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भारत

चौहान पर इस्तीफा के लिए दबाव बढ़ा

व्यापम मौतों ने भाजपा नेतृत्व को किया विभाजित
एल एस हरदेनिया - 2015-07-08 15:27 UTC
भोपालः क्या शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के पद से हट रहे हैं? स्थानीय अखबारों में छप रही खबरें इसी तरह का संदेश जारी कर रही हैं। जो अखबार मुख्यमंत्री की चापलूसी करने के लिए कुख्यात हैं, वे भी कुछ इसी तरह की खबरें छाप रहे हैं। दैनिक भाष्कर ने अपने पहले पेज पर एक संपादकीय लिखा है। पहले पेज पर संपादकीय असामान्य परिस्थितियों में ही लिखा जाता है।
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भाजपा नेतृत्व असुरक्षा बोध से पीड़ित

कांग्रेस कर रही है उबरने की कोशिश
अमूल्य गांगुली - 2015-07-07 14:42 UTC
भारतीय जनता पार्टी कितना असुरक्षित महसूस कर रही है, इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि उसके प्रवक्ता सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे सिंधिया के बचाव में पागलपन की हद तक जाकर एक के बाद एक मूर्खतापूर्ण तर्क देते जा रहे हैं।
भारत

व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच जरूरी

यदि निर्दोष हैं, तो चौहान को डर क्यों?
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-07-06 16:19 UTC
मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) में हुए घोटाले की जांच जारी है और इस बीच उस घोटालों से जुड़े लोगों की मौत का सिलसिला भी जारी है। कभी इस घोटाले का आरोपी की मौत होती है, तो कभी किसी गवाह की मौत हो जाती है और कभी इसकी जांच में शामिल किसी शख्स की मौत हो जाती है। इन सबके बीच इस घोटाले से जुड़ी एक मौत की पड़ताल करने पहुंचे एक पत्रकार की भी मौत हो गई। ये सारी मौत में एक और चीज काॅमन है और वह यह है कि ये सारी की सारी अप्राकृतिक अकाल मौतें हैं। इनमें से कुछ को आत्महत्या का नाम दिया जा सकता है, तो कुछ को हम साजिशन हत्या की वारदात भी कह सकते हैं। अनेक कथित आत्महत्याओं से भी साजिश की बू आती है।
भारत

व्यापम घोटाले के आरोपियों की मौत

मध्यप्रदेश सरकार सांसत में
एल एस हरदेनिया - 2015-07-04 14:15 UTC
भोपालः व्यापम घोटाले में फंसे आरोपियों की एक के बाद एक मौत ने मध्यप्रदेश को हिलाकर रख दिया है। उनकी मौत बहुत ही रहस्यमय परिस्थितियों में हो रही है।
भारत

मानसून सत्र बेकार चला जाएगा

विपक्ष शायद इसे चलने ही नहीं दे
कल्याणी शंकर - 2015-07-03 15:29 UTC
संयुक्त विपक्ष संसद के आगामी सत्र में मोदी सरकार पर जबर्दस्त हमला करने वाला है। संसद का सत्र 21 जुलाई से शुरू होगा और यह तीन सप्ताह तक चलेगा। अभी शुरू होने में समय है, लेकिन अभी से अनुमान लगाया जा सकता है कि सत्र के दौरान क्या होने वाला है। पिछले बजट सत्र की तरह इस सत्र में भी सरकार को विपक्षी हमले का सामना करना होगा और इस बार हमला पहले से ज्यादा तीखा होगा। पिछले सत्र में विपक्ष का हमला भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर था। उससे जुड़े अध्यादेश जारी करने पर भी सरकार की खिंचाई की जा रही थी। ग्रामीण असंतोष उस सत्र का मुख्य मुद्दा था। विपक्ष में रहकर भाजपा भी यही किया करती थी। अब भाजपा सत्ता में है और कांग्रेस विपक्ष में। इसलिए सत्र को अशांत करने का काम अब कांग्रेस का हो गया है।
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का मुख्यमंत्री से टकराव

समाजवादी पार्टी बता रही है भाजपा को जिम्मेदार
प्रदीप कपूर - 2015-07-02 15:13 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक उत्तर प्रदेश सरकार और खासकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ लगातार टकराव की मुद्रा में रहते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ साथ इस टकराव के राजनैतिक मायने निकाले जाने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि राज्यपाल नाईक भारतीय जनता पार्टी को राजनैतिक लाभ पहुंचाने के इरादे से ऐसा कर रहे हैं और वैसा कर श्री नाईक एक संवैधानिक पद की अवमानना कर रहे हैं।
भारत: केरल

अरुविक्कारा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत

सीपीएम का सच्चाई से सामना
पी श्रीकुमारन - 2015-07-01 16:11 UTC
तिरुअनंतपुरमः अरुविक्कारा विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव से सीपीएम और उसके नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को बहुत उम्मीद थी। वह सीट विधानसभा के अध्यक्ष जी कार्तिकेयन के इस्तीफे से खाली हुई थी।
भारत

सुषमा और वसुंधरा पर मोदी की चुप्पी

प्रधानमंत्री की छवि को काफी झटका लग ररहा है
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-06-30 15:09 UTC
डाॅक्टर लोहिया कहा करते थे कि ’’लोकराज लोकलाज से चलता है’’। प्रचंड बहुमत से जीतकर बनने वाली सरकारों को भी लोकलाज का ख्याल रखना ही चाहिए। इतिहास गवाह है कि जिस किसी ने लोकलाज का ख्याल नहीं रखा, बाद में उसकी दुर्गति हो गई। अदालत में पराजित होकर अपनी लोकसभा सदस्यता खोने के बाद भी इन्दिरा गांधी अपने पद पर बनी रहीं और अपने पद पर बने रहने के लिए उन्होंने देश में आपातकाल लगा दिया। इसका नतीजा उन्हें भुगतना पड़ गया। देश की जनता ने उन्हें 1971 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत दिया था, लेकिन 1977 में न केवल उनकी अपनी पार्टी हारी, बल्कि वे खुद भी चुनाव हार गईं थीं। बाद में जनता पार्टी के बिखराव के बाद वे सत्ता में भले लौट आई हों, लेकिन आज भी जब आपातकाल की चर्चा होती है, तो इन्दिरा गांधी का नाम कोई प्रशंसा से नहीं लिया जाता। हां, दुबारा चुनाव करवाने के उनके निर्णय के कारण उनके खिलाफ होने वाली आलोचना कुछ धीमी जरूर हो जाती है।
भारत

आपातकाल में कैसा था प्रेस पर पहरा

हरिहर स्वरूप - 2015-06-29 15:08 UTC
आज जब आपातकाल पर चर्चा चल रही है और पत्रकार बता रहे हैं कि उन्होंने उसका सामना कैसे किया और क्या देखा, तो मैं भी अपनी बात कहने से अपने और को रोक नहीं पा रहा हूं। उस समय मैं पीटीआई में संवाददाता था। जिस रोज आपातकाल लागू किया गया, उसके पहले वाली रात मैं चाणक्यपुरी स्थिति उत्तर प्रदेश निवास में चैधरी चरण सिंह के कमरे में बैठा हुआ था। कुछ समय पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बहुत बड़ी सभा हुई थी। उस सभा से निकले संदेश को इन्दिरा गांधी कैसे लेती हैं और उससे निकली चुनौती का सामना कैसे करती हैं, इसी पर बातचीत चल रही थी। अपने ग्रामीण अंदाज में चैधरी साहब ने तक कहा था कि बिल्ली जब चारों तरफ से घिर जाती है, तो वह अपनी पूरी ताकत लगाकर अपने विरोधियों पर हमला करती है और वह हमला बेहद ही खतरनाक होता है।

बिहार की राजनीति पर जाति का गहराता साया

भाजपा के नेताओं से लालू का प्रेम नीतीश को पडेगा़ भारी
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-06-27 17:07 UTC
बिहार में लालू और नीतीश के गठबंधन पर जाति की राजनीति का साया गहराने लगा है और राजद प्रमुख द्वारा भ्रष्टाचार में फंसते नजर आ रही भाजपा की नेताओ के पक्ष में दिया जा रहा बयान भी नीतीश के लिए खतरनाक साबित हो सकता हैं।