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लेनिन को उनकी 150वीं जयंती पर याद करना

समाजवाद के लिए लड़ाई अब और जरूरी हो गई है
प्रकाश करात - 2020-04-22 10:01
22 अप्रैल, 2020, बीसवीं सदी की सबसे बड़ी क्रांतिकारी शख्सियत, व्लादिमीर इलिच लेनिन की 150 वीं जयंती है। मार्क्स और एंगेल्स के बाद लेनिन ने मार्क्सवाद के सिद्धांत और व्यवहार में सबसे बड़ा योगदान दिया। लेनिन की जबरदस्त सैद्धांतिक विचारों, जैसे कि साम्राज्यवाद के उनके विश्लेषण, ने अक्टूबर 1917 में रूस में दुनिया की पहली समाजवादी क्रांति के लिए मंच तैयार किया। लेनिन ने एक क्रांतिकारी रणनीति बनाई जिसमें औद्योगिक सर्वहारा और उपनिवेशों और उत्पीड़ित देशों के लोगों को शामिल किया गया। इस रणनीति का एक अन्य पहलू श्रमिक-किसान एकता की अवधारणा थी। क्रांतिकारी अभ्यास के क्षेत्र में, लेनिन ने एक क्रांतिकारी पार्टी संगठन की भूमिका का नेतृत्व श्रमिक वर्ग के मोहरा के रूप में किया।

दिल के अधिसंख्य मरीजों का इलाज बिना ऑपरेशन के संभवः डॉ सीबिया

विशेष संवाददाता - 2019-10-23 12:43
नई दिल्लीः भारत में दिल के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है यही कारण है कि दिल की बीमारी की वजह से होने वाली मौतों की संख्या हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा है। हाल ही के आंकडों से पता चला हैं कि हर पांच में से एक व्यक्ति दिल की बीमारी का शिकार है और भविष्य में इस आंकड़ों के और अधिक होने की सम्भावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।

गांधी जी हर क्षेत्र के लिए आज भी प्रासंगिक

धर्मनिरपेक्षता पर हमले को हम गांधी के द्वारा ही रोक सकते हैं
एल एस हरदेनिया - 2019-09-30 11:07
यह सवाल बार-बार पूछा जा रहा है कि आज के समय में गांधीजी और उनके विचारों की प्रासंगिकता क्या है? वैसे तो समाज का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें आज भी गांधी की प्रासंगिकता नहीं है। परंतु आज हमारे देश में गांधीजी की सर्वाधिक प्रासंगिकता उनके धर्मनिरपेक्षता संबंधी विचारों के कारण है।
श्रमिक दिवस (1 मई) पर विशेष

आखिर किसके लिए मनाया जाता है श्रमिक दिवस?

योगेश कुमार गोयल - 2019-04-29 11:14
प्रतिवर्ष 1 मई का दिन ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ अथवा ‘मजदूर दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसे ‘मई दिवस’ भी कहा जाता है। मई दिवस समाज के उस वर्ग के नाम किया गया है, जिसके कंधों पर सही मायनों में विश्व की उन्नति का दारोमदार है। इसमें कोई दो राय नहीं कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति एवं राष्ट्रीय हितों की पूर्ति का प्रमुख भार इसी वर्ग के कंधों पर होता है। यह मजदूर वर्ग ही है, जो अपनी हाड़-तोड़ मेहनत के बलबूते पर राष्ट्र के प्रगति चक्र को तेजी से घुमाता है लेकिन कर्म को ही पूजा समझने वाला श्रमिक वर्ग श्रम कल्याण सुविधाओं के लिए आज भी तरस रहा है।

आखिर क्या है यह नवरात्र?

मां दुर्गा के नौ अलौकिक रूप
योगेश कुमार गोयल - 2019-04-05 10:48
भारतीय समाज और विशेषकर हिन्दू समुदाय में नवरात्र का विशेष महत्व है, जो आदि शक्ति दुर्गा की पूजा का पावन पर्व है। नवरात्र के 9 दिन देवी के विभिन्न 9 स्वरूपों की उपासना के लिए निर्धारित हैं। प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक चलने वाले नवरात्र नवशक्तियों से युक्त हैं और हर शक्ति का अपना-अपना अलग महत्व है। नवरात्र के पहले स्वरूप में मां दुर्गा पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में विराजमान हैं। नंदी नामक वृषभ पर सवार शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया। इन्हें समस्त वन्य जीव-जंतुओं की रक्षक माना जाता है। दुर्गम स्थलों पर स्थित बस्तियों में सबसे पहले शैलपुत्री के मंदिर की स्थापना इसीलिए की जाती है कि वह स्थान सुरक्षित रह सके।

सांता क्लाॅज कौन है और कहां से आता है?

बच्चों को उपहार क्यों बांटता है सांता?
योगेश कुमार गोयल - 2018-12-24 12:13
क्रिसमस का नाम सुनते ही बच्चों के मन-मस्तिष्क में सफेद तथा लंबी दाढ़ी वाले लाल व सफेद रंग के वस्त्र तथा सिर पर फुनगी वाली टोपी पहने पीठ पर खिलौनों का झोला लादे बूढ़े बाबा ‘सांता क्लाॅज’ की तस्वीर उभरने लगती है। क्रिसमस (25 दिसम्बर) के दिन तो बच्चों को सांता क्लाॅज का खासतौर से इंतजार रहता है क्योंकि इस दिन वह बच्चों के लिए ढ़ेर सारे उपहार और तरह-तरह के खिलौने जो लेकर आता है। ईसाई समुदाय के बच्चे तो सांता क्लाॅज को एक देवदूत मानते रहे हैं क्योंकि उनका विश्वास है कि सांता क्लाॅज उनके लिए उपहार लेकर सीधा स्वर्ग से धरती पर आता है और टाॅफियां, चाॅकलेट, फल, खिलौने व अन्य उपहार बांटकर वापस स्वर्ग में चला जाता है। बच्चे प्यार से सांता क्लाॅज को ‘क्रिसमस फादर’ भी कहते हैं।
विश्व दिव्यांग दिवस 3 दिसंबर पर विशेष

आखिर कैसे आत्मनिर्भर बन पायेंगे देश में दिव्यांगजन?

हम उनके प्रति दया या तिरस्कार का भाव न रखें
रमेश सर्राफ - 2018-12-01 09:50
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1992 में अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के रूप में 3 दिसम्बर का दिन तय किया गया था। इस दिवस को समाज और विकास के सभी क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देना और राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन के हर पहलू में दिव्यांग लोगों की स्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। दिसम्बर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांगों को ‘दिव्यांग’ कहने की अपील की थी, जिसके पीछे उनका तर्क था कि किसी अंग से लाचार व्यक्तियों में ईश्वर प्रदत्त कुछ खास विशेषताएं होती हैं। तब से भारत में हर जगह विकलांग के स्थान पर दिव्यांग शब्द प्रयुक्त होने लगा है।
गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व

सतगुरु नानक प्रगटिया, मिटी धुंध जग चानण होया

सुरजीत खरबंदा - 2018-11-21 10:16
सिख धर्म के प्रथम गुरु व ईश्वर स्वरुप श्री गुरु नानक देव जी का जन्म लाहौर के तलवंडी नामक स्थान पर वर्ष 1469 में पिता मेहता कालू राम के घर माता तृप्ता की पावन कोख से कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन हुआ। श्री गुरु नानक देव जी की पावन जन्म स्थली अब पाकिस्तान में ननकाना साहिब के नाम से प्रचलित है।
गोवर्धन पूजा पर विशेष

अन्नकूट के प्रसाद से की जाती है गोवर्धन पूजा

रमेश सर्राफ - 2018-11-02 20:17
दीपावली के दूसरे दिन सायंकाल गोवर्धन पूजा का विशेष आयोजन होता है। गोवर्धन पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोककथा है। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई देता है। भगवान श्रीकृष्ण ने आज ही के दिन इन्द्र का मानमर्दन कर गिरिराज पूजन किया था।

औषधि के रूप में गोमूत्रः हकीकत या अफसाना?

डाॅक्टर अरुण मित्र - 2017-09-16 10:00
मनुष्य द्वारा गोमूत्र पीने के फायदों की चर्चा सदियों से होती रही है, लेकिन पिछले तीन साल जब से नरेन्द्र मोदी की सरकार केन्द्र में बनी है, इस पर चर्चा कई गुना ज्यादा हो गई है। हम जिस भी चीज को खाएं या पीएं उसके बारे में हमें पूरी तरह निश्चिंत हो जाना चाहिए कि उससे कोई नुकसान नहीं है और यदि किसी चीज को औषधि बताई जा रही हो, तो उसके बारे में भी पूरी तरह से सबूत प्राप्त कर लेनी चाहिए।