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आरएसएस और भाजपा ने 1975 के आपातकाल के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी

नरेंद्र मोदी के 11 साल के शासन ने भी लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर किया आघात
डॉ. राम पुनियानी - 2025-07-05 10:34 UTC
जून 2025 में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के अधीन देश ने आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ मनायी, जिसे इंदिरा गांधी ने 1975 में लगाया था। इस अवधि के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, जब कई लोकतांत्रिक स्वतंत्रताएं निलंबित कर दी गयी थीं, हजारों लोगों को जेल में डाल दिया गया था और मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस अवधि को कुछ दलित नेता बहुत अलग तरीके से देखते हैं, जो पिछले दशक में इंदिरा गांधी द्वारा उठाये गये क्रांतिकारी कदमों जैसे बैंकों के राष्ट्रीयकरण और प्रिवी पर्स को खत्म करने को याद करते हैं। अब, जबकि बहुत कुछ लिखा जा चुका है, तब उसका नये सिरे से विश्लेषण किया जाना चाहिए।

मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण वर्तमान स्वरुप में अनुमति देने योग्य नहीं

चुनाव आयोग द्वारा की जा रही यह कवायद घुसपैठ के बहाने ध्रुवीकरण को बढ़ावा देगी
पी. सुधीर - 2025-07-04 10:36 UTC
संसदीय लोकतंत्र की आत्मा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की आवश्यक प्रक्रिया में निहित है - एक ऐसी प्रक्रिया जो सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर सुनिश्चित करती है। इस विशेषता के कारण, संसदीय लोकतंत्र को अक्सर चुनावी लोकतंत्र माना जाता है। यह अकारण नहीं है कि संविधान सभा, जिसने 26 जनवरी, 1950 को संविधान को अपनाने से पहले दो साल तक विचार-विमर्श किया था, ने विधान सभाओं और संसद के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के विभिन्न पहलुओं को अत्यंत विस्तृत तरीके से संबोधित किया था।

ट्रम्प के टैरिफ बम कारगर नहीं होते, नवीनतम 500% का भी होगा वही हश्र

अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों का अंत टांय टांय फिस्स
के रवींद्रन - 2025-07-03 11:50 UTC
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा वैश्विक आर्थिक युद्ध के मैदान में नवीनतम हमला - रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। यह एक पैटर्न की निरंतरता को दर्शाता है जो उनकी व्यापार कूटनीति को परिभाषित करता है: साहसिक, धमाकेदार घोषणाओं के बाद रणनीतिक रूप से पीछे हटना।

आपातकाल का सर्वाधिक निदंनीय पहलू था सेंसरशिप

अधिकारियों ने की प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के भाषण की रिपोर्टिंग पर भी आपत्ति
एल.एस. हरदेनिया - 2025-07-02 11:14 UTC
वर्ष 1975 के जून माह में देश में आपातकाल लागू कर दिया गया था। आपातकाल का सर्वाधिक निदंनीय पहलू सेंसरशिप था। आपातकाल के दौरान मैं अंग्रेजी समाचार पत्र ‘दैनिक हितवाद’ में राजनीतिक रिपोर्टिंग करता था। सेंसरशिप के कुछ अनुभवों तथा घटनाओं का विवरण पेश है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक दक्षिण में भारत की छवि चमकाने का अवसर

प्रधानमंत्री विकासशील देशों का नेतृत्व करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभायें
नित्य चक्रवर्ती - 2025-07-02 10:42 UTC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने 6 और 7 जुलाई को ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में होने वाली ब्रिक्स की बैठक में वैश्विक दक्षिण के हितों के रक्षक के रूप में भारत की छवि को बेहतर बनाने का कठिन काम है। इस बैठक में वे भाग लेंगे। 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी ब्राज़ील करेगा और इसका मुख्य विषय ‘अधिक समावेशी और सतत शासन के लिए वैश्विक दक्षिण सहयोग को मज़बूत करना’ होगा। इस व्यापक विषय के अलावा, चर्चाएँ आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई और गाजा में इज़रायली नरसंहार से संबंधित होंगी, जिसकी ब्रिक्स के अधिकांश सदस्यों ने कड़ी निंदा की है।

मोदी-भागवत मतभेद के कारण नये भाजपा अध्यक्ष के चयन में और देरी संभव

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का अधिक ध्यान बिहार विधानसभा चुनाव जीतने पर
अरुण श्रीवास्तव - 2025-07-01 11:15 UTC
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 2025 में दशहरा के दिन अपना शताब्दी वर्ष मनायेगा। हिंदुओं में सौ वर्ष की आयु प्राप्त करना सबसे शुभ उपलब्धि है। एक संगठन के रूप में आरएसएस तथा उसके हिंदू दर्शन और उसकी राजनीति के लिए भी इसका महत्व है। इस उपलब्धि को प्राप्त करना किसी संगठन के लिए वास्तव में ऐतिहासिक उपलब्धि है। अधिकांश संगठन तो अपनी शताब्दी के करीब पहुंचने से पहले ही पतन की ओर अग्रसर हो जाते हैं या यहां तक कि विघटित हो जाते हैं। परन्तु आरएसएस अपनी राजनीतिक शाखा भाजपा के माध्यम से भारत पर शासन कर रहा है।

बिहार में नये मतदाता मानदंड लागू करना एनआरसी लाने का संकेत

मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण पूरे देश में लागू किया जायेगा
डॉ. ज्ञान पाठक - 2025-06-30 11:01 UTC
बिहार में चुनाव 22 नवंबर, 2025 को विधानसभा की अवधि समाप्त होने से पहले होने हैं। सभी राजनीतिक दल इस महाचुनावी लड़ाई की जोरदार तैयारी कर रहे हैं। बिहार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण चुनावी लड़ाई रही है। खबरों में बताया गया है कि पार्टी ने बिहार में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की 200 या उससे अधिक चुनावी रैलियां कराने की योजना बनायी है। इसलिए भारत के चुनाव आयोग के पास पिछले एक दशक में किसी भी अन्य चुनाव की तुलना में बिहार चुनाव को अधिक गंभीरता से लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

पूरी तरह से कमजोर हो गया है संयुक्त राष्ट्र संघ

विश्व शांति के लिए गंभीर नये प्रयासों की आवश्यकता
एल.एस. हरदेनिया - 2025-06-28 11:30 UTC
दुनिया में विश्व शांति के लिए अनेक प्रयास किये गये, लेकिन उन्हें सीमित सफलता ही मिली। टिकाऊ शांति लाने में वे लगभग असफल ही रहे। प्रथम विश्वयुद्ध खत्म होने के बाद अमरीका की पहल पर लीग ऑफ नेशन्स बना था। परंतु हुआ कुछ यूं कि जब अमरीकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन लीग ऑफ नेशन्स की स्थापना के बाद अमरीका पहुंचे तो देश की संसद ने उनके निर्णय को उचित नहीं माना और लीग ऑफ नेशन्स में शामिल होने से इंकार कर दिया। लीग ऑफ नेशन्स की असफलता के बाद दुनिया में फिर अशांति फैल गयी।

एससीओ की बैठक में भारत कूटनीतिक रुप से अलग-थलग पड़ गया

राजनाथ सिंह का बयान पर हस्ताक्षर न करना सही, लेकिन देश के लिए चिंता का विषय
नित्य चक्रवर्ती - 2025-06-28 11:22 UTC
चीन के क़िंगदाओ शहर में 25 और 26 जून को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत का कूटनीतिक रुप से अलग-थलग पड़ जाना स्पष्ट रूप से दिखा, जब एक संयुक्त बयान तैयार किया गया, जिसमें सदस्यों से आतंकवाद से मिलकर लड़ने का आह्वान किया गया, लेकिन बलूचिस्तान में हमलों का उल्लेख तो किया गया परन्तु 22 अप्रैल को पहलगाम में हुई आतंकी हत्याओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

गाजा में बीमार भूखे फिलिस्तीनियों की हत्याएं सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी

पश्चिम एशिया के मुस्लिम राष्ट्र और भारत भी इसे रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहे
असद मिर्जा - 2025-06-27 11:15 UTC
इजरायल-ईरान मिसाइल युद्ध ने जहां एक ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है, वहीं गाजा में निर्दोष और निहत्थे फिलिस्तीनियों की इजरायल द्वारा हत्या को लगभग अनदेखा किया गया। कथित तौर पर, अमेरिकी राहत संगठन द्वारा चलाये जा रहे सहायता केंद्रों या खाद्य केंद्रों के पास 450 फिलिस्तीनियों की हत्या की खबर आयी है। लेकिन तथाकथित इस्लामी देश और यहां तक कि भारत, जिसने हमेशा फिलिस्तीनी मुद्दों की वकालत की है, चुप है। सवाल यह है कि हम कब तक इजरायली सेना द्वारा भूखे फिलिस्तीनियों की इन क्रूर और अमानवीय हत्याओं को जारी रहने देंगे। पिछले 14 दिनों से ऐसा लग रहा है कि दुनिया गाजा को भूल गयी है। इन 14 दिनों के दौरान इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) द्वारा निहत्थे फिलिस्तीनियों को गोली मारे जाने की कई रिपोर्टें सामने आयी हैं।