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खाद्य सुरक्षा से कौन डरता है?

भाजपा को आखिरकार इसके समर्थन में आना पड़ा
अमूल्य गांगुली - 2013-09-04 18:16 UTC
भारतीय जनता पार्टी समय से पहले चुनाव चाहती है। इसका कारण यह है कि वह कांग्रेस द्वारा तैयार किए गए ब्रह्मास्त्र से डर रही है। वह ब्रह्मास्त्र है खाद्य सुरक्षा कानून। इसलिए वह चाहती है कि लोकसभा का चुनाव जल्द से जल्द हो, ताकि वह वर्तमान सत्तारूढ़ पार्टियों के खिलाफ व्याप्त जन असंतोष का फायदा उठा सके। कहने की जरूरत नहीं कि भ्रष्टाचार और महंगाई के कारण लोगों में वर्तमान सरकार और उसमें शामिल पार्टियों के खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा व्याप्त है।

पंजाब के सरकारी खजाने का हाल खस्ता

अकाली भाजपा के बीच तकरार बढ़ी
बी के चम - 2013-09-03 13:39 UTC
चंडीगढ़ः राजनीति और अर्थव्यवस्था एक दूसरे पर आश्रित हैं। पंजाब इसका जीता जागता उदाहरण है। सत्तारूढ़ अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच तनाव बढ़ रहा है और इसके साथ ही राज्य का सरकारी खजाना खस्ताहाल होता जा रहा है। पंजाब एक समय देश का सबसे धनी राज्य था और सरकारी खजाना भी भरा पूरा रहता था, लेकिन आज इसकी दुर्दशा के दिन आ गए हैं। दुर्दशा के ये दिन समाप्त होने का नाम नहीं ले रहे।

सोलर पैनल घोटाले की न्यायिक जांच

यूडीएफ और एलडीएफ के बीच जुबानी जंग तेज
पी श्रीकुमारन - 2013-09-02 13:17 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल हाई कोर्ट ने सोलर पैनल घोटाले की जांच के लिए जज उपलब्ध करने से इनकार कर दिया है। उसके इस इनकार के बाद इस सोलर पैनल के घोटाले की न्यायायिक जांच पर अनिश्चितता के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं।

केरल में भाजपा का बुरा हाल

पार्टी नेता आपस में ही उलझ रहे हैं
पी श्रीकुमारन - 2013-08-31 11:19 UTC
तिरुअनंतपुरम: कुछ दिन पहले भाजपा की केरल ईकाई के अध्यक्ष वी मुरलीधरन ने कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा कुछ चैंकाने वाले परिणाम देगी। लेकिन पार्टी में जिस तरह के आंतरिक मतभेद चल रहे हैं और पार्टी जिस तरह से विभाजित है, उससे तो ऐसा ही लगता है कि वह आने वाले दिनों में खुद ही अपने आप पर चैंकने वाली है।

विश्व हिन्दू परिषद की अयोध्या यात्रा

भाजपा को इससे शायद ही फायदा हो
कल्याणी शंकर - 2013-08-30 17:27 UTC
पिछले दिनों विफल 84 कोसी परिक्रमा के दौरान भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिन्दू परिषद के बीच हुई रस्साकशी में किसने क्या खोया और किसने क्या पाया? यदि परिषद ने अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मन्दिर बनाने के लिए फिर से अभियान चलाया और इसके कारण प्रदेश का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ, तो जाहिरा तौर पर इसका फायदा भाजपा और समाजवादी पार्टी को हो सकता है।

अज्ञात बलात्कारियों की गिरफ्तारी और आसाराम से नरमी

कानून दो तरह से काम क्यों कर रहा है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-08-29 17:36 UTC
भारतीय संविधान का आर्टिकिल 14 कहता है कि कानून की नजर में सब बराबर है। हमारे लोकतंत्र की बुनियाद समता पर टिकी हुई है। पर पिछले दिनों बलात्कार की दो घटनाओं पर कानून का अलग अलग ढंग से काम करना यह साबित करता है कि समता का वह सिद्धांत अभी भी संविधान के पन्नों तक ही सीमित है। 15 अगस्त को हम आजादी का दिवस मनाते हैं। और उसी दिन जोधपुर के एक आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ उसके कथित धर्मगुरू द्वारा कथित बलात्कार की घटना होने की बात सामने आई। 5 दिनों के बाद मामला दर्ज भी किया गया।

हरियाणा की राजनीति में उथल पुथल

कांग्रेस को अपने अंदर से ही मिल रही है चुनौती
बी के चम - 2013-08-28 05:43 UTC
चंडीगढ़ः हरियाणा का राजनैतिक परिदृश्य बदलने जा रहा है। किस तरह के बदलाव वहां होने वाले हैं, वे पिछले कुछ दिनों की घटनाओं के आधार पर अभी से समझा जा सकता है।

केरल यूडीएफ में घमसान

युवा कांग्रेस ने मुख्य सचेतक का पुतला जलाया
पी श्रीकुमारन - 2013-08-26 12:42 UTC
तिरुअनंतपुरमः सोलर पैनल घोटाले के कारण केरल की चांडी सरकार पहले से ही समस्या का सामना कर रही है। विपक्ष चांडी का इस्तीफा मांग रहा है और आंदोलन कर रहा है। विपक्षी हमले के बीच यूडीएफ के अंदर चल रहा घमासान भी चांडी सरकार के लिए महंगा साबित हो रहा है।

वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ रहा है भारत

दोमुही बातों से बात नहीं बनेगी
नन्तू बनर्जी - 2013-08-24 10:34 UTC
अर्थशास्त्री कौशिक बसु के विचार अब वह नहीं रहे, जो पिछले साल थे। पिछले साल अप्रैल महीने में उन्होने जो कहा था, अब अगस्त 2013 में वे अलग सुर अलाप रहे हैं। इसका एक कारण तो शायद यह है कि वे अब उस पद पर नहीं हैं, जिस पद पर वे अप्रैल 2012 में थे। उस समय वे तत्कालीन वित्त मंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। उस समय वित्त मंत्री थे प्रणब मुखर्जी, जो आज देश के राष्ट्रपति हैं। उनके राष्ट्रपति बनने के पहले ही श्री बसु ने अपनी प्रोन्नति करवा ली थी और अब वे विश्व बैंक के उपाध्यक्ष व मुख्य अर्थशास्त्री हैं।

देश की अर्थव्यवस्था भारी संकट में

मितव्ययता के उपाय से स्थिति कुछ हद तक संभल सकती है
कल्याणी शंकर - 2013-08-24 08:19 UTC
आगामी लोकसभा चुनाव के एक साल भी नहीं रह गए हैं। कुछ विधानसभाओं के चुनाव तो सिर पर ही हैं। ऐसे माहौल में क्या अर्थव्यवस्था की पस्त अवस्था इन चुनावों के दौरान महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे बन सकते हैं। 1992 में जब बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे, तो उन्होंने नारा दिया था, ’’बेवकूफ अर्थव्यवस्था’’। क्या भारत के राजनेता भी अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति से सीख लेंगे?