बुलडोजर राज नहीं, आवास दो
सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए गरीबों को निशाना बना रही है
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2022-05-13 11:31 UTC
भारतीय आजादी के 75वें साल को सरकार ने ‘‘अमृतकाल’’ का नाम दिया जो कि बुलडोजरों की गड़गड़ाहटों के द्वारा चिन्हित हो रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यह एक आम बात हो गई है कि प्रशासन बुलडोजरों के साथ दिल्ली के उन पड़ोसी बस्तियों में जाता है जहां गरीब जनता बड़ी संख्या में रहती है। जहांगीरपुरी, गोविंदपुरी, शाहीन बाग, सरोजिनी नगर आदि नामों से यह सूची बढ़ती जाती है। यह आरएसएस-भाजपा सरकार के वर्गीय चरित्र को और गरीबों के प्रति इनके नजरिये को दिखाता है। आवास एक मूलभूत अधिकार है इस पृथ्वी पर रह रहे सभी मानवों के लिए। भाजपा इसे आराम से भूल सकती है यदि पीड़ित गरीब या मुसलमान हों। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि इंसानों के जीने का अधिकार मात्र उसके पाश्विक अस्तित्व तक सीमित नहीं है और यह अधिकार मानवीय गरिमा तक फैला हुआ है जिसमें आवास के साथ-साथ कपड़ा और पोषण शामिल है। न्यायालय ने इस अधिकार की व्याख्या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार के रूप में सुनिश्चित की है।