Loading...
 
Skip to main content

View Articles

पिछले साल मोदी जादू उतरता दिख पड़ा

क्या नया साल में यह जारी रहेगा?
उपेन्द्र प्रसाद - 2016-01-03 08:29 UTC
पिछले साल ने दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जादू को उतरते देखा है। सवाल उठता है कि क्या नये साल में भी क्या यह उतार जारी रहेगा या नरेन्द्र मोदी अपने जादू को फिर स्थापित करने में सफल हो पाएंगे?

तमिलनाडु में वोट और सांड़ की लड़ाई

जलीकट्टु बनी लड़ाई का हथियार
कल्याणी शंकर - 2016-01-01 10:59 UTC
जलीकट्टु तमिलनाडु के गांवों का एक लोकप्रिय त्यौहार है। वह एक बार फिर मीडिया की सुर्खियों में है, लेकिन इस बार इसका कारण राजनैतिक है। बाढ़ से त्रस्त तमिलनाडु में जनजीवन अभी तक सामान्य नहीं हुआ है, लेकिन वे लोग जलीकट्टु के लिए आपस में भिड़ गए हैं। जलीकट्टु स्पैनिश बुल फाइट का भारतीय संस्करण है। तमिलनाडु का चुनाव नजदीक है और स्वाभाविक है कि वहां की पार्टियां वोटों पर अपनी नजर गड़ाए हुए हैं और उसके कारण जलीकट्टु को लेकर फिर विवाद खड़ा हो गया है।
भारत

नये साल की आर्थिक चुनौतियां

वस्तु सेवा कर पर रहेगी सबकी नजर
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-12-31 11:26 UTC
अगला साल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि उसके बीतने के साथ ही नरेन्द्र मोदी की सरकार अपना आधा कार्यकाल तय कर लेगी और आर्थिक सुधारों के मोर्चे पर सरकार ने कितनी सफलता पाई है, वह भी लगभग स्पष्ट हो जाएगा। इसका कारण यह है कि कोई भी सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम चरण वैसी आर्थिक नीतियां नहीं लाती और वैसे आर्थिक सुधार कार्यक्रमों की ओर नहीं बढ़ती, जिनसे लोगों को दिक्कतें हों। इसलिए साल 2016 नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए सभी अलोकप्रिय आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को अंजाम देने का सबसे बेहतर साल है।

सीपीएम में नेतृत्व को लेकर बहस

इस बहस से हो सकता है पार्टी को नुकसान
पी श्रीकुमारन - 2015-12-30 13:38 UTC
तिरुअनंतपुरमः लगता है कि सीपीएम अपने खिलाफ ही गोल करने की मानसिकता के दौर से गुजर रही है। अगले कुछ ही महीने में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और पिछले दिनों हुए स्थानीय निकायों के चुनावों मे भारी जीत हासिल करने के बाद पार्टी के लिए अच्छा माहौल बना हुआ है। इसी माहौल मे चुनाव के बाद मुख्यमंत्री को लेकर पार्टी में बहस छिड़ गई है। यह बहस असामयिक है और इसके कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भगवा एजेंडे पर एक बार फिर राम मन्दिर

क्या अयोध्या से भाजपा को लाभ मिल पाएगा?
अमूल्य गांगुली - 2015-12-29 12:45 UTC
इसकी उम्मीद की जा रही थी कि बिहार की हार के बाद भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर मंदिर मुद्दे को उठाना शुरू करेगी और वही देखने को मिल रहा है। राम मंदिर का मुद्दा उस एक विश्वसनीय मुद्दा लगता है।

डीडीसीए का तूफान जेटली का कर सकता है स्थाई नुकसान

न कीर्ति शांत होंगे और न ही केजरीवाल
हरिहर स्वरूप - 2015-12-28 12:47 UTC
अरुण जेटली को एक बहुत ही व्यावहारिक नेता माना जाता है। वे एक बहुत ही तीक्ष्ण वकील रहे हैं। लेकिन उनके जैसा व्यक्ति भी एक के बाद एक गलतियां कर सकता है। यह कोई भी सवाल कर सकता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दफ्तर पर छापेमारी की जरूरत क्या थी? कहने को तो वह छापेमारी मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार के दफ्तर पर थी, लेकिन मुख्यमंत्री के दफ्तर से राजेन्द्र कुमार के दफ्तर का अंतर कर पाना आसान नहीं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने बिना समय गंवाए पहले प्रधानमंत्री पर निजी हमला कर डाला और उसके बाद मौके का लाभ उठाते हुए उन्होंने उस छापे को डीडीसीए में अरुण जेटली के कार्यकाल में हुए घोटाले से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के एक दफ्तर में डीडीसीए घोटाले से संबंधित एक फाइल थी, जिसमें जेटली फंसते दिखाई दे रहे थे और उसी फाइल को हासिल करने के लिए उनके दफ्तर में सीबीआई का छापा पड़वाया गया।

2016 मोदी सरकार के लिए बहुत ही कठिन साल होगा

पांच राज्यों के चुनाव बहुत ही निर्णायक होंगे
कल्याणी शंकर - 2015-12-26 10:53 UTC
अगला साल नरेन्द्र मोदी के लिए कैसा रहेगा? यह साल मोदी सरकार के लिए निर्णायक साल होगा। उसे एक साथ कई मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। यह साल इस बात का निर्णय करेगा कि मोदी का जादू वास्तव में काम कर रहा है या पूरी तरह से उतर गया है। भाजपा के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य पार्टियों के लिए भी नये साल में चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है।

मोदी को 2014 के जनादेश को फिर से पढ़ना चाहिए

भ्रष्टाचार पर समझौता उनके जादू को समाप्त कर देगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-12-23 12:15 UTC
केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के खिलाफ लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच उनके समर्थन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आ जाने के बाद उन लोगों को झटका लगा है, जो सोचते थे कि नरेन्द्र मोदी देश और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त कर देंगे या बहुत हद तक कम कर देंगे। इसमें दो मत नहीं कि प्रधानमंत्री ने अनेक ऐसे निर्णय लिए हैं, जिनसे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग रहा है। तीसरी और चैथी श्रेणियों के कर्मचारियों के चयन में इंटरव्यू को समाप्त कर दिया गया है, जिसके कारण योग्य युवक अब बिना पैरवी और भ्रष्टाचार के सरकारी सेवाओं चुने जाने की संभावना को लेकर ज्यादा आशावान हो गए हैं। डिजिटल इंडिया की सहायता से भी सरकारी भ्रष्टाचार को कम करने की कोशिश की जा रही है।

अरुणाचल में केन्द्र का गंदा खेल

पूर्वोत्तर में पैर फैलाने के लिए भाजपा आतुर
बरुण दास गुप्ता - 2015-12-22 10:18 UTC
अरुणाचल प्रदेश में इस समय एक भीषण राजनैतिक संकट खड़ा हो गया है। यह संकट पिछले कुछ महीने से आकार ले रहा था। राज्यपाल के विवादास्पद निर्णय ने इस संकट को गौहाटी हाई कोर्ट के सामने ला खड़ा कर दिया है।

नेशनल हेराल्ड का मामला: ऊंचाई से खाई तक

हरिहर स्वरूप - 2015-12-21 11:33 UTC
नेशलन हेराल्ड आजादी की लड़ाई का बच्चा था। इसे जवाहरलाल नेहरू ने शुरू किया था। यह लखनऊ में 1938 में शुरू हुआ था। इसका दिल्ली संस्करण 1963 से प्रकाशित होना शुरू हुआ था। आजादी की लड़ाई के दौरान जवाहरलाल नेहरू खुद इसके लिए रिपोर्ट लिखते थे। कृष्ण मेनन इसके लंदन संवाददाता थे। 1942 में महात्मा गांधी ने कहा था कि नेशनल हेराल्ड अपने आपमें एक संस्थान था। 1938 से 1942 तक यह बहुत ही खतरनाक परिस्थितियों में काम करता रहा। आजादी की लड़ाई से संबंधित कोई भी खबर छापने के लिए यह हमेशा तैयार रहता था। इसके कारण कई बार इस पर दंड लगाया जाता था। यह दंड चुका भी देता था। अनेक बार इसके द्वारा दी गई सुरक्षा राशि जब्त कर ली जाती थी। इसे अपना संपादकीय तक छपने के पहले अथाॅरिटी को सौंपने के लिए कहा जाता था, लेकिन इसने हमेशा इसे अस्वीकार कर दिया।