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सपा ने मायावती सरकार के खिलाफ अपना अभियान तेज किया

भ्रष्टाचार और बिगड़ी कानून व्यवस्था पर ज्यादा जोर
प्रदीप कपूर - 2011-06-15 05:48 UTC
लखनऊः समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सत्ता पर अगले विधानसभा चुनाव के बाद अपने बूते पर सत्ता हासलि करने के लिए जबर्दस्त अभियान शुरू कर दिया है। पिछले 7 और 8 जून को आगरा में संपन्न दो दिवसीय पार्टी सम्मेलन की समाप्ति के बाद पार्टी का उत्साह बढ़ा है। उसमें पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अपने कार्यकर्त्ताओं को कहा था कि पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए वे आपसी मतभेद भुलाकर एक जुट हो जाएं। उन्होंने राज्य की जनता से अपील की थी कि वे बसपा की सरकार को उखाड़ फेंके और राज्य में सपा की सरकार के गठन में उनका साथ दें।

भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर नहीं है केन्द्र

अन्ना को सघ परिवार से जोड़ने के मायने
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-06-14 04:44 UTC
पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार हमारे देश की व्यवस्था और लोकतंत्र के सामने एक सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके खिलाफ देश में जबर्दस्त जनाक्रोश है, पर इस जनाक्रोश के सामने सरकार शुरू से ही एक के बाद एक गड़बड़ियां करती जा रही हैं। जब पूरा विपक्ष 2 जी स्पेक्ट्रम मामले पर जेपीसी जांच की मांग कर रहा था, तो सरकार ने उस मांग को साफ साफ ठुकरा दिया था और उसकी जिद के कारण संसद का पूरा शीतकालीन सत्र बर्बाद हो गया। बजट सत्र में उसने जेपीसी जांच की मांग मान ली, क्योंकि उसे बजट पास करवाने थे। सरकार को भ्रष्टाचार के मामले पर रक्षात्मक रवैया अपनाकर इसके खिलाफ कदम उठाने की गंभीरता दिखानी चाहिए थी, लेकिन उसने अपनी कार्रवाइयों से यह साबित किया कि भ्रष्टाचार को वह ज्यादा तवज्जो देना ही नहीं चाहती।

मकबूल फिदा हुसैनः अपने धुन का पक्का एक रोमांसवादी कलाकार

अवधेश कुमार - 2011-06-14 04:38 UTC
लंदन में मकबूल फिदा हुसैन की मृत्यु से स्पंदनशील चरित्र वाले उनके प्रशंसकों एवं विरोधियों दोनों को धक्का लगा होगा। इससे बड़ी विडम्बना और क्या होगी कि जिस व्यक्ति को प्रसिद्ध पत्रिका फॉर्ब्स ने एक समय भारत के पिकासो की संज्ञा दी, उसे अंतिम सांस दूसरे देश की भूमि पर लेनी पड़ी।

राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का एक कार्यक्रम

यानी नया राजनीतिक दल कैसे बनाएँ
राजकिशोर - 2011-06-12 09:03 UTC
देश इस समय एक भयावह संकट से गुजर रहा है। भ्रष्टाचार और काला धन एक प्रमुख मुद्दे के रूप में उभरा है। भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन देश के सभी वर्गों को आकर्षित कर रहा है। उदारीकरण के मुट्ठी भर समर्थकों को छोड़ कर समाज का कोई भी वर्ग भविष्य के प्रति आश्वस्त नहीं है। किसान, मजदूर, मध्य वर्ग, छात्र, महिलाएं, लेखक, बुध्दिजीवी सभी उद्विग्न हैं। राजनीतिक दल न केवल अप्रासंगिक, बल्कि समाज के लिए अहितकर, हो चुके हैं। जिन्हें वाम दलों से आशा थी, वे पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन से हताश नजर आते हैं। नेताओं को विदूषक बने अरसा हो गया। हर आंदोलन किसी एक मुद्दे से बंधा हुआ है। नागरिक जीवन की बेहतरी के लिए संगठित प्रयास नहीं हो रहे हैं। कमजोर आदमी की कोई सुनवाई नहीं है। कुछ लोगों की संपन्नता खतरनाक ढंग से बढ़ रही है।

असंभव नहीं नदियों का पुनर्जीवन

प्रदेश की 55 नदियों को पुनर्जीवित किया जाएगा
राजु कुमार - 2011-06-11 09:52 UTC
भोपालः पानी के अति दोहन एवं उसके संरक्षण के अभाव ने मध्यप्रदेश के अधिकांश जिलों को सूखाग्रस्त बना दिया है. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पानी को लेकर लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है. 50 में से 30 अधिक जिलों में भूजल का स्तर 500 से 1000 फीट तक नीचे चला गया है. कुएं, बावड़ी, तालाब एवं नदियों के सूख जाने से मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग सूखे के कारण पलायन एवं भुखमरी का दंश झेल रहे हैं. प्रदेश के लिए पानी एक अहम मुद्दा है, पर कई योजनाओं एवं अभियानों के बावजूद स्थिति गंभीर बनी हुई है.

भाजपा में उमा भारती की वापसी

उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता सकते में
प्रदीप कपूर - 2011-06-11 09:49 UTC
लखनऊः भाजपा में उमा भारती की वापसी के बाद पार्टी के कार्यकर्त्ताओं में तो उत्साह बढ़ा है, लेकिन प्रदेश के पार्टी नेता सकते में आ गए हैं।

दिल्ली पुलिस ने डायर जैसी कार्रवाई क्यों की?

राजकिशोर - 2011-06-10 09:39 UTC
रामलीला मैदान की घटना की तुलना जलियावाला बाग गोलीकांड से करना अनुचित नहीं है। दोनों घटनाओं में बहुत साम्य है। कुछ महत्वपूर्ण फर्क भी हैं। जलियावाला बाग में लोग सत्य पाल और सैफुद्दीन किचलू को रिहा करने की मांग के समर्थन में सभा करने आए थे। इन दोनों गांधीवादी नेताओं को गिरफ्तार कर पंजाब पुलिस ने किसी अनजान जगह पर छिपा रखा था। जनसभा का आयोजन करने वाले किसी तरह की हिंसा करने नहीं आए थे। हत्याकांड के बाद उनके पास से एक भी हथियार बरामद नहीं हुआ। लेकिन ब्रिगेडियर डायर को लगा कि अगर इस जन सभा को होने दिया गया, तो देश भर में बगावत हो जाएगी। वह ऐसी किसी बगावत को कुचलना चाहता था।

केन्द्र ने रामदेव के मामले में घपलेबाजी की

विश्वास का सकट जारी है
कल्याणी शंकर - 2011-06-10 06:43 UTC
केन्द्र सरकार रामदेव संकट में फंसकर यह तय कर नहीं पा रही है कि वह इससे कैसे निकले। आज यदि केन्द्र सरकार की यह स्थिति है, तो उसके लिए वह खुद जिम्मेदार है। उसनंे इस मसले पर एक के बाद एक घपलेबाजी की और दलदल में लगातार फंसती गई। उसे लगा कि वह रामदेव को अपने हिसााब से चला पाने में सक्षम है। उसे अपने आप पर जरूरत से ज्यादा भरोसा था। इसलिए जब उसे कड़ाई करनी चाहिए थी, तो वह बेहद विनम्रता से पेश आ रही थी। बाद में जब उसे मामले को मुलायमियत से संभालना था, तो वह एकाएक कठोर हो गई।

स्वामी रामदेव का उपयोग

बाघ और बकरी को एक साथ पानी नहीं पिला पाए बाबा
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-06-09 10:13 UTC
अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ठीकठाक चल रहा था। 4 दिनों के अनशन के दबाव में केन्द्र सरकार कठोर लोकपाल विधेयक लाने को तैयार हो गई थी और अन्ना सहित 4 अन्य लोगांे को विधेयक का मसौदा बनाने वाली समिति में शामिल भी कर लिया था। पर उसके बाद बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और मोर्चा खोल दिया। प्रभावी लोकपाल कानून बनाने के अन्ना के आंदोलन के दौरान बाबा रामदेव ने अपने आपको उपेक्षित पाया और उनकी प्रतिक्रियों में यह साफ देखा जा सकता था कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में अन्ना को मुख्य भूमिका में आते देख विचलित थे। इसके कारण ही उन्होंने भ्रष्टाचार के व्यापक पहलुओं पर अपनी तरफ से एक बड़ा सत्याग्रह करने की घोषणा कर दी।

भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर राजनीति का साया

लोकपाल विधेयक हो सकता है इसका शिकार
अमूल्य गांगुली - 2011-06-08 10:47 UTC
फजीहत के बाद कांग्रेस को अब कुछ राहत मिल रही है। इसका कारण यह है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान अब राजनैतिक रंग ले रहा है। जब तक यह गैर राजनैतिक लोगों के हाथों में था, तो केन्द्र सरकार और कांग्रेस के लिए उससे निबटना कठिन हो रहा था। इसके सामने देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी अपने आपको लाचार पा रही थी। जब केन्द्र सरकार के 4 मंत्रियों ने एक योगी संन्यासी को हवाई अड्डे पर रिसीब किया, तो इस सरकार की प्रतिष्ठा काफी धूमिल हो चुकी थी और इससे उसकी लाचारी का पता चलता था। उस अशालीन कदम की अपनी मूर्खता को छिपाने के लिए केन्द्र सरकार ने रामदेव और उनके समर्थकांे को रामलीला मैदान से ही रातों रात खदेड़ दिया। भाग रहे रामदेव को पकड़कर हरिद्वार भेज दिया गया।
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