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स्‍वर्णिम रेशा – पटसन

विशेष संवाददाता - 2012-12-13 12:06
नई दिल्ली: पटसन भारत के कृषि और औद्योगिक अर्थव्‍यवस्‍था के सबसे पुराने क्षेत्रों में से एक है। भारत कच्‍चे पटसन और इससे तैयार माल का सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है। वर्ष 2012-13 के दौरान पटसन क्षेत्र से निर्यात 38 करोड़ 30 लाख अमरीकी डॉलर मूल्‍य का था। इस वर्ष 50 करोड़ अमरीकी डॉलर मूल्‍य के निर्यात का लक्ष्‍य तय किया गया है। निर्यात की जाने वाली वस्‍तुओं में फर्श पर बिछाने की पटसन से बनीं दरी, वॉल हैंगिंग, सजावटी वस्‍त्र जैसी विभिन्‍न चीजें शामिल हैं।

प्राकृतिक फाईबर कपास – लाखों लोगों की आजीविका का जरिया

प्रवीण सिंह राणा - 2012-10-16 12:04
देश की प्रमुख वाणिज्यिक फसल कपास न केवल लाखों किसानों की आजीविका का जरिया है बल्कि यह औद्योगिकी गतिविधि, रोजगार और निर्यात की दृष्टि से महत्वपूर्ण कपड़ा उद्योग का प्रमुख प्राकृतिक फाईबर है। कभी देश की कपड़ा मिलों को कपास के आयात पर निर्भर रहना पड़ता था। पिछले कुछ वर्षों के गहन उत्पादन कार्यक्रमों जैसी विशेष योजनाओं के आरंभ होने से देश कपास उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है।

कबतक चमकेगा यह सोना?

अमीर देशों की बेहाली सोना को और भी सोना बना रही है
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-09-21 10:57
सोने की कीमतों में हो रही वृदिध अपूर्व और ऐतिहासिक है। इस तरह की वृदिध अब तक कभी भी देखी नहीं गर्इ थी। दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश भारत ही है और इसके लिए हम इस चमकीले धातु के आयात पर निर्भर करते हैं, इसलिए इसकी कीमत में हो रही यह वृदिध विशेष मायने रखते हैं। भारत में सोने की भूख इतनी ज्यादा है कि महंगा होने के बावजूद इसकी मांग बढ़ रही है और इस साल तो रिकार्ड एक हजार टन सोने की आयात होने का अनुमान है।

टैगोर – कवि, गीतकार, दार्शनि‍क, कलाकार और शि‍क्षा वि‍शारद

तड़ि‍त मुखर्जी - 2011-05-05 11:11
‘प्रसन्‍न रहना तो बहुत सहज है, परन्‍तु सहज रहना बहुत कठि‍न’
‑ रवीन्‍द्रनाथ टैगोर

विश्व का लोकतांत्रिक धर्म हिन्दू

राजकरण सिंह - 2011-01-09 05:03
जीवन के सम्पूर्ण क्षेत्रों की वैज्ञानिक व्याख्या के साथ उपाय प्रस्तुत करने वाले वेद ही विश्व के प्राचीनतम आध्यात्मिक ज्ञान के स्त्रोत हैं। हिन्दू धर्म का मूल वेदों से प्रारम्भ होता है जिसने विश्व के सभी मत पन्थों और दर्शन को प्रभावित किया है। वैश्विक समाज को एकीकृत और सौहार्दपूर्ण बनाने एवं ‘आत्म’ और ‘संसार’ के रहस्य को जानने का एकमात्र साधन वेद ही हैं। वर्तमान भारत के लोगों के द्वारा ही अपनी पहचान को स्थापित न कर पाने के कारण सनातन काल से चली आ रही भारत के अमूल्य ज्ञान की यह परम्परा उपेक्षित हो रही है।

हिंदी की दशा और दिशा

राजकरण सिंह - 2011-01-08 18:24
ईश्वर ने संसार की रचना में मनुष्य को श्रेष्ठ बनाने की दृष्टि से बुद्धि रुपी अनमोल सौगात प्रदान की है। मनुष्य को अपनी श्रेष्ठता व्यक्त करने के लिए ही प्रभू ने उसे वाणी प्रदान की है। उस वाणी को, जन्म देने वाली माता से शब्द प्राप्त होते हैं, जिसे हम सब मातृभाषा कहते हैं। इसी मातृभाषा के माध्यम से ही हम सबका जीवन व्यापार चलता रहता है। भाषा रुपी एक ऐसा साधन मनुष्य के पास सुलभ होता है, जिसके माध्यम से ही मनुष्य अपने जीवन के सभी कार्यों, सुख-दुख एवं विचारों की अभिव्यक्ति करता है। मातृभाषा के बाद जब हम एक राष्ट्र के रुप में अपने आप को जोड़ते है, तब हमारा नाता एक राष्ट्रभाषा से जुड़ता है।

सोचने का नजरिया बदलें और असंभव को संभव करें

विशेष संवाददाता - 2010-12-20 17:48
नई दिल्ली: पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 ए.पी.जे. कलाम ने छात्रों से असंभव को संभव करने का आह्वान किया है। श्री कलाम आज राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली के आर्मी पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय चरित्र निर्माण विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। डॉ0 कलाम ने शिक्षकों से छात्रों को अलग तरीके से सोचने के लिए उत्साहित करने का अनुरोध किया। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि शिक्षक राष्ट्र -निर्माण के आवश्यक अंग हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने एक मजबूत भारत के निर्माण के लिए नैतिकता आधारित शिक्षा पर जोर दिया।

विभिन्न प्रकार के भूकंप और उनके कारण

विशेष संवाददाता - 2010-10-01 10:32
पृथ्‍वी की प्‍लेटों की सीमाओं के आस-पास आने वाले भूकंप से करीब 80% भूकंपीय ऊर्जा निकलती है। इस प्रकार के भूकंपों को अंत:प्‍लेट भूकंप कहते हैं क्‍योंकि इस प्रकार के भूकंप का सीधा संबंध प्‍लेटों की परस्‍पर क्रिया संबंधी बल से होता है। इसलिए प्रशांत बेल्‍ट के चारों तरफ, मध्‍य-एटलांटिक पर्वत श्रेणी और उच्‍च हिमालयी बेल्‍ट अंत:प्‍लेट भूकंपीय श्रेणी में आते हैं।
भारत

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों के जरिए समावेशी विकास

पसूका - 2010-08-27 11:17
निर्माण, रोजगार और निर्यात के क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रम महत्वपूर्ण योगदान करते हैं । परिमाण के संदर्भ में अनुमान है कि देश में कुल उत्पादन में इसकी 45 प्रतिशत और कुल निर्यातों में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है । 2006-07 के संदर्भ वर्ष में एमएसएमई के चौथे अखिल भारतीय गणना के त्वरित अनुमानों के अनुसार उपक्रमों की कुल संख्या लगभग 26 मिलियन थी, और लगभग 60 मिलियन लोगों को रोजगार प्राप्त था। एमएसएमई क्षेत्र का पूंजी अनुपात और आमूल वृध्दि बड़े उद्योगों से काफी ऊंची है। एमएसएमई की भौगोलिक पृष्ठभूमि भी समान है । अत: एमएसएमई राष्ट्र के सम्मान और समावेशी उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण है ।

सुपर स्टार की कुर्सी और कलाकार

डा शंकरस्वरूप शर्मा - 2010-07-30 11:02
जब फिल्म उद्योग शुरू हुआ था तो उस समय नाटक और नौटंकी का जमाना था। नाच गाना गाने वाली और मुजरा करके गुजारा करने वाले लोगों का ही बोलबाला था। जिन्हें आम जनता की जुबान में लोगों का दिल बहलाने की वस्तु ही समझा जाता था वही आम जनता को गमों रजों के दौर से अपनी कला को प्रदर्शित करके उन्हें उस माहौल से बाहर निकालने की कोशिश ये समाज से दूर रहने वाले कलाकार करते थे ताकि समाज का आम आदमी हंस और मुस्करा सके।