीन पटनायक एक टूटते हुए सितारे की तरह राजनीति पटल से हुए ओझल

भाजपा ने ओडिशा को बीजेडी से छीनकर जबरदस्त सफलता हासिल की
सुशील कुट्टी - 2024-06-06 12:37 UTC
केवल एक भावुक रोमांटिक व्यक्ति ही ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बारे में इस समय सोच सकता है, जो बीजेडी प्रमुख के जीवन के सबसे बुरे दिन हैं। नवीन पटनायक इतिहास बन चुके हैं और उन्हें सामान्य सार्वजनिक जीवन से भुला दिया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा में बीजू जनता दल के सुचारू रूप से चलने वाले शासन को एक शानदार प्रदर्शन के साथ रोक दिया, जिसका भगवा पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरण नहीं कर सकी। एक तरह से कहें तो, अगर नवीन पटनायक हार गये हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रीय स्तर पर कोई कमाल नहीं किया।

लोकसभा चुनावों में एनडीए जीता, लेकिन नरेंद्र मोदी नेतृत्व हारा

लोकतंत्र रहा सबसे बड़ा विजेता, क्षेत्रीय दलों ने अपना दबदबा बनाया
नित्य चक्रवर्ती - 2024-06-05 10:31 UTC
2024 के लोकसभा चुनावों में लोकतंत्र सबसे बड़ा विजेता है, क्योंकि 4 जून को घोषित परिणाम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राजनीतिक विचारों में विविधता को रेखांकित करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के एकमात्र चेहरे जिनके नाम पर चुनाव लड़ा गया, को इस साल 19 अप्रैल से 1 जून तक सात चरणों में हुए 18वें लोकसभा चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले 64.2 करोड़ मतदाताओं से सबसे बड़ी हार मिली है।

अरुणाचल में बड़ी जीत के साथ भाजपा ने पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ मजबूत की

कांग्रेस ने अपनी रणनीतिक गलतियों से इस क्षेत्र को भाजपा को सौंप दिया
डॉ. ज्ञान पाठक - 2024-06-04 12:51 UTC
राज्य की 60 विधानसभा सीटों में से 46 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने रणनीतिक राजनीतिक गढ़ अरुणाचल प्रदेश को और मजबूत कर लिया है। सीटों के मामले में यह 2019 के विधानसभा चुनाव में जीती गयी सीटों से 5 अधिक है। वोट शेयर के मामले में, इसने 54.57 प्रतिशत वोट हासिल किये, जो इस अवधि के दौरान 3.71 प्रतिशत की वृद्धि है। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए चौंकाने वाला है, क्योंकि यह एकमात्र प्रमुख पार्टी थी जो सीटों की संख्या और वोटों के हिस्से दोनों में हार गयी, विशेष रूप से राज्य में और सामान्य रूप से उत्तर पूर्व में उनके द्वारा की गयी रणनीतिक गलतियों के कारण, जो इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे उसने पिछले दस वर्षों में राजनीतिक रूप से इस क्षेत्र को भाजपा के हवाले कर दिया है।

2023-24 के लिए जीडीपी 8.2 प्रतिशत भावी वृद्धि के लिए एक स्थिर आधार

नयी सरकार को अधिक निवेश और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करना होगा
अंजन रॉय - 2024-06-03 11:37 UTC
सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के लिए जीडीपी के नये आंकड़े का इससे बेहतर समय और क्या हो सता है। संसदीय मतदान के अंतिम चरण के समाप्त होने के साथ ही, 2023-24 के लिए जीडीपी के 8.2 प्रतिशत के आंकड़े आये जो भारतीय अर्थव्यवस्था की भारी वृद्धि दर को दर्शाते हैं। यदि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए चुनावों में जीतती है, जो सबसे संभावित घटना है, तो वित्तीय बाजार में उछाल की भविष्यवाणी की जा सकती है।

चाबहार बंदरगाह भारत, ईरान और अफ़गानिस्तान के लिए एक रणनीतिक जरूरत

भारत और ईरान ने हाल के महीनों में तालिबान के साथ संबंधों को फिर से जोड़ा
गिरीश लिंगन्ना - 2024-06-01 11:51 UTC
भारत आज ईरान में लंबे समय से लंबित चाबहार बंदरगाह परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रहा है। 13 मई को, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) और ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन ने 10 साल के समझौते पर हस्ताक्षर किये। यह सौदा भारत को चाबहार बंदरगाह को विकसित करने और संचालित करने की अनुमति देता है।