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मोदी सरकार के पास मध्यपूर्व के देशों से बात करने का मुह नहीं

भाजपा का हिंदुत्व एजेंडा वैश्विक निगरानी के दायरे में आ रहा है
प्रकाश कारत - 2022-06-11 12:15 UTC
बीजेपी और नरेंद्र मोदी सरकार अपने-अपने पैरों पर फहरा रही है। एक व्यवस्थित मुस्लिम विरोधी अभियान की अध्यक्षता करने और इस्लामोफोबिया बढ़ाने के बाद, सरकार और सत्तारूढ़ दल को अधिकांश मुस्लिम देशों से कड़वी राजनयिक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। जिन देशों ने भारत की इसके लिए खिंचाई की है, उनमें संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, ईरान, इराक, इंडोनेशिया, मलेशिया और तुर्की शामिल हैं।

विनाशकारी घृणा की विचारधारा

आज की राजनीति और कूटनीति को इस सच्चाई के प्रति सजग रहना है
बिनॉय विश्वम - 2022-06-11 05:02 UTC
धार्मिक अतिवाद और धार्मिक कट्टरवाद के बीच कितनी दूरी है? इस सवाल का जवाब कठिन है, क्योंकि आजकल इन दोनों के बीच कोई व्यवहारिक दूरी नहीं है। धार्मिक अतिवाद से लेकर सांप्रदायिक घृणा तक इन दोनों के बीच घूमने के लिए कोई दूरी नहीं है। सभी धार्मिक घोषणाओं के पीछे नस्लीय गर्व के विचार अपने असभ्य और प्राचीन रूप में मार्गदर्शन की भूमिका अदा करते हैं। एक बार जैसे ही इसे सक्रिय किया जाता है यह आगे कितनी प्रतिक्रियाओं में फूटेगा इसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। आरएसएस भाजपा नेतृत्व अपनी विचारधारा की इस भूमिका को ढंकने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है जिसने भारत और विदेश में मौजूदा राजनीतिक बवंडर खड़ा कर दिया है।

अखिलेश और मायावती के आपस में लड़ने से भाजपा को फायदा

उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में सपा और बसपा के बीच बड़ी लड़ाई
प्रदीप कपूर - 2022-06-09 12:05 UTC
लखनऊः समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए वोट बैंक को हथियाने के लिए आमने-सामने हैं। ऐसे समय में समाजवादी पार्टी को 2019 में पार्टी द्वारा जीते गए आजमगढ़ और रामपुर में दो महत्वपूर्ण उपचुनावों में भाजपा से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती भाजपा के मुकाबले सपा को नुकसान पहुंचाने के लिए अधिक इच्छुक हैं। इसीलिए पार्टी ने लंबे समय के बाद ये चुनाव लड़ने का फैसला किया।

सांप्रदायिक नफरत के नगाड़े पर बज रहा है शर्मिंदगी का डंका

मोदी सरकार को अपने गिरेबां में झांकने की दरकार है
अनिल जैन - 2022-06-09 08:42 UTC
देश में पिछले आठ साल से सत्ता और संगठन के स्तर जारी सांप्रदायिक नफरत फैलाने के अभियान को लेकर पहली बार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रही है। सत्ता और संगठन को अपने बचाव के लिए देश के उसी संविधान का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसे बदल कर देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की वकालत आरएसएस और भाजपा से जुड़े संगठनों के लोग आए दिन करते रहते हैं। भाजपा के जिन दो प्रवक्ताओं ने पैगंबर हजरत मुहम्मद को लेकर अपमानजनक टिप्पणी और भड़काऊ बयान दिए, उन्हें भी पार्टी से निलंबित और निष्कासित कर भाजपा को आधिकारिक तौर पर सफाई देते हुए परोक्ष रूप से उसी धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत की दुहाई देना पड़ रही है, जिसकी वह पिछले कई दशकों से खिल्ली उड़ाती आ रही है। इतना नहीं, पार्टी को अपने चुनिंदा नेताओं और केंद्रिय मंत्रियों को भी नसीहत देनी पड़ रही है कि वे संभल कर मुंह खोले और भड़काऊ बयानबाजी से बाज आएं।

क्या संघ प्रमुख भागवत भगवा भूत को वश में करने की कोशिश कर रहे हैं?

हिंदू कट्टरपंथियों का जोश भारत की छवि के लिए खतरा
अमूल्य गांगुली - 2022-06-07 11:36 UTC
कभी-कभी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को हिंदुत्व के उग्रवादियों को शांत करने में लगे देखा जाता है। जो बात उन्हें इस तरह का प्रयास करने के लिए प्रेरित करती है वह आम तौर पर निष्पक्ष पर्यवेक्षकों की समझ से परे है। लेकिन संघ परिवार के नेता का प्रयास प्रशंसनीय और निर्विवाद है।

भारत सरकार को देश में काम कर रहे बांग्लादेशियों की देखभाल करनी होगी

वहां के हिंदुओं के हितों की देखभाल करने की समान जिम्मेदारी ढाका की है
अरुण कुमार श्रीवास्तव - 2022-06-06 12:17 UTC
पिछले दो-तीन दिनों से, भारतीय मीडिया एक कहानी चला रहा है जिसमें कहा गया है कि एक बांग्लादेशी महिला ने दलदली सुंदरबन के जंगलों को पार किया, जो रॉयल बंगाल टाइगर्स का घर भी है, और फिर एक घंटे के लिए नदी पार करने और अपने भारतीय प्रेमी से मिलने के लिए तैरती रही। 22 साल की कृष्णा मंडल ने अपने बॉयफ्रेंड अभिक मंडल से फेसबुक पर मुलाकात की थी। उनकी प्रेम कहानी वायरल होने से पहले इस जोड़े ने कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर में शादी कर ली और महिला को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। अपने बचाव में, उसने कहा कि उसके पास कोई पासपोर्ट नहीं है, इसलिए उसने अपने आदमी से मिलने और उससे शादी करने का आसान तरीका अपनाया।

बिहार की जातिगणना और उसके बाद

देश में जाति जनगणना को अब रोका नहीं जा सकता
उपेन्द्र प्रसाद - 2022-06-04 10:43 UTC
आखिरकार जातिगणना को बिहार मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल ही गई। इसके साथ देश की तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश की जाति गणना का काम सुनिश्चित हो गया है, लेकिन इसका असर सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा। देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले महाराष्ट्र में भी इसी तरह की गणना की मांग तेज होने लगी है और मांग करने में शरद पवार की एनसीपी सबसे आगे है। महाराष्ट्र विधानसभा ने तो बतौर प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार से कहा था कि वह राष्ट्रीय जनगणना में जाति की गणना भी कराए। हालांकि केन्द्र सरकार ने वैसा कराने से साफ तौर से इनकार कर दिया। वैसे न कराने का कोई ठोस कारण केन्द्र सरकार नहीं दे पाई।

लोकसभा चुनाव की तैयारियों में भाजपा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 80 में से 75 सीटों का किया लक्ष्य
प्रदीप कपूर - 2022-06-03 10:53 UTC
लखनऊः भाजपा हिंदुत्व का उपयोग कर उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारी करने, निवेश बैठक आयोजित करने और लक्ष्य हासिल करने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को तैयार करने में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 75 सीटों का लक्ष्य हासिल करने को कहा है।

पेट्रोल-डीजल के दामों में यह राहत कब तक?

पेट्रोल के दाम कई राज्यों में अब भी एक सौ रुपए प्रति लीटर से ज्यादा है
अनिल जैन - 2022-06-02 11:01 UTC
देश में जब-जब भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते हैं और जनता में हाहाकार मचता है तो सरकार के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेता हर मंच पर यह मिथकीय कथा बांचने लगते हैं कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम पेट्रोलियम कंपनियां तय करती हैं और सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। कोई-कोई मंत्री और भाजपा प्रवक्ता तो इसके लिए आठ साल पहले सत्ता से बाहर हो चुकी यूपीए सरकार को भी जिम्मेदार ठहरा देते हैं। लेकिन जब कभी पेट्रोल-डीजल के दामों में थोड़ी सी भी कमी होती है तो तमाम मंत्री और भाजपा नेता उसका श्रेय सरकार को देने लगते हैं। इस काम में सरकार के ढिंढोरची की भूमिका निभाने वाला मीडिया भी शामिल रहता है और वह भी बढ़-चढ़ कर सरकार की जय-जयकार करता है। पिछले दिनों पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी के लिए उत्पाद शुल्क में जो कटौती की है, उसको लेकर भी यही हो रहा है।

नीतीश कुमार-नरेंद्र मोदी की आरसीपी सिंह पर नोकझोंक एनडीए के लिए अशुभ संकेत

बिहार के मुख्यमंत्री 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं
अरुण श्रीवास्तव - 2022-06-01 12:17 UTC
नरेंद्र मोदी अपने चाटुकारों और भक्तों द्वारा उन पर बरसाए गए स्तवन से इतने प्रभावित हैं कि वे भारत की राजनीतिक स्वतंत्रता से अब तक के सबसे मजबूत और सबसे शक्तिशाली राजनेता हैं, जिससे वह प्रेरणा लेते हुए अपने विश्वास की दुनिया में घूमना पसंद करते हैं। बुनियादी जमीनी हकीकतों की अनदेखी करते हुए आरएसएस का राजनीतिक समर्थन और दिशा-निर्देश उन्हें प्राप्त है।