प्रोन्नति में आरक्षण का सवाल
देश की राजनीति में एक नया बदलाव
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2012-12-19 12:13 UTC
देश की दलित राजनीति के लिए 2012 का साल इस मायने में एक ऐतिहासिक साल रहा है कि पहली एससी/एसटी के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे किसी कदम का विरोध हुआ है। आजादी के बाद से जब कभी भी सरकार दलितों के कल्याण के लिए किसी भी प्रकार का नीतिगत निर्णय करती थी अथवा संविधान की धारा का संशोधन करती थी, तो उसके कदम पर राजनैतिक आमसहमति ही नहीं, बल्कि सर्व सहमति का माहौल रहता था। क्रियान्वयन के स्तर पर भले ही दलितों के साथ छल होता रहा हो, लेकिन नीतियो के स्तर पर उसके कल्याण के मामले में कभी भी हमारे राजनैतिक वर्ग में दो राय नहीं रही।