भारत
सूखा प्रकृति का भी और व्यवस्था का भी
लगातार दूसरा साल देश मानसून की कमी का दंश झेल रहा है
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2015-09-29 11:19 UTC
देश के कृषि क्षेत्र पर पहले से मंडरा रहे संकट के बादल अब और गहरा गए हैं। इसी वर्ष फरवरी-मार्च में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल चुके कृषि क्षेत्र को अब एक बार फिर सूखे के संकट से दो-चार होना है। मानसून का सीजन अब बीतने को है और भारतीय मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही साबित होती दिख रही है। जिस अल नीनो प्रभाव की बात विदेशी वैज्ञानिक काफी पहले से कर रहे थे वह भी अब रंग दिखाने लगा है। इस साल मानसून का सीजन शुरू होने से ठीक पहले मौसम विभाग ने मानसून के कमजोर रहने का अंदेशा जताया था। उसने अनुमान जताया था कि इस वर्ष 88 फीसदी ही बारिश होगी। अगर बारिश का आंकड़ा 96 फीसदी से नीचे रहता है तो उसे सामान्य से कम माना जाता है। एक जून से अब तक देशभर में 640 मिलीमीटर बारिश हुई है जो सामान्य से 12 फीसदी कम है। यानी सीजन के बचे हुए समय में भी बारिश मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के मुताबिक रही तो इस साल मानसून की बारिश 88 फीसदी से भी कम दर्ज होगी। इस कमजोर मानसून का सीधा मतलब हुआ कि देश को 2009 के बाद सबसे बड़े सूखे का सामना करना है।