Loading...
 
Skip to main content

View Articles

समाजवादी पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं

परिवार और अखिलेश सरकार अस्थिर है
प्रदीप कपूर - 2015-09-16 07:44 UTC
लखनऊः मुलायम परिवार और अखिलेश सरकार मे सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। सार्वजनिक मंचों पर उसकी अभिव्यक्ति देखी जा सकती है।

भारत में सोनार बांगला तलाशती तसलीमा

स्थायी रूप से रहने की इजाजत कयों नहीं मिलनी चाहिए?
टनिल जेन - 2015-09-16 07:40 UTC
भारत सरकार ने लगभग दो दशक से निर्वासन में जी रहीं चर्चित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन के वीजा की अवधि को एक साल के लिए फिर बढ़ा दिया है। यानी अब तसलीमा को अगस्त 2016 तक भारत में रहने की अनुमति मिल गई है।

कांग्रेस को अभी भी सोनिया का सहारा

बदलाव में हो रही है समस्या
कल्याणी शंकर - 2015-09-11 11:10 UTC
राहुल गांधी के छुट्टी से वापस आने के बाद चर्चा बहुत जोरों पर थी कि कांग्रेस की कमान उनके हाथ में आने वाली है। पर पिछले दिनों कांग्रेस की कार्यसमिति ने सोनिया गांधी को एक साल और पार्टी अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया। इस फैसले ने राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने को लेकर चल रही अटकलबाजियों पर विराम लगा दिया है। इसका मतलब है कि कांग्रेसी नेता और सोनिया गांधी कांग्रेस में यथा स्थिति को बदलना नहीं चाहते और राहुल गांधी पर अभी बाजी लगाने को तैयार नहीं हैं।

अरुणाचल प्रदेश में कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर

चीन उसके पास रेल लाइन बिछा रहा है
बरुण दास गुप्ता - 2015-09-11 11:07 UTC
देश की सुरक्षा के लिए भारतीय करदाता हर साल बहुत बड़ी राशि देते रहते हैं। चालू वित्त वर्ष में रक्षा बजट 40 अरब डाॅलर का था, जो पिछले साल की अपेक्षा 11 फीसदी ज्यादा था। यह राशि चीन द्वारा प्रति वर्ष खर्च की जाने वाली 132 अरब डाॅलर की राशि की अपेक्षा बहुत कम है। चीन दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा रक्षा पर खर्च करने वाला देश है। इस मामले में पहले स्थान पर अमेरिका है।

विश्व हिन्दी सम्मेलन: पहली बार होगा भोपाल में इसका आयोजन

एल एस हरदेनिया - 2015-09-09 11:21 UTC
भोपालः 10 सितंबर से मध्यप्रदेश की राजधानी में विश्व हिन्दी सम्मेलन शुरू हो रहा है। भोपाल के लिए यह पहला मौका है। इसमें 2000 से भी ज्यादा अतिथि हिस्सा ले रहे हैं। यह सम्मेलन 4 दिनों तक चलेगा।

भाजपा आरएसएस का दिल्ली सम्मेलन

भगवा एजेंडे का केन्द्र पर फिलहाल दबाव नहीं
अमूल्य गांगुली - 2015-09-09 11:18 UTC
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मोदी सरकार को प्रमाण पत्र जारी करते हुए कहा कि यह सही दिशा में आगे बढ़ रही है। यह प्रमाण पत्र संघ ने मोदी सरकार को अपने दिल्ली के सम्मेलन के बाद दिया।

भाजपा से दोस्ती को लेकर एसएनडीपी ने पलटी मारी

इतिहास आखिर नतेशन ने ऐसा क्यों किया?
पी श्रीकुमारन - 2015-09-07 11:09 UTC
तिरूअनंतपुरमः राजनीति में एक सप्ताह का समय बहुत लंबा होता है। यदि श्री नारायण धर्म परिपालना योगम पीठ के महासचिव वेल्लापल्ली नतेशन से यह सवाल पूछ जाय, तो वह भी इस बात से अपने आपको सहमत पाएंगे।
भारत: दिल्ली

औरंगजेब रोड का नाम परिवर्तन

इतिहास के ऊपर सांप्रदायिकता की जीत
हरिहर स्वरूप - 2015-09-07 11:06 UTC
दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम ही क्यों बदला जाए, तुगलक रोड का नाम क्यों नहीं? औरंगजेब की तरह मुहम्मद बिन तुगलक भी अत्याचारी था। तुगलकी फरमान कितने डरावने होते थे, यह सबको पता है। अकबर भी मुसलमान था। उसके नाम से कोई रोड क्यों होना चाहिए? मुस्लिम शासको के नाम पर बने रोडो का नाम बदलने से इतिहास नहीं बदल जाता। भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली का इतिहास बदलने के लिए औरंगजेब रोड का चुनाव किया है और उसका नाम बदल डाला है। औरंगजेब रोड का नाम अब बदल भी दिया गया है और बोर्ड पर वह नाम हटाकर एपीजे अब्दुल कलाम कर दिया गया है। लेकिन इस बदलाव का क्या मतलब है? इस बदलाव से दिल्ली और हिन्दुस्तान का इतिहास नहीं बदल जाता। यही कहा जा सकता है कि यह निर्णय संकीर्णतावादी था।

शास्त्री की वाशिंगटन यात्रा को दो बार टाला गया

प्रदेश में भारत पाक संबंध द्विपक्षीय एजेंडे में सबसे ऊपर था
कल्याणी शंकर - 2015-09-04 11:04 UTC
ताशकंद समझौते के बाद तब के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की वाशिंगटन यात्रा तय की गई थी, पर यात्रा हो न सकी। सच कहा जाय तो उनके प्रधानमंत्रित्वकाल में वाशिंगटन की यात्रा दो बार हुई थी। पहली यात्रा जून 1965 के लिए तय की गई थी। पर उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति जाॅनसन ने उसे स्थगित कर दिया। वह शास्त्रीजी के लिए बहुत ही निराशाजनक था। दूसरी यात्रा 31 जनवरी, 1966 से 5 फरवरी, 1966 के लिए तय हुई थी। यदि शास्त्री जी जिंदा रहते, तो वे एक विजयी राजनेता के रूप में वाशिंगटन की यात्रा करते।

अब कैडर तैयारी पर नजर है मायावती की

प्रदेश में फिर से केन्द्रीय भूमिका में आने की कोशिश
प्रदीप कपूर - 2015-09-04 11:01 UTC
लखनऊः मायावती मिशन 2017 के लिए शुरू से ही गंभीर रही है, पर उसके नजदीक आने के साथ ही बसपा सुप्रीमो की गंभीरता बढ़ती जा रही है। अब उस चुनाव मे जीतकर अपनी सरकार बनाने के लिए अपनी पार्टी का कैडर बनाने की योजना पर काम कर रही है।