किसान संघर्ष की ऐतिहासिकता
आंदोलन जारी रहेगा
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2021-12-04 09:36 UTC
किसानों की मांगें अभी भी अधूरी हैं। उन्हें पूरा नहीं किया गया, बावजूद इसके कि तीन अन्य कृषि कानूनों को रद्द कर दिया गया मात्र क्षणों में, बिना किसी बहस के। पिछले मॉनसून सत्र में, जो कोविड-19 के आक्रमण के कारण सिर्फ हफ्तेभर चल पाया कम से कम पच्चीस बिल पारित कर दिये गए, प्रतिदिन 2.7 की दर से। इनमें इन्श्योरेन्स के निजीकरण और तीन कृषि कानून बिलों को भी ले लिया गया और वह भी बिना बहस के। इन सब कदमों में भारत के जनवाद के कमजोर होते कंधों की छाप थी। किसी भी बिल पर बहस नहीं हुई। पारित होने के लिये भी ध्वनिमत ही लिये गए बावजूद सारे शोर के। पूरे विरोधी पक्ष को नृशंसता से कुचल दिया गया था। उस समय संसद में चलती इस पूरी गैरकानूनी कार्रवाई का विरोध करने वालों में इस शीत सत्र में बारह सांसदों को निलंबित कर दिया गया।