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भाजपा का प्रधानमंत्री उम्मीदवार

मोदी के नाम की घोषणा के सिवा और कोर्इ रास्ता ही नहीं था
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-09-15 07:40 UTC
आडवाणी के हर संभव प्रतिरोध के बावजूद यदि नरेन्द्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित करने के लिए भाजपा को बाध्य होना पड़ा, तो इसका एकमात्र कारण यही है कि उसके पास इसके अलावा और कोर्इ रास्ता ही नहीं रह गया था। मोदी के मसले पर ही नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़ दिया था। उनके साथ छोड़ने के पहले से ही भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह कहने लगे थे कि मोदी देश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं। जब आप अपनी पार्टी में किसी को सर्वाधिक लोकप्रिय नेता मान लेते हों और यह भी कहते हों कि उस सर्वाधिक लोकप्रिय नेता को पार्टी के कार्यकत्र्ता प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में देखना चाहते हैं, तो फिर उसे औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री उम्मीदवार नहीं घोषित करने पर लोगों के बीच तरह तरह के संशय पैदा होने लगते हैं।

उत्तर प्रदेश के दंगों के संदेश

सपा और भाजपा दोनों जिम्मेदार
कल्याणी शंकर - 2013-09-13 11:01 UTC
उत्तर प्रदेश मे राजनैतिक पार्टियां आग से खेल रही हैं। चुनाव जीतने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार हैं। मुजफ्फरनगर के दंगे इसका ताजा उदाहरण हैं। इनमें अबतक 40 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। वोट बैंक की राजनीति के तहत वहां दंगे भड़काए जा रहे हैं और इसी राजनीति के तहत प्रशासन को भी ढीला छोड़ दिया जाता है। उत्तर प्रदेश के जिन इलाकों में अभी दंगे हुए हैं, वहां जाट और मुस्लिम साथ साथ रहा करते थे और एक साथ ही मतदान भी किया करते थे।

नोकिया ने भारत में लाँच किया उर्दू भाषा में सक्षम पहला डिवाइस

एस एन वर्मा - 2013-09-12 11:30 UTC
नई दिल्ली। नोकिया ने आज उर्दू भाषा में सक्षम नोकिया 114 के लाँच की घोषणा की जो देश में उर्दू भाषा में संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने वाला पहला डिवाइस है। यह डिवाइस लाँच करना उपभोक्ताओं तक पहुंचने और उन्हें मोबाइल टेलीफोनी के लाभ उपलब्ध कराने की नोकिया की रणनीति का अंग है। नोकिया 114 उर्दू भाषा में सक्षम फीचर फोन है जो आज दिल्ली में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री कपिल सिब्बल ने नोकिया इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री पी. बालाजी के साथ एक समारोह में लाँच किया। माननीय मंत्रीजी ने उर्दू भाषा में सक्षम पहला नोकिया 114 जाने-माने उर्दू शायर, उपन्यासकार और सामाजिक कार्यकर्ता श्री मुज़फ्फर अली के सुपुर्द किया।

राजनैतिक शतरंज पर दंगे का खेल

पार्टियों की नजरें चुनाव पर
प्रदीप कपूर - 2013-09-12 11:18 UTC
लखनऊः मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में हो रहे दंगे धार्मिक आधार पर समाज को ध्रुवीकृत कर रहे हैं और इसका सीधा फायदा आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को होने जा रहा है।

चापलूसी ने कांग्रेस को डुबोया है

मनमोहन के हटने के बाद राहुल आगे
अमूल्य गांगुली - 2013-09-11 12:18 UTC
कुछ महीने पहले जब डरबन से ब्रिक्स सम्मेलन से मनमोहन सिंह वापस भारत आ रहे थे, तो उन्होंने यह संदेश दिया था कि प्रधानमंत्री के अगले टर्म के लिए भी वे तैयार हें। लेकिन उसके बाद उन्होंने सत्य का साक्षात कर लिया है। अब जी 20 के सम्मेलन से वापस लौटने के बाद कह रहे हैं कि वे राहुल के नीचे काम करने को तैयार हैं। जाहिर है, यूपीए सरकार के एक बार फिर सत्ता में आने की स्थिति में वे राहुल को प्रधानमंत्री बनाए जाने के समर्थक के रूप में दिख रहे हैं।

मध्यप्रदेश चुनावी जंग के लिए हो रहा है तैयार

चौहान के सामने खड़े हैं सिंधिया
एल एस हरदेनिया - 2013-09-10 11:26 UTC
भोपालः नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए उत्तर प्रदेश तैयार हो रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान बपनी प्रदेश व्यापी यात्रा में लगे हुए है। उन्होंने इस यात्रा का नाम दिया है जन आशीर्वाद यात्रा। दूसरी तरह कांग्रेस ने चुनावों को ध्यान में रखते हुए अनेक समितियों का गठन कर दिया है।

भाजपा को सत्ता में लाने की पटकथा लिख रहे हैं मुलायम

मुजफ्फरनगर दंगे के लिए प्रशासन ही जिम्मेदार है
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-09-09 10:58 UTC
मुजफ्फरनगर के दंगे ने मुलायम सिंह यादव और उत्तर प्रदेश की उनकी पार्टी की सरकार की सांप्रदायिक राजनीति को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है। 2012 में सपा की सरकार बनने के बाद से ही देश की सबसे अधिक आबादी वाले प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए। उस सरकार के दौरान अब तक कुल छोटे बड़े 100 दंगे और तनाव की घटनाएं घट चुकी हैं। मुजफ्फरनगर का यह दंगा सबसे बड़ा है, लेकिन जिस तरह की राजनीति मुलायम कर रहे हैं, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि सपा की मौजूदा सरकार का यह अंतिम दंगा नहीं है।

मुलायम सिंह करेंगे तीसरे मोर्चे का नेतृत्व

समाजवादी पार्टी की हो रही है वाम मोर्चा से दोस्ती
प्रदीप कपूर - 2013-09-07 11:24 UTC
लखनऊः 10 सितंबर से आगरा मे समाजवादी पार्टी की दो दिवसीय कार्यकारिणी बैठक हो रही है। इस बैठक में तीसरे मोर्चे के गठन के बारे में चर्चा होगी।

कांग्रेस को वोट सुरक्षा कानून का सहारा

लोकप्रियतावाद या कल्याणकारी कदम?
कल्याणी शंकर - 2013-09-06 13:12 UTC
संसद के मानसून सत्र में खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण संबंधित दो विधेयकों को पास किया गया। इन दोनों को पास कराते समय कांग्रेस की नजर 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर थी। सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस को इन कानूनों का लाभ मिल भी पाएगा और यदि मिला भी तो क्या वह इतना होगा कि 2014 के बाद उसके नेतृत्व में एक बार फिर यूपीए की सरकार बन जाएगी? सोनिया गांधी और उनके सलाहकारों को ऐसा ही लगता है। उन्हें लगता है कि 2009 के लोकसभा चुनाव को मनरेगा और किसानों की कर्जमाफी के कारण जीता गया था।

क्या अर्थव्यवस्था तेल पर फिसलने वाली है?

ऊर्जा की बचत को प्राथमिकता देनी होगी
जी श्रीनिवासन - 2013-09-05 13:46 UTC
केन्द्रीय तेल मंत्री ने तेल उत्पादों की खपत को कम करने के लिए शाम 8 बजे से सुबह 8 बजे तक पेट्रोल पंपों को बंद रखने का प्रस्ताव देकर हंगामा खड़ा कर दिया। इस प्रस्ताव पर बहुत हंगामा हुआ। आलोचकों ने कहना शुरू कर दिया कि सरकार पेट्रोल कफ्र्यू लगाना चाह रही है। सच तो यह है कि 1990 के दशक मे शुरू हुए आर्थिक सुधार कार्यक्रमों के बाद लोग ने कतार में खड़े होने की आदत भूल चुके हैं। वे नहीं चाहते कि 12 घंटों के लिए सभी पेट्रोल पंप बंद कर दिए जाएं और शेष 12 घंटों में उन पंपों पर लंगी लाइन लगी रहे। लेकिन इससे तेल की बचत की विवशता समाप्त नहीं होती। सीरिया में जिस तरह का माहौल बन रहा है, उससे यही लगता है कि भारत सहित पूरी दुनिया को तेल का झटका लगने वाला है।