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लालू के भाषण ने केजरीवाल को किया नीतीश से दूर

मंडल राज की बात से कांग्रेस भी असमंजस में
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-09-02 11:33 UTC
नई दिल्लीः पटना में लालू. नीतीश और कांग्रेस गठबंधन द्वारा आयोजित स्वाभिमान रैली का उद्देश्य अन्य रैलियों की तरह गठबंधन की चुनावी संभावना को बेहतर बनाना था। संभावना बेहतर हुई है या नहीं, इसका पता तो बाद में लगेगा, लेकिन उस रैली के अगले दि नही आम आदमी पार्टी ने घोषणा कर दी कि उनके नेता अरविंद केजरीवाल बिहार में नीतीश के लिए प्रचार नहीं करेंगे। अरविंद केजरीवाल ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी के किसी अन्या नेता द्वारा भी नीतीश के समर्थन में प्रचार करने की संभावना को समाप्त कर दिया गया।

मोदी सरकार की विफलता अब स्पष्ट है

सड़कों को नया नाम देना उपलब्धि नहीं
अमूल्य गांगुली - 2015-09-02 11:30 UTC
मोदी सरकार के पहले 15 महीने की दो प्रमुख उपलब्धियां क्या रहीं? व्यंग्य करने वाले कहेंगे कि सरकार की दो प्रमुख उपलब्धियों में एक योजना आयोग को समाप्त करना और दूसरा औरंगजेब रोड का नाम बदलकर अब्दुल कलाम रोड कर देना रहा।

नीतीश की स्वाभिमान रैली

विकास की गंगा पर जाति की गंगा हावी
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-09-02 11:28 UTC
नीतीश के नेतृत्व वाले राजनैतिक गठबंधन ने पटना में एक रैली आयोजित कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दिया और चुनाव प्रचार किस दिशा में जाएगा, इसे भी तय कर दिया। बहुत सालों के बाद किसी सभा में लालू यादव ने अपनी पिछड़ों और खासकर अपनी जाति का नाम इस तरह से लिया, जिससे अगड़ी जातियों के लोग उनसे दूर भाग जाएं। 1990 के मंडल आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुए चुनावों में ही जाति को सार्वजनिक सभाओं में इतना तूल दिया था। बाद में चारा घोटाला में फंसने के बाद जब लालू यादव का पतन शुरू हो गया, तो उन्होंने अगड़ी जातियों पर भी डोरा डालना शुरू कर दिया था और उनकी कोशिश अगड़ी जातियों के साथ गठबंधन करने की थी। वे पिछड़े वर्ग की राजनीति से निकलकर यादव, मुस्लिम और राजपूत का गठबंधन भी करना चाहते थे। अपनी जाति के बाहर के पिछड़ों के प्रति लालू का रवैया सही नहीं था और वे उन्हें सत्ता में भागीदारी नहीं देना चाहते थे। इसलिए उन्होंनें यादवों के साथ मुसलमानों के साथ समीकरण बनाकर उसमें राजपूतों को भी शामिल करने की कोशिश की। उसमें वे सफल नहीं हुए, तो फिर उन्होंने भूमिहारों के साथ यादवों के रोटी-बेटी संबंध की बात करनी शुरू कर दी। लेकिन वे भी उनके साथ नहीं जुडे।

गुजरात का पटेल आंदोलन

सख्ती जरूरी थी
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-08-28 10:54 UTC
गुजरात का पटेल आंदोलन जिस तेजी से शुरू हुआ, उसी तेजी से समाप्ति की ओर भी बढ़ रहा है। यह सभ्य समाज के लिए राहत की बात है। इसके लिए गुजरात पुलिस निश्चय ही बधाई की पात्र है। 1985 में जब माधव सिंह सोलंकी की सरकार ने ओबीसी के लिए आरक्षण लागू किया था, तब भी पटेलों ने उसके खिलाफ उग्र आन्दोलन किये और वह आन्दोलन बहुत लंबा खिंच गया था। सच तो यह है कि आरक्षण के खिलाफ पटेल बार बार आन्दोलन करते थे और आरक्षण के खिलाफ हुआ वह आन्दोलन हिन्दू मुस्लिम दंगे में तब्दील हो जाया करता था और सप्ताहों क्या, कभी कभी तो महीनों खिंच जाता था।
भारत: केरल

निर्वाचन आयोग के साथ चांडी सरकार का टकराव जारी

मुस्लिम लीग के दबाव में यूडीएफ झुका
पी श्रीकुमारन - 2015-08-27 13:18 UTC
तिरुअनंतपुरमः कांग्रेस के नेतृत्व वाला सत्ताधारी यूडीएफ बार फिर अपने एक घटक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के दबाव में आ गया है। इसके कारण वह न्यायपालिका के प्रति अपने आदरभाव को भी भूल रहा है और राज्य निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक निकाय की भी बेइज्जती कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के हौसले बुलंद

उसकी अखिलेश विरोधी सभाओं में जुट रही है भीड़
प्रदीप कपूर - 2015-08-26 16:51 UTC
लखनऊः कांग्रेस पिछले कुछ दिनों से अखिलेश सरकार के कुशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और सभाएं कर रही है। उन प्रदर्शनों और सभाओं में लोगों की अच्छी भीड़ जुट रही है। उसके कारण प्रदेश में कांग्रेसियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
भारत: केरल

वीएस अच्युतानंदन की जीत

विजयन गुट को झटका
पी श्रीकुमारन - 2015-08-25 11:42 UTC
तिरुअनंतपुरमः सीपीएम की सेंट्रल कमिटी ने पार्टी की केरल ईकाई को जो ताजा आदेश जारी किए हैं, वह वीएस अच्युतानंदन के लिए एक बड़ी जीत का संकेत है।

राजपक्षे की हार से दिल्ली को राहत

श्रीसेना के कार्यकाल में भारत-श्रीलंका संबंध सुधरेंगे
बरुण दास गुप्ता - 2015-08-24 11:57 UTC
श्रीलंका संसदीय चुनाव के नतीजे भारत के लिए राहत की सांस लेने का कारण बनकर आए हैं और दूसरी तरफ वे चीन के लिए दुहरा झटका हैं। इस चुनाव में महिंदा राजपक्षे की पार्टी की हार हुई। गौरतलब हो कि राजपक्षे राष्ट्रपति के रूप में श्रीलंका की सत्ता पर 9 सालों से काबिज थे। इसी साल जनवरी महीने में राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में उनकी मैत्रीपाल सिरीसेना के हाथों हार हो गई थीं। उस हार के बाद महिंदा राजपक्षे प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में एक बार फिर आने के लिए संसदीय चुनाव में गंभीर प्रयास कर रहे थे।

नीतीश पर बोझ बन गए हैं लालू

उनके कारण भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा नहीं
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-08-22 13:26 UTC
नीतीश कुमार ने लालू यादव से चुनावी समझौता कर तो लिया है और इसके कारण भाजपा विरोधी मुस्लिम मतों के बिखराव का खतरा भी उन्होंने कुछ कम कर लिया है, लेकिन इसकी भारी कीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है। आज भारतीय जनता पार्टी अपने कुछ नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान पर व्यापम घोटाले में शामिल होने का आरोप कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह लगा रहे हैं। छत्तीसीगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह पर भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज घोटाला का आरोप लग रहा है।

समान पद समान पेंशन का मामला

सरकार द्वारा की जा रही टालमटोल खतरनाक भी हो सकती है
कल्याणी शंकर - 2015-08-21 12:15 UTC
पूर्व सैनिकों के ’समान पद समान पेंशन’ का मसला हल होने का नाम नहीं ले रहा है और सरकार लगातार कह रही है कि वह इसके पक्ष में है। पर अगर वह इसके पक्ष में है, तो देर क्यों हो रही है? क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मसले पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं? सरकार अनिर्णय की स्थिति में है और उधर पूर्व सैनिकों का आंदोलन तेज होता जा रहा है।