Loading...
 
Skip to main content

View Articles

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

नाभिकीय दादागिरी ...

System Administrator - 2007-10-20 06:47 UTC
अगले महीने अर्थात् जुलाई 2007 से नाभिकीय आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों के दमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून (द इंटरनेशनल कॉन्वेंशन फॉर द सप्रेशन ऑफ एक्ट्स ऑफ न्यूक्लियर टेररिज्म) लागू हो जायेगा जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र में सारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गयी हैं। लेकिन नाभिकीय दादगिरी और नाभिकीय आतंकवाद दोनों के खतरों से दुनिया को लगातार सजग रहने की आवश्यकता पड़ेगी।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

बीस रुपये से भी कम पर गुजारा

System Administrator - 2007-10-20 06:41 UTC
अर्थशास्त्री प्रधान मंत्री के कार्यकाल में भारत में गरीबों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे भी ज्यादा आश्चर्य यह कि डा. मनमोहन सिंह देश के विकास के नाम पर अभी भी अपनी पीठ थपथपाते हैं। कहते हैं कि उनकी आर्थिक नीतियां ही सही हैं। उधर करोड़ों लोग दाने - दाने को तरस रहे हैं।

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

विश्व व्यवसाय, आतंकवाद

System Administrator - 2007-10-20 06:37 UTC
लंदन की एक कंपनी कंट्रोल रिस्क ने हाल ही में प्रकाशित अपनी एक रपट में दुनिया भर में व्यवसाय करने के जोखिमों के मामले में भारत को सबसे कम जोखिमों वाले देशों में एक माना है, चाहे वह राजनीतिक हो या सुरक्षा संबंधी। दुनिया के संदर्भ में उसने आतंकवाद को सबसे बड़ा खतरा बताया है, जबकि

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

नांदीग्राम कांड ...

System Administrator - 2007-10-20 06:32 UTC
आम लोगों को सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाने के आंदोलन में हमारे पूर्वज वामपंथियों में से अनेकों के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता, लेकिन इस आधार पर आज के नकली वामपंथियों पर भरोसा करना खतरे से खाली नहीं है।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

दुनिया की गिरती सेहत ...

System Administrator - 2007-10-20 06:27 UTC
दुनिया भर में लोगों की सेहत गिरती जा रही है और चिकित्सा सुविधाएं महंगी की जा रही हैं। व्यवसायी अधिकाधिक कमाने के लिए और सरकारें अपनी राजकोषीय स्थितियों में सुधार के नाम पर ऐसा कर रही हैं। परिणाम स्वरुप जानलेवा बीमारियां महामारी का रुप धारण कर रही हैं। लाखों जानें सिर्फ लापरवाही या अमानवीय लोभ में की जा रही गड़बड़ियों के कारण जा रही हैं।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

कहां खो गये ये लोग

System Administrator - 2007-10-20 06:21 UTC
अन्तर्राष्ट्रीय विलुप्तता दिवस: सरकारें और समाज ने इनके लिए क्या किया ?सरकारें और समाज ने इनके लिए क्या किया ?
हर साल 30 अगस्त को दुनिया भर के खोये हुए लोगों की खोज के लिए संकल्प लिये जाते हैं, और फिर हजारों लोग खो भी जाते हैं। खोये हुए लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा भीषण त्रासदी और मानवीय संवेदनाओं का विषय अब तक नहीं बन पाया है। यह आंकड़ों का विषय ही रह गया है और इसलिए रेड क्रास की अन्तर्राष्ट्रीय कमिटी (आईसीआरसी) को इस वर्ष कहना पड़ा कि जितना किया जाना चाहिए उतना नहीं किया जा रहा है।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

छत्तीसगढ़ में हिंसा और ...

System Administrator - 2007-10-20 06:19 UTC
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में बीजापुर जिले के रानीपोटली गांव स्थित सशस्त्र बल के एक शिविर पर माओवादियों के हमले में कल 54 लोगों की जानें गयीं जिनमें छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के 15 जवान भी शामिल थे। शेष मृतक स्थानीय आदिवासी युवा थे जिन्हें विशेष पुलिस अधिकारी का ओहदा देकर नक्सलियों का मुकाबला करने के लिए सल्वा जुडुम संगठन में शामिल किया गया था।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

बदलता उत्तर प्रदेश

मायावती, मुलायम और मनमोहन
System Administrator - 2007-10-20 06:14 UTC
क्या मायावती बहुस्तरीय अन्यायपूर्ण और शोषण पर आधारित प्रणाली बदल पायेंगी ?
उत्तर प्रदेश की सत्ता में अपने दम पर बहुमत से आने के बाद मायावती जाति, नस्ल, और धर्म से ऊपर उठकर विकास की राजनीति के रास्ते चल पड़ी हैं। यह अच्छी बात है। लेकिन इससे भी अच्छी बात यह कि हाल में उनके द्वारा उठाये गये साहसिक कदम के तहत अन्यायपूर्ण और शोषण पर आधारित अर्थव्यवस्था बदलने की कोशिश एक ऐसे समय में की गयी है जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केन्द्र की सरकार उसका सम्पोषण करते हुए उसी गलत प्रणाली को बढ़ावा दे रही है और राज्य के पूर्व मुख्य मंत्री मुलायम सिंह ने भी ऐसा ही किया था। लेकिन सवाल है कि क्या वह सफल हो पायेंगी या फिर उसी दुश्चक्र में फंस जायेंगी?
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

विश्व संसद के लिए मुहिम

System Administrator - 2007-10-20 06:09 UTC
विश्व संसद के लिए इन दिनों एक मुहिम चलायी जा रही है जिसे पांच महादेशों के 70 देशों के लगभग 400 सांसदों का अब तक समर्थन हासिल हो चुका है। इनके अलावा अनेक विख्यात और अल्पज्ञात कलाकार और बुद्धिजीवी शामिल हो गये हैं।

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

एशिया प्रशांत के देशों ...

System Administrator - 2007-10-20 06:05 UTC
एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देश अनिश्चितता के दौर में फंसे हैं। संयुक्त राष्ट्र के इस क्षेत्र के लिए गठित आर्थिक और सामाजिक आयोग ने अपनी ताजा रपट में कहा है कि जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2007 के लिए उसने भविष्यवाणी की है कि 2006 की तुलना में इस क्षेत्र की विकास दर धीमी हो जायेगी।