उत्तर प्रदेश में एजेंडा हिंदुत्व का, झंडा विकास का
पर इस रणनीति की भी सीमाएं हैं
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2016-06-20 13:30 UTC
अब इसमें जरा भी संदेह नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव विकास या सुशासन के नाम पर नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ हिंदुत्व से जुडे उग्र नारों और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के हथकंडों के बूते लडेगी। इस बात का स्पष्ट संकेत उसने हाल ही में इलाहबाद में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के जरिए देकर करीब आठ महीने बाद होने वाले चुनाव के लिए अपनी तैयारी का आगाज भी कर दिया है। हालांकि अगले साल पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं जो भाजपा के लिए कम महत्वपूर्ण नहीं हैं लेकिन राष्ट्रीय राजनीति और खासकर 2019 के आमचुनाव में दिल्ली की सत्ता बरकरार रखने के लिहाज से उत्तर प्रदेश उसके लिए एक तरह से 'प्रश्न प्रदेश’ बना हुआ है। आम समझ भी यही कहती है कि दिल्ली के सत्ता-सिंहासन का रास्ता लखनऊ से ही होकर गुजरता है।