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निवेश कीजिए नागरिकता लीजिए

सेंट किट्स की इस नीति का लाभ भारत के नागरिक भी उठा सकते हैं
देव बाथ - 2013-08-22 13:22 UTC
भूमंडलीकरण के इस युग में व्यवसायी अब राष्ट्र की सीमा को लांघ रहे हैं और वे एक से ज्यादा देश की नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं। उन्हें पता है कि ज्यादा देशों की नागरिकता रखने के क्या क्या फायदे हैं।

मनमोहन ने बर्बाद किए 10 साल

राजनैतिक नपुंसकता का एक दशक
अमूल्य गांगुली - 2013-08-22 13:19 UTC
जब मनमोहन सिंह 15 अगस्त को लाल किले पर भाषण देने के लिए खड़े हुए थे, तो शायद उनके दिमाग में यह बात जरूर उनके आई होगी कि वह उस स्थान से अंतिम बार देश को संबोधित कर रहे हैं। शायद यह भी उनके दिमाग में आया होगा कि यदि उन्होंने पिछले 10 सालों में अपनी चाह के अनुरूप आर्थिक सुधार कार्यक्रमांे को आगे बढ़ाया होता तो आज देश में स्थिति कुछ और ही होती। अपने से अलग विचार रखने वाले पार्टी नेताओं के दबाव में आने का अफसोस भी उन्हें जरूर हुआ होगा।

आर्थिक विनाश की ओर बढ़ रहा है भारत

कब चेतेंगे हमारे नीति निर्माता
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-08-21 08:04 UTC
देश की अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रही है। आजादी के बाद इस तरह की भयावह तस्वीर आज तक कभी नहीं दिखी थी। मुद्रास्फीति की दर और तेज हो रही है और खासकर खाने की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में और भी तेजी आ रही है। इसके साथ अर्थ व्यवस्था की विकास दर गिरती जा रही है। यानी देश के सामने चौतरफा आर्थिक संकट है। हम किसी भी दिशा में अपने आपको संकट से मुक्त नहीं पा रहे हैं। यदि अनाज के रिकार्ड उत्पादन की बात को मान भी लें, तो उस रिकार्ड उत्पादन का लाभ न तो उत्पादक किसानों को मिल रहा है और न उपभोक्ताओं को। यानी कृषि क्षेत्र की विकास दर का फायदा भी आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

मध्यप्रदेश में चुनावी जंग तेज

चुनावी रैलियों मे शिवराज ने स्थापित की बढ़त
एल एस हरदेनिया - 2013-08-21 08:00 UTC
भोपालः मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा जन आशीर्वाद यात्रा के साथ विधानसभा का चुनावी जंग तेज हो गया है। इसके पहले कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी और उस यात्रा के बाद शंखनाद रैली करने का फैसला किया था।

मोदी का मनमोहन पर हमला

लाल किला बनाम ललन सिंह कॉलेज
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-08-17 18:32 UTC
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी न केवल राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश कर चुके हैं, बल्कि वे आज देश की राजनीति का केन्द्र बिन्दु भी बन चुके हैं, हालांकि उनकी अपनी पार्टी ने अभी तक उन्हें प्रधानमंत्री पद का अपना उम्मीदवार औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया है। 15 अगस्त को लाल किले से भाषण दे रहे मनमोहन सिंह पर भुज के ललन सिंह कॉलेज के मैदान से हमला बोल दिया। भारतीय राजनीति की यह अपने किस्म की पहली घटना है, जब किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के भाषण की इस तरह लगभग उसी समय छिछालेदर की हो और पूरे देश ने उस हमले को साक्षात् देखा हो।

खाद्य सुरक्षा विधेयक: क्या कांग्रेस चुनावी फसल काट पाएगी?

कल्याणी शंकर - 2013-08-16 11:15 UTC
भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में विपक्ष द्वारा अड़ंगेबाजी के बावजूद खाद्य सुरक्षा विधेयक संसद में पारित हो जाएगा। इस विधेयक पर कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य पार्टियों के बहुत कुछ दाव पर लगे हुए हैं। विपक्ष नहीं चाहता कि खाद्य सुरक्षा कानून का सारा श्रेय अकेली कांग्रेस ले जाय। कांग्रेस की सहयोगी पार्टियां भी ऐसा नहीं चाहतीं। यही कारण है कि इस विधेयक को लेकर पार्टियों के बीच तनाव बना हुआ है। लेकिन सच यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी सहित अनेक विपक्षी पार्टियां यह नहीं चाहती कि देश की जनता उन्हें गरीबों को सस्ती दर पर अनाज उपलब्ध कराने वाले कानून के रास्ते में रोड़ा अटकाते देखे, क्योंकि चुनाव तो सबको लड़ना है।

भारतीय सीमा पर पाकिस्तानी उत्पात कयानी की अंतिम करतूत तो नहीं?

बी के चम - 2013-08-14 18:04 UTC
चंडीगढ़ः सीमा पर पाक सैनिको द्वारा भारतीय जवानों पर हमले, घुसपैठ की घटनाओं में वृद्धि और जम्मू और कश्मीर के अंदर सेना और पुलिस जवानों पर बढ़ हमले तीन सवाल खड़ कर रहे हैं। पहला सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की सेना ने जम्मू और कश्मीर के मसले पर एक बार फिर अपने आपको उन्मादी बना लिया है? दूसरा क्या पाकिस्तान स्थित भारत विरोधी आतंकी समूहों ने अपनी रणनीति बदल ली है? और तीसरा क्या पाकिस्तान की सेना के साथ नवाज शरीफ का समीकरण बदल गया है?

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक: न्यायपालिका पर अंकुश लगाने का प्रयास

अशोक बी शर्मा - 2013-08-13 16:59 UTC
इसे हम भारतीय लोकतंत्र की त्रासदी ही कहेंगे कि यहां के राजनेता पारदर्शिता से भाग रहे हैं और स्वच्छ सार्वजनिक जीवन में दिलचस्पी नहीं रखते। न्यायपालिका कुछ हद तक उन्हें अनुशासित करने का प्रयास करती दिखती है, लेकिन अब उनकी नजर न्यायपालिका पर भी है। अब वे न्यायपालिका की आजादी पर ही अंकुश लगाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इसके लिए एक विधेयक लाया गया है, जिसका नाम है राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक। इस विधेयक के द्वारा वे जजों की बहाली पर अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं।

पाकिस्तानी मर्ज का आखिर इलाज क्या है?

इसका स्थाई हल ढूंढ़ना ही होगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-08-13 03:47 UTC
पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। आने वाले समय में वह अपनी भारत नीति में कोई बदलाव लाएगा, इसकी भी कोई संभावना नहीं दिखाई पड़ रही है। वहां सरकार सेना की हो या लोकतांत्रिक, लोकतांत्रिक सरकार भी चाहे जिसकी हो, सबकी भारत नीति एक समान रही है। वह नीति नफरत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य है भारत के खिलाफ एक अघोषित युद्ध को जारी रखना। पाकिस्तान राष्ट्र को कुछ लोगों द्वारा अस्वीकार कर दिए जाने के कारण ही अस्तित्व में आया था। आज भी पाकिस्तान अपने अस्तित्व का अहसास भारत विरोध में ही करता है, मानों उसने भारत विरोध करना बंद किया नहीं कि उसका वजूद ही समाप्त हो जाएगा।

एक अधिकारी पर केन्द्र और राज्य के आमने-सामने आने का अर्थ

केन्द्र और राज्य का टकराव ऐसे मुद्दे पर न हो
अवधेश कुमार - 2013-08-11 02:53 UTC
यह संभवतः आजाद भारत के इतिहास में पहली बार है जब एक नवनियुक्त आईएएस अधिकारी के निलंबन के प्रश्न पर केन्द्र एवं एक प्रदेश सरकार इस तरह आमने-सामने आ गई है। प्रधानमंत्री ने केवल इतना कहा है कि हर मामले के नियम हैं और इस मामले में भी नियम के तहत ही काम किया जाएगा। किंतु उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो टूक कह दिया है कि यदि अधिकारी गलती करेंगे तो उन्हें भुगतनी होगी सजा। इसका सीधा अर्थ यही था कि दुर्गा शक्ति ने गलती की है जिसकी सजा उन्हें दी गई है।