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लोकसभा चुनाव के लिए बसपा की तैयारी जोरों पर

मायावती चुनाव के बाद किंगमेकर की भूमिका में आना चाहती हैं
प्रदीप कपूर - 2012-11-27 11:20 UTC
लखनऊः विधानसभा चुनावों में मात खाने के बाद उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बसपा प्रमुख ने लोकसभा में अपनी बेहतर स्थिति के लिए जोरदार तैयारी शुरू कर दी है। वह लोकसभा चुनाव मंे ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना चाहती हैं और इसके लिए उत्तर प्रदेश मंे ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी उन्होंने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।

क्या बाला साहब के निधन के बाद शिवसेना बचेगी?

ठाकरे बंधुओं की कलह सेना के लिए महंगी साबित होगी
हरिहर स्वरूप - 2012-11-26 12:18 UTC
बाल ठाकरे के निधन के बाद शिवसेना का भविष्य क्या होगा? यह एक ऐसा सवाल है, जो पिछले 4 दशकों से पूछा जाता रहा है, पर आज यह सवाल सबसे ज्यादा प्रासंगिक हो गया है, क्योंकि बाल ठाकरे अब वास्तव में नहीं रहे। बाला साहेब ने 1960 के दशक में सेना का गठन किया था और 1990 के आसपास इसका पूरे महाराष्ट्र में विस्तार किया और बाद में 1995 में भाजपा के सहयोगी से सेना की सरकार भी बनी।

राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस का चुनावी प्रयाण

केवल परिवार का नाम चुनावी बेड़ा पार नहीं लगा सकता
अवधेश कुमार - 2012-11-24 10:41 UTC
कांग्रेस में नेहरू परिवार और 10 जनपथ के समर्थकों की बांछें इस समय खिलीं हुईं हैं। राहुल गांधी को शीर्ष नीति-निर्धारकों में लाकर नेतृत्व थमाने की उनकी कवायद ने रंग लाया और अगले लोकसभा चुनाव के लिए बनी समन्वय समिति के प्रमुख की जिम्मेवारी उन्होंने स्वीकार कर ली। इस तरह महत्वपूर्ण जिम्मेवारी लेने के लिए तैयार होने के पहले अध्यक्ष सोनिया गांधी फिर स्वयं राहुल का बयान साकार हो गया।

समय से पहले चुनाव की संभावना प्रबल

कांग्रेस को लोकसभा चुनाव के लिए अभी से तैयार हो जाना चाहिए
कल्याणी शंकर - 2012-11-23 11:40 UTC
संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही लोकसभा के अगले चुनाव के शीघ्र होने की संभावना भी तेज हो गई है। वैसे कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के पास अपने बाहरी समर्थकों के बूते स्पष्ट स्पष्ट बहुमत है। लोकसभा में उसके समर्थक सांसदों की संख्या अभी भी 300 से ऊपर है, लेकिन 22 सदस्यीय समाजवादी पार्टी और 21 लोकसभा सांसदों वाली बसपा के ऊपर कांग्रेस विश्वास नहीं कर सकती।

2जी नीलामी पिटने के पीछे सरकार के साथ उद्योग की मिलीभगत

कैग के खिलाफ कांग्रेस का अभियान अनुचित
नन्तु बनर्जी - 2012-11-22 11:59 UTC
केन्द्र सरकार द्वारा 2 जी संचार तरंगों की कराई गई नीलामी विफल रही। वह इस मायने में विफल रही कि उससे जितनी आय की उम्मीद थी, उससे बहुत ही कम आय हुई। संचार कंपनियों ने नीलामी में रूचि ही नहीं दिखाई। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार उन 2जी तरंगों की नीलामी करवा रही थी, जिनके 2008 में हुए आबंटन को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था, क्योंकि उस आंबटन के दौरान भारी अनियमितता देखने को मिली थी और केन्द्र सरकार के खजाने को हुए भारी नुकसान की भी बात की गई थी। कैग ने अपने आकलन में अनुमान लगाया था कि खजाने को हुए घाटे की रकम 1 लाख 76 करोड़ रुपये तक की हो सकती है।

शाहीन की गिरफ्तारी के सबक

काले आईटी कानून को रद्द किया जाय
उपेन्द्र प्रसाद - 2012-11-21 11:06 UTC
शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के निधन के बाद जो तमाशा देखने को मिल रहा है, वह निश्चय ही बहुत भयावह है। सबसे ज्यादा भयावह 21 साल की एक लड़की शाहीन और उसकी एक दोस्त रेणु की पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी है। वह गिरफ्तारी किस हद तक गलत थी, इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि खुद आईटी और संचार मंत्री कपिल सिबल ने उसे गलत बता दिया।

यूडीएफ सरकार पर भड़के एंटोनी

सत्तारूढ़ मोर्चा सदमे में
पी श्रीकुमारन - 2012-11-20 12:41 UTC
तिरुअनंतपुरमः क्या सच है अथवा क्या गलत- इससे ज्यादा यह रखता है कि लोग सच किसे मानते हैं। पिछले दिनों केन्द्रीय रक्षामंत्री ए के एंटोनी ने केरल की चांडी सरकार के खिलाफ जो भड़ास निकाली उसका अर्थ लोग यही लिकाल रहे हैं कि गृहमंत्री राज्य सरकार के काम करने के तरीके से बेहद नाराज हैं।

सपा ने पहली सूची जारी कर अन्य दलों के ऊपर बढ़त हासिल की

टिकट वितरण में परिवारवाद का जोर
प्रदीप कपूर - 2012-11-19 12:06 UTC
लखनऊः लोकसभा चुनाव की जल्द होने की संभावना के मद्देनजर समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपनी पहली सुची जारी कर दी है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा के 80 क्षेत्र हैं। उनमें से 55 क्षेत्रों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा सपा ने कर दी है।

ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत देखे पूरब की ओर

म्यान्मार और बांग्लादेश के साथ अच्छा संबंध ही इसका जवाब है
आशीष बिश्वास - 2012-11-17 10:17 UTC
कोलकाताः लंबी अवधि के लिए म्यान्मार भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए ज्यादा भरोसेमंद विकल्प है। पर पता नहीं क्यों हमारे नीति निर्माता इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने एक महत्वाकांक्षी तापी परियोजना पर काम करना शुरू किया है, जिसका उपयोगिता और सफलता - दोनों ही संदिग्ध है।

अन्ना और केजरीवाल को अपनी विश्वदृष्टि स्पष्ट करनी चाहिए

विभाजन आंदोलन को कमजोर करेगा
कल्याणी शंकर - 2012-11-16 12:28 UTC
पिछले दो सालों से अन्ना के नेतृत्व मंे टीम अन्ना ने आंदोलन चलाकर भ्रष्टाचार के मसले को देश की राजनीति के केन्द्र में ला खड़ा किया है। पिछले साल उन्होंने लोकपाल की लड़ाई लड़ी, जिसमें वे आंशिक तौर पर सफल और आंशिक तौर पर विफल रहे। उनके आंदोलन के दबाव में संसद में लोकपाल का एक विधेयक पेश किया गया, जिसे लोकसभा ने तो पारित कर दिया है और वह अभी राज्य सभा में पारित होने का इंतजार कर रहा है, हालांकि उस विधेयक को टीम अन्ना का समर्थन हासिल नहीं है।