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भाजपा ने आया-राम-गया-राम राजनीति में हासिल की महारत

भगवा पार्टी दलबदल के माध्यम से नष्ट कर रही है राजनीति के नैतिक तंतु
के आर सुधामन - 2024-03-01 11:25 UTC
भारत में आया राम गया राम की राजनीति तब शुरू हुई जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। उन पर थोक में निर्वाचित प्रतिनिधियों को खरीदकर विपक्षी दलों को कमजोर करने का आरोप लगता था। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के जमाने में यह जोर पकड़ा जब उन्होंने कांग्रेस सरकार बनाने के लिए थोक में विपक्षी विधायकों को खरीदा, हालांकि पार्टी चुनाव में अल्पमत में थी। अब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस कला में महारथ हासिल कर ली है और भारतीय राजनीति में इस खतरे को अगले स्तर पर ले गये हैं।

भारत में गरीबी के 5 प्रतिशत से नीचे चले जाने का दावा गलत

नीति आयोग एचसीईएस 2022-23 के आंकड़ों पर राजनीति न करे
डॉ. ज्ञान पाठक - 2024-02-29 11:31 UTC
नेशन सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) द्वारा घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस: 2022-23) के प्रकाशन के ठीक बाद, पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से लोकसभा चुनाव 2024 की पूर्व संध्या पर गरीबी पर राजनीति शुरू कर दी गयी है। सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी. वी. आर सुब्रमण्यम ने दावा किया है कि देश में गरीबी 5 प्रतिशत से नीचे आ गयी है, खुदरा मुद्रास्फीति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कमजोर होने और भारत का 'कुछ लोगों तक ही सीमित' होने की बात गलत है।

सीटों के बंटवारे पर इंडिया ब्लॉक में बातचीत आखिरकार प्रगति पर

अब महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बिहार में घटक दलों का ध्यान केन्द्रित
कल्याणी शंकर - 2024-02-28 10:49 UTC
विनाश का भविष्यवाणी करने वालों ने कहा था कि इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के बीच सीटों का बंटवारा विफल हो जायेगा, लेकिन उसके घटक दल धीरे-धीरे आगे बढ़े। अब उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में गठबंधन धीरे-धीरे आकार ले रहा है। गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार खड़ा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।

लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में हो सकता है त्रिकोणीय मुकाबला

इंडिया ब्लॉक सबसे मजबूत, अन्नाद्रमुक और भाजपा को भी मिल रहे सहयोगी
के आर सुधामन - 2024-02-27 11:21 UTC
2024 के लोकसभा चुनावों के लिए तमिलनाडु में राजनीतिक सीटों की साझेदारी के संबंध में अभी तक विभिन्न पार्टियों के बीच समझौते पूरे नहीं हुए हैं। राज्य में आधी सदी या उससे भी अधिक समय से राजनीति दो द्रविड़ पार्टियों द्रमुक और अन्नाद्रमुक के इर्द-गिर्द घूमती रही है। कुछ साल पहले द्रमुक के संरक्षक एम करुणानिधि और अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जे जयललिता की मृत्यु के बाद से दोनों दलों, जिनके पास लगभग 30 से 35 प्रतिशत वोट शेयर थे, निश्चित रूप से कम हो गये हैं। तब से दोनों द्रविड़ पार्टियों का व्यक्तिगत वोट शेयर घटकर 20-22 प्रतिशत रह गया है और जैसा कि हमने पिछले कुछ चुनावों में देखा था, जो भी पार्टी बेहतर गठबंधन बनाती है, वह जीतती है, चाहे वह तमिलनाडु विधानसभा का चुनाव हो या लोकसभा का।

भाजपा को जबरन चंदा का मोदी सरकार के सभी घोटालों की जननी होना संभव

देखा जा सकता है चुनावी बांड फैसले में सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट संकेत
के रवीन्द्रन - 2024-02-26 10:34 UTC
कांग्रेस पार्टी का यह आरोप कि कैसे मोदी सरकार ने चंदा लेने के लिए सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया, यह मोदी के शासन के सबसे बड़े घोटाले को रूप में उभरने की संभावना है, शायद संप्रग सरकार से 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आयामों की तरह।

कांग्रेस-सपा गठबंधन ने जगायी उत्तर प्रदेश में विपक्ष की उम्मीद

दोनों पक्षों पर भारी मुस्लिम दबाव के कारण जल्दी हुआ समझौता
प्रदीप कपूर - 2024-02-24 11:45 UTC
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ता उत्साहित हैं क्योंकि पहली बार जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को यह विश्वास हो रहा है कि सीटों के बंटवारे पर सहमति बनने के बाद राज्य में भाजपा को हराया जा सकता है। दूसरी ओर, भाजपा के राज्य नेता घबड़ाये हुए हैं, हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जनता को विश्वास दिलाया कि उन्हें राज्य की कुल 80 सीटों में से 65 सीटें मिलेंगी।

संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम प्रस्ताव पर अपने वीटो के कारण अमेरिका अलग-थलग

इजरायल को और बढ़ावा मिलने से गाजा में नरसंहार खत्म होने की सारी उम्मीदें खत्म
सात्यकी चक्रवर्ती - 2024-02-23 11:27 UTC
गाजा पट्टी में इजरायली रक्षा बलों के युद्ध अपराधों को लगातार समर्थन देने के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका को अंततः अपने समर्थक देशों से बड़े अलगाव का सामना करना पड़ रहा है। बाइडेन सरकार को मंगलवार रात अंतरराष्ट्रीय निंदा का सामना करना पड़ा जब उसके प्रतिनिधि ने गाजा में तत्काल मानवीय युद्धविराम की मांग करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को वीटो कर दिया।

केंद्र और किसान संगठन दोनों विवादास्पद मुद्दों पर नए सिरे से विचार करें

एमएसपी की कानूनी गारंटी से प्रभावित होगा कृषि अर्थव्यवस्था का भविष्य
अंजन रॉय - 2024-02-22 10:58 UTC
न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना को कानूनी दर्जा देने की मांग को लेकर एक ओर केंद्र सरकार और दूसरी ओर समृद्ध किसानों के बीच जारी गतिरोध भारतीय कृषि नीति और वास्तविकता के विरोधाभासों को दर्शाता है।

रोजगार सृजन पर मोदी सरकार की चुप्पी पर उठते सवाल

केंद्र का बुनियादी ढांचा खर्च बढ़ा-चढ़ाकर बताने का संदेह
नन्तु बनर्जी - 2024-02-21 10:44 UTC
यह समझना मुश्किल है कि सरकार रोजगार सृजन पर चुप क्यों है जबकि वह साल-दर-साल बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड खर्च का लगातार दावा कर रही है। नयी नौकरी चाहने वालों के लिए अवसर लगातार कम हो रहे हैं। पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए बेरोज़गारी का लगातार बढ़ना चिंता का कारण बनता जा रहा है। वर्तमान में, देश का वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद विस्तार बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा समय-समय पर जारी किये जाने वाले बेरोजगारी के आंकड़ों को देखते हुए यह रोजगारहीन आर्थिक विकास की तरह दिखता है, जबकि बुनियादी ढांचे पर होने वाला खर्च सीधे तौर पर रोजगार से जुड़ा होता है।

केंद्र को अब पारदर्शी चुनावी फंडिंग प्रणाली पर काम करना चाहिए

अनुचित था मोदी सरकार का 2017 बांड योजना के बचाव पर अड़े रहना
कल्याणी शंकर - 2024-02-20 11:10 UTC
भारतीय चुनाव एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें लाखों मतदाता और अनेक राजनीतिक दल शामिल होते हैं। ये पार्टियाँ अपने अभियानों के वित्तपोषण के लिए व्यक्तियों और निगमों के योगदान पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं, क्योंकि फंडिंग महत्वपूर्ण है। चुनाव के दौरान बहुत सारा काला धन भी घूमता है।
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