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कोरोना की तीसरी लहर

कैसे हो पाएंगे फरवरी में पांच राज्यों में चुनाव
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-12-29 11:28 UTC
अब सभी विशेषज्ञ कहने लगे हैं कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर शुरू हो चुकी है। प्रति दिन कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। यदि संक्रमितों की संख्या को देखा जाय, तो यह अभी भी कम है, लेकिन संख्या कितनी तेजी से बढ़ती है, यह हम समाप्त हो रहे साल के अप्रैल और मई महीनों में देख चुके हैं। वह कोरोना का डेल्टा वैरिएंट था। तीसरी लहर ओमिक्राॅन वैरिएंट पर सवार है, जो डेल्टा से कई गुना संक्रामक है। जो सबसे ज्यादा आशावादी हैं, उनके अनुसार डेल्टा की अपेक्षा ओमिक्राॅन तीन गुना ज्यादा तेजी से फैलता है। इससे भी खराब बात यह है कि यह इस बात की परवाह नहीं करता कि आपने टीका ले रखा है या नहीं, अथवा आपको पहले कोरोना संक्रमण हो चुका है या नहीं। इसका मतलब है कि देश की शत प्रतिशत आबादी कोरोना की इस किस्म के निशाने पर है। मतलब जब संक्रमण होगा, तो बहुत तेजी से होगा।

प्रियंका और कांग्रेस ने महिला सशक्तीकरण का एजेंडा तय किया

अब अन्य पार्टियां उसी तर्ज पर अपने अभियान पर फिर से काम कर रही हैं
प्रदीप कपूर - 2021-12-28 09:32 UTC
लखनऊः प्रियंका गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनावों के लिए महिला सशक्तीकरण को प्रमुख एजेंडा के रूप में स्थापित करने में सफल रही है।

बांग्लादेश का मुक्ति संघर्ष

इंदिराजी ने हर मोर्चे पर सफलता हासिल की थी
एल. एस. हरदेनिया - 2021-12-27 08:59 UTC
बांग्लादेश के संघर्ष के दौरान जिस सक्षमता से इन्दिरा गांधी ने देश का नेतृत्व किया उसे विश्व के युद्धों के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा जाएगा। यहां यह स्मरण करना प्रासंगिक होगा कि बांग्लादेश का युद्ध उन्होंने प्रारंभ नहीं किया था। वह हम पर लादा गया था।

भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन

26 दिसंबर 1925 भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के इतिहास में एक अविस्मरणीय दिन
बिनय विश्वम - 2021-12-24 09:48 UTC
26 दिसंबर 1925 भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के इतिहास में एक अविस्मरणीय दिन है। वह दिन था जिस दिन भाकपा का जन्म हुआ था। यद्यपि कानपुर में दिसम्बर की ठंड का दिन था, फिर भी युवा क्रान्तिकारी जो वहाँ एकत्रित हुए थे, एक नई दुनिया की अटूट आशा और आकांक्षाओं की आग से रोमांचित थे। वे देश के विभिन्न हिस्सों से आए थे, जो मद्रास, कलकत्ता, बॉम्बे, पंजाब, कानपुर आदि स्थानों में नवजात कम्युनिस्ट समूहों का प्रतिनिधित्व करते थे। भारत की सीमाओं से परे भी, ताशकंद जैसे स्थानों पर कम्युनिस्ट समूहों की स्थापना सम्मेलन से पहले ही हुई थी। भारत की धरती पर समाजवाद के पथ पर आगे बढ़ते हुए पार्टी का सपना एक स्वतंत्र और समृद्ध भारत का था। बेशक, यह किसी आकस्मिक घटना का सहज परिणाम नहीं था। लेकिन एक प्रतिकूल सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि में सोच समझकर और विचार-विमर्श के बाद एक उद्देश्यपूर्ण कदम उठाया गया था। ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उनके हिन्दुस्तानी गुर्गे उपनिवेशवाद-विरोधी जागरण की जरा-सी भी शाखाओं को तोड़ने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे। फिर भी कम्युनिस्ट पार्टी का जन्म भारत की धरती पर हुआ, क्योंकि यह एक अनिवार्य ऐतिहासिक आवश्यकता थी।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र को हटाने की मौजूद हैं कई वजहें

वैसे राज्य की सत्ता ने पुराना हिसाब चुकता कर लिया है
अनिल जैन - 2021-12-23 09:54 UTC
लखीमपुर खीरी कांड में उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर विपक्षी पार्टियां केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र उर्फ टेनी को बर्खास्त करने की मांग रही है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न तो उनसे इस्तीफा मांग रहे हैं और न ही उन्हें बर्खास्त कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी अजय मिश्र का बचाव इस आधार पर कर रही है कि बेटे के अपराध के लिए पिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

कोलकाता के निकाय चुनावों में तृणमूल की भारी जीत

भाजपा के भविष्य के लिए अशुभ
आशीष बिश्वास - 2021-12-22 09:50 UTC
जैसा कि अपेक्षित था, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने 2021 कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में जीत हासिल की। तृणमूल ने 144 वार्डों में से 90 फीसदी पर निर्णायक जीत हासिल की। टीएमसी विजेताओं को भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों के निकटतम विपक्षी प्रतिद्वंद्वियों से जीतने का अंतर अधिकांश सीटों पर 4000 से 10,000 तक था।

केरल में हत्या की राजनीति

12 घंटे में दो हत्याएं
पी. श्रीकुमारन - 2021-12-21 11:00 UTC
तिरुवनंतपुरमः केरल में हत्या की राजनीति की पुनरावृति हो रही है। 12 घंटे में दो हत्याएं हुई हैं। इस घटना ने राज्य को करारा झटका दिया है।

स्वर्ण मंदिर परिसर में लिंचिंग

क्या भारत पागलखाने में तब्दील होता जा रहा है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-12-20 13:05 UTC
पंजाब से बहुत ही दर्दनाक घटनाओं की खबरें आ रही हैं। एक घटना अमृतसर की है, तो दूसरी कपूरथला की। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। वह व्यक्ति कौन था, इसका भी पता नहीं। सिर्फ यह कहा जा रहा है कि वह उत्तर प्रदेश का था। लेकिन यह जानकारी भी पुष्ट नहीं है। उस पर आरोप है कि वह गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी करना चाह रहा था। घटना से पहले वह पाठ सुन रहा था। उस पर आरोप है कि एकाएक वह उठा और रेलिंग पार कर उस ओर पहुंच गया, जहां सिर्फ पाठ करने वाले ग्रंथी ही जाते हैं। जिस वर्जित इलाके में वह अनधिकृत तौर पर गया, वहां गुरु ग्रंथ साहिब रखा होता है। वहीं एक सुनहरी तलवार भी है। एक वर्सन के अनुसार वह तलवार उठाने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया और दूसरे वर्सन के अनुसार वह तलवार उठा चुका था और गुरु ग्रंथ साहब के साथ बेअदबी करने वाला था।

संघ से जुड़े संगठन मोहन भागवत की बातों को क्यों नहीं मानते?

संघ प्रमुख का पद अब महज शोभा की वस्तु रह गया है
अनिल जैन - 2021-12-18 11:15 UTC
देश के विभिन्न इलाकों से आ रही मुसलमानों, ईसाइयों और दलितों पर तथा मस्जिद और चर्च जैसे धार्मिक स्थलों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस से जुड़े लोगों के हमलों की खबरों के बीच चित्रकूट में आयोजित हिंदू एकता कुंभ में आरएसएस के सुप्रीमो मोहन राव भागवत ने कहा है कि संघ लोगों को जोड़ने का काम करेगा। वैसे यह बात उन्होंने पहली बार नहीं कही है। हाल के वर्षों में वे कई बार कह चुके हैं कि संघ लोगों को जोड़ने में विश्वास रखता है। भागवत का यह भी कहना रहा है कि हर भारतीय, चाहे वह किसी धर्म या जाति का हो, सभी के पूर्वज एक हैं और सभी के डीएनए भी एक ही है। यहां तक कि वे पाकिस्तान को भी भारत का भाई बता चुके हैं और उससे रिश्ते सुधारने पर जोर दिया है। सवाल है कि उनकी इन बातों का संघ और उसके सहयोगी संगठनों पर असर क्यों नहीं हो रहा है?

अभी विरोध खत्म नहीं हुआ है

किसानों का धरना जनवाद को बचाने के लिये प्रशिक्षण शिविर का काम कर रहा था
कृष्णा झा - 2021-12-17 09:53 UTC
जनतंत्र आज हमारे देश में एक मृग मरीचिका-सी है। ‘‘शायद है’’, या ‘‘शायद नहीं है’’! इसकी व्याख्या बदलती रहती है, सिर्फ एक ही चीज सामान्य रूप से सबमें रहती है, और वह है क्रमशः ह्नास। एक-एक करके सारे खंभे कमजोर पड़ते जा रहे हैं। जब कृषि कानून किसानों पर लादे गए थे तो वह भी विकास के नाम पर ही हुआ था। स्वामीनाथन कमीशन के सारे निष्कर्षों को ताक पर रखते हुए नई नीतियां कृषि क्षेत्र में अपनाने के लिये बनाई गईं। ये नए कानून जनतंत्र का निषेध करते थे और जनवादी अधिकारों का हनन। संविधान ने हर नागरिक के लिये बुनियादी अधिकारों का प्रावधान रखा है और उसे लागू करने की मांग करना अपराध नहीं है। ऐसी घटनाओं की कमी नहीं है जब अपने इन अधिकारों का प्रयोग करने की कोशिश होती है, तो उसे विकास का विरोध करने के नाम पर सजा मिलती है। यह किसी भी प्रकार के विरोध के प्रति सहनशीलता के अभाव का लक्षण है।