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प्रियंका के भरोसे कांग्रेस

क्या पार्टी का पतन इससे रुक जाएगा?
उपेन्द्र प्रसाद - 2014-01-08 12:42 UTC
राहुल गांधी के निवास पर कांग्रेस नेताओं की एक बैठक में प्रियंका गांधी के शामिल होने के बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया है कि अब वह कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हो रही हैं। वैसे पहले से भी उनकी राजनैतिक सक्रियता रही है, लेकिन यह सक्रियता सिर्फ अमेठी और रायबरेली लोकसभा चुनाव क्षेत्रों तक ही सीमित है। वहां वह अपने भाई और अपनी मां के लिए चुनाव प्रचार करती हैं। वह समय समय पर वहां की यात्राएं भी करती है और लोगों से मिलती जुलती रहती हैं। शायद वह वहां के लोगों की समस्याओ को हल करने के लिए भी कुछ किया करती हों।

ओमन चांडी के पर कतर दिए गए

कैबिनेट में रमेश चेनिंथाला
पी श्रीकुमारन - 2014-01-07 10:53 UTC
तिरुअनंतपुरमः क्या केरल प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रमेश चेनिंथाला को नाटकीय ढंग से मंत्रिमंडल में शामिल कर दिए जाने से आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के आसार बेहतर हो जाएंगे?

भारतीय जनता पार्टी को नये साथी नहीं मिल रहे

अपने 182 सीट के रिकॉर्ड के पास पहुंचना भी उसे होगा कठिन
हरिहर स्वरूप - 2014-01-06 13:04 UTC
लोकसभा के आम चुनाव अब तीन महीने ही दूर हैं। उसके बाद क्या स्थिति होगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। कांग्रेस की सरकार बनने के कोई आसार नहीं दिख रहे। भाजपा की सरकार बनने पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े हो गए हैं। अब दोनों के बीच इस बात को लेकर मुकाबला होना है कि उनमें से कौन लोकसभा चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती है। यदि हम भारतीय जनता पार्टी को पिछले 4 लोकसभा चुनावों में मिली सफलता का आकलन करें, तो पाते हैं कि इस बार पार्टी को 1998 और 1999 में मिली 182 सीटों से ज्यादा सीटें मिल पाना आसान नहीं होगा।

जापानी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा

परमाणु ऊर्जा पर समझौता हो सकता है
नित्य चक्रबर्ती - 2014-01-04 10:57 UTC
इसी महीने जनवरी में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे की भारत यात्रा हो रही है। भारत इस यात्रा को खास महत्व दे रहा है। इसका खास महत्व भी है। सबसे पहली बात तो यह है कि परमाणु ऊर्जा सहयोग पर दोनों देशों के बीच सहमति की उम्मीद है। दूसरी बात यह है कि इस दौरे के कारण भारत में जापानी निवेश को जबर्दस्त बढ़ावा मिलेगा। खासकर इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर काफी लाभान्वित होंगे और उनमें भी सड़क और रेल परिवहन को खास फायदा होगा। दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है और भारतीय अधिकारियों को उम्मीद है कि भारत और जापान की जनवरी, 2014 की घोषणा ऐतिहासिक होगी।

अनिश्चितता का साल होगा 2014

राजनैतिक चक्र तेजी से चलेगा
कल्याणी शंकर - 2014-01-03 12:17 UTC
साल 2014 एक अनिश्चितताओं का साल होगा। इनकी घटनाओं के बारे में अभी से दावे से कुछ भी नहीं कहा जा सकता। सच तो यह है कि इसके बारे में अनुमान लगाना भी खतरे से खाली नहीं है। इसका कारण यह है कि राजनैतिक और आर्थिक मोर्चे पर आज अभूतपूर्व अनिश्चय बना हुआ है और उसके साथ विदेश नीति और विदेशों से हमारे संबंधों पर भी अनिश्चय के बादल मंडरा रहे हैं।

आप क्या तीसरा विकल्प बन सकती है?

हिंदी प्रदेशों में इसकी जमीन तैयार है
उपेन्द्र प्रसाद - 2014-01-02 10:43 UTC
दिल्ली में अपनी सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता आगामी लोकसभा चुनाव मे ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार खड़ा करने की बातें कर रहे हैं। दिल्ली देश की राजधानी है और यहां घटी इस एक अभूतपूर्व घटना का असर देश भर में पड़ना स्वाभाविक है। यही कारण है कि देश भर में, खासतौर से हिंदी प्रदेशों मे आम आदमी पार्टी को लेकर खासा उत्साह बन गया है और इसमें शामिल होने के लिए भारी संख्या में लोग आॅनलाइन पंजीकरण कराने मे लगे हुए हैं।

अखिलेश पर भारी दबाव, पर मुख्यमंत्री विवश हैं

प्रदीप कपूर - 2014-01-01 12:14 UTC
लखनऊः अरविंद केजरीवाल के दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भारी दबाव में हैं। उन पर इस बात को लेकर भारी दबाव है के लोकसभा चुनाव के पहले कुछ कर दिखाएं।

कांग्रेस का गंदा खेल जारी

नहीं सुधरने की खा रखी है इस पार्टी ने कसम
नन्तू बनर्जी - 2013-12-31 10:26 UTC
पिछले विधानसभा चुनावों में हिंदी के चार प्रदेशों मे कांग्रेस का सूफड़ा साफ हो गया। दिल्ली, राजस्थान और मध्यप्रदेश में इसे भारी पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद समझा जा रहा था कि कांग्रेस कुछ सीखेगी और अपने आपमें कुछ ऐसा सुधार करेगी, ताकि यह अपने भविष्य को सुरक्षित रख सके। पर हार के बाद उसने जो रवैया अपनाया है, उससे साफ लगता है कि उसने कसम खा रखी है कि वह न तो कुछ सीखेगी और न ही सुधरेगे।

देश की राजनीति में केजरीवाल का उदय

मोहभंग के माहौल में एक नये मोह का केन्द्र
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-12-30 12:30 UTC
अरविंद केजरीवाल दिल्ली का मुख्यमंत्री बन चुके हैं और देश की राजनीति में वे क्या गुल खिलाएंगे, इसके बारे में तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। स्थापित नेताओं में अघिकांश ऐसे हैं, जो समझते हैं कि आम आदमी पार्टी का उदय जितनी तेजी से हुआ है, उसका अस्त भी उतनी ही शीघ्रता से होगा। पर वैसे लोग गलत भी हो सकते हैं।

तसलीमा नसरीन और ये काले दिन

दोनों ओर से धार्मिक सेंसरशिप
गर्गा चटर्जी - 2013-12-28 11:33 UTC
तसलीमा नसरीन ने एक टीवी सीरियल की कथा तैयार की। उस सीरियल का नाम रखा गया दुःसहबास। उसमें तीन बहनों की कहानी है। उनके साथ तरह तरह का व्यवहार समाज द्वारा किया जाता है। इस सीरियल में यह दिखाने की कोशिश की जानी थी कि भारतीय उपमहाद्वीप में महिलाओं की जिंदगी कैसी है और उन्हें किस तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।