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क्या केजरीवाल लोगों की उम्मीदों को पूरा कर पाएंगे?

कल्याणी शंकर - 2013-12-27 12:43 UTC
दो दशक पहले जब वीपी सिंह की सरकार केन्द्र की सत्ता में आई थी, तो मेरी उस समय के वित्त मंत्री मधु दंडवते जी से एक दिलचस्प बातचीत हुई थी। वित्तमंत्री तब किसानों के 10 हजार करोड़ रुपये के लोन को माफ करने के लिए बजटीय गुना भाग करने में लगे हुए थे। उनके लिए वह काम बहुत ही मुश्किल साबित हो रहा था। अब चूंकि उनकी पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में कहा गया था कि उनकी पार्टी सत्ता में आने के बाद किसानों के लोन को माफ कर देगी, तो वैसा करना उनकी मजबूरी भी थी।

कांग्रेस और भाजपा की चिंताएं बढ़ी

आप ने तीसरे मोर्चे की आस बढ़ा दी है
अशोक बी शर्मा - 2013-12-27 12:40 UTC
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सफलता ने देश भर में तीसरे मोर्चे की सफलता की उम्मीदें बढा दी है। यह पार्टी मात्र एक साल नई है और यह दिल्ली में सरकार बनाने जा रही है। उसे दिल्ली विधानसभा में 28 सीटें मिली, जबकि भाजपा को 31 सीटें और उसके सहयोगी अकाली दल को एक सीट मिली। कांग्रेस का तो सूफड़ा ही साफ हो गया, जिसे मात्र 8 सीटें ही मिल पाईं। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा में मात्र 70 सदस्य होते हैं।

दिल्ली में आप की सरकार

आग से खेल रही है कांग्रेस
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-12-24 11:12 UTC
हमारे देश में वह हो रहा है, जिसके बारे में कुछ दिन पहले सोचा तक नहीं जा सकता था। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में प्रमुख पार्टियां बहुमत जुटाकर सरकार बनाने के लिए एक से एक गंदा खेल खेला करती थीं। कोई विरोधी पार्टी सरकार न बना ले, इसके लिए भी मशक्कत की जाती थी। विधायकों की फौज को लेकर शहर शहर घूमा जाता था, ताकि विरोधी पार्टियों के प्रभाव से वे बचे रहें। लेकिन दिल्ली में विधानसभा चुनाव के बाद यहां की दो मुख्य पार्टियों ने नई गठित आम आदमी पार्टी को अल्पमत में होते हुए भी सरकार गठन को बाध्य कर दिया।

तमिलनाडु में इस बार होंगे दिलचस्प मुकाबले

जयललिता भी चाहती हैं प्रधानमंत्री बनना
एस सेतुरमन - 2013-12-23 12:29 UTC
पिछले कई दशकों के बाद कांग्रेस आज एक ऐसी स्थिति में आ खड़ी हुई है कि उसे अगला चुनाव तमिलनाडु में अकेले ही लड़ना होगा। इसके पहले तमिलनाडु में सत्ता खोने के बाद वह कभी डीएमके और कभी एआइएडीएमके के साथ चुनाव लड़ती रही है। इसके पहले के दो लोकसभा चुनाव उसने डीएमके के साथ मिलकर लड़े थे और इसका अच्छा फायदा भी उसे मिला था। 2004 और 2009 के चुनाव में केन्द्र में सरकार बनाने के पीछे तमिलनाडु की उसकी और उसके गठबंधन की सफलता भी एक मुख्य कारण थी। तमिलनाडु और पुदुचेरी में कुल मिलाकर 40 सीटें हैं और कांग्रेस को अब इन सीटों पर अपने दम ही चुनाव लड़ना होगा।

मुख्यमंत्री चांडी के घर की घेरेबंदी पर मतभेद

क्रुद्ध आम औरत ने पार्टियों को सबक सिखाई
पी श्रीकुमारन - 2013-12-21 13:30 UTC
मुख्यमंत्री ओमन चांडी के घर की घेरेबंदी को लेकर विपक्षी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के घटकों में मतभेद पैदा हो गये हैं। सीपीआई और आरएसपी के नेताओं को इस तरह के आंदोलन से परहेज है।

लोकपाल बिल का श्रेय किसे मिले

राजनैतिक तुष्टिकरण या उपलब्धि
कल्याणी शंकर - 2013-12-20 10:33 UTC
लोकपाल बिल संसद से पारित हो गया। सवाल उठता है कि इसका श्रेय किसे दिया जाय? क्या इसका श्रेय यूपीए सरकार को दिया जाय या मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी को या गांधीवादी अन्ना हजारे को? या इसका श्रेय आम आदमी पार्टी को दिया जाय, जिसने दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार सफलता पाई और कांग्रेस व भाजपा की नींद हराम कर दी। कहा जाता है कि सफलता के अनेक बाप होते हैं और विफलता अनाथ होती है। लोकपाल के लिए भी यह कहावत सही साबित हो रही है। अनेक लोग इसका श्रेय ले रहे हैं, पर सच्चाई यही है कि यह जन दबाव के कारण संभव हो सका है।

संकट में चीनी उद्योग

राजनेता भी हैं इसके लिए जिम्मेदार
जी श्रीनिवासन - 2013-12-19 10:58 UTC
भारत का चीनी उद्योग 80 हजार करोड़ रुपये का है। आज यह संकट में है और इसके लिए देश के राजनेताओ को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। अभी हाल ही में कृषि मंत्री शरद पवार के नेतृत्व वाले मंत्रियों के एक ग्रुप ने इसके सुधार के लिए 75 सौ करोड़ रूपये के पैकेज की बात की है।

भ्रष्टाचार मुक्त भारत की ओर एक कदम

लोकपाल तो आया, जनलोकपाल का अभी भी इंतजार है
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-12-18 11:35 UTC
लोकसभा द्वारा लोकपाल विधेयक को पारित किए जाने के बाद भारत में लोकपाल के अस्तित्व में आने का रास्ता साफ हो गया है। इस मायने में आज का 18 दिसंबर एक ऐतिहासिक दिन है कि आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा आंदोलन बेकार नहीं गया है और आंदोलन के दबाव में सरकार व अन्य पार्टियों को झुकना पड़ा और न चाहते हुए भी उन्हें आखिरकार सत्ता में बैठे नेताओं के भ्रष्टाचार की सुनवाई करने वाले एक लोकपाल के गठन का कानून पास करना ही पड़ा।

ममता के अरमानों को नये पंख

अपनी राष्ट्रीय को लेकर आशान्वित हैं तृणमूल नेता
आशीष बिश्वास - 2013-12-17 11:19 UTC
कोलकाताः लोकसभा चुनाव के अब कुछ महीने ही शेष रह गए हैं और इस समय देश की तीन पार्टियां उन चुनावों को लेकर खासे उत्साह में हैं। वे तीन पार्टियां हैं- भारतीय जनता पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी।

कांग्रेस और भाजपा क्षेत्रीय दलों को पटाने में लगी

लालू के जेल से बाहर आने पर नीतीश को खतरा
हरिहर स्वरूप - 2013-12-16 11:28 UTC
पिछले विधानसभा चुनावों मे कांग्रेस का सूफड़ा साफ हो चुका है। जाहिर है, लोकसभा में उसके बेहतर प्रदर्शन की भी उम्मीद नहीं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी भी बहुमत के पास पहुंचने की संभावना नहीं है। इसलिए 2014 के बाद अपनी सरकार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को क्षेत्रीय पार्टियों और उनके नेताओं पर निर्भर रहना होगा। यही कारण है कि अभी से ये दोनों पार्टियां क्षेत्रीय दलों को पटाने में लग गई है।