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भारत

क्षेत्रीय दलीय नेताओं से जूझती यूपीए सरकार

विजय कुमार मधु - 2010-08-10 13:06 UTC
भारतीय राजनीति का ढांचा कुछ ऐसा हो गया है कि आज सभी दलों का वर्चस्व कायम हो गया है और इन दलों के नेताओं की क्षमता और बहुमत की बात कही जाए तो उसमें कुछ ही नेता अपने आपको जनता के सामने मुखर पाते हैं और अन्य केवल कागजी घोड़े बनते नज़र आ रहे है और अन्य रास्तों से अपनी क्षमता के अनुसार नहीं बल्कि पैसे के बल पर संसद की सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर हो चुके है। बिहार तथा उत्तर प्रदेश समेत उत्तरोपूर्व तथा दक्षिण में भी क्षेत्रीय दलों का बोलबाला हो चुका है। एक दल से कई दल निकल चुके है। करूणानीधि और जयललिता तमिल राजनीति की धूरी बनती जा रही है। करूणा नही ंतो जयललिता सही। जम्मू व कश्मीर में अब्दुला नहीं तो महबूबा ही सही। लेकिन कहीं कांग्रेस नहीं तो भाजपा ही सही और उत्तर प्रदेश में तो माया नहीं तो मुलायम ही सही वाली स्थिति बनती जा रही है।
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भाजपा में गुटबंदी चरम पर

कार्यकारिणी की सूची पर असंतोष
प्रदीप कपूर - 2010-08-10 12:54 UTC
लखनऊः राज्य कार्यकारिणी की सूची जारी किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश भाजपा में असंतोष कर स्थिति पैदा हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने केन्द्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिलने के बाद सूची जारी की थी। उसे तैयार करते समय ध्यान रखा गया था कि उसमें पार्टी के सभी गुटों को प्रतिनिधित्व मिले। लेकिन यह काम आसान नहीं था और सूची के सामने आने के बाद इसके खिलाफ आवाज भी उठने लगी है।

ऑनर किलिंग की परम्परा

विशेष संवाददाता - 2010-08-09 13:32 UTC
महिला और बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा शुरू किए गए और गैर-सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी द्वारा कराए गए अध्ययन हरियाणा, पंजाब राज्यों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित थे । तथापि, उक्त संगठन ने जिन 560 मामलों की रूपरेखा तैयार की, उनसे पता चलता है कि यह उत्तर भारतीय समस्या है ।

सरिस्का में बाघों के पुनर्वास से बंधी आशा

डॉ0 राजेश कुमार व्यास - 2010-08-09 13:24 UTC
एक मोटे अनुमान के अनुसार 20वीं सदी में बाघों की संख्या एक लाख से 97 प्रतिशत घट गई है । भारत की ही बात करें, हमारे यहां वर्ष 1989 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत देश में बाघों की संख्या 4 हजार 334 थी, जो 2001-2002 में घटकर 3 हजार 642 हो गई । वर्ष 2006-07 में यह संख्या और घटकर 2 हजार 438तक पहुंच गयी और आज स्थिति यह है कि पूरे देश में मात्र एक हजार 411 बाघ ही बचे हैं ।

विचित्रपुर की जल समाधि

सुरेन्द्र भट्ट - 2010-08-09 13:11 UTC
विचित्रपुर नाम से लगता है कि यह कोई शहर कस्बा या कोई नगर होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। विचित्रपुर टिहरी रियासत के संस्थापक शाह वंशज महाराज सुदर्शन शाह के पौत्र महाराज प्रतापशाह के दूसरे नम्बर के पुत्र विचित्र शाह द्वारा स्थापित फलदार वृक्षों के एक अनोखे बाग का नाम है जो आज टिहरी बांध के सहायक बांध परियोजना के निर्माण के कारण जल समाधि लेने जा रहा है। वर्तमान में विचित्रपुर उत्तराखण्ड राज्य के टिहरी जनपद में देवप्रयाग विकास खण्ड की पट्टïी पौड़ी खाल का सीमान्त भागीरथी नदी से सटा हुआ राजस्व ग्राम है।

सम्मान से अवसान तक की सेवा का केंद्र

देवेन्द्र उपाध्याय - 2010-08-09 13:05 UTC
अनोखे लाल महीनों से फुर्सत में थे। दिल्ली में फिलहाल कोई चुनाव है नहीं, सो क्या करें- यह समझ नहीं पा रहे थे। चुनावों में तो हर पार्टी की सेवा करना उनका पेशा भी है और धर्म भी। अपने रेजीडेंस-कम-ऑफिस में वे बैठे हुए थे। एक टूटी कुर्सी और ढाई टांग की मेज पर उनका अॅाफिस चलता है। दरवाजा और खिड़की खुली रखते हैं क्योंकि छिपाने के लिए कुछ है नहीं।

मंहगाई का जिम्मेदार कौन?

राजेन्द्र धस्माना - 2010-08-09 13:02 UTC
जब कोई चीज नियंत्रण से बाहर होने लगे तो एक आसान तरीका यह भी है कि कहा जाए वह 'ग्लोबल` हो गई है। मंहगाई के बारे में भी ऐसा ही कुछ है। कहा जाता है वह 'ग्लोबल फिनॉमिनन` है। वर्षों पहले यह महसूस किया गया था कि सारी दुनिया अब 'ग्लोबल विलेज` के रूप में सिकुड़ गई है। 'ग्लोब विलेज` होने का मतलब समझ में आता है, पर मंहगाई का 'ग्लोबल` होना अब भी समझ में नहीं आता। दुनिया के 'ग्लोबल विलेज` होने में उसके छोटे होने का अहसास समझ में आता है। पहले जो देश एक-दूसरे से बहुत दूर जान पड़ते थे, अब संचार सुविधाओं के बढऩे से वे एक-दूसरे के नजदीक आते जा रहे हैं। हमें पेरिस, बोन या लंदन की घटनाओं की खबर ऐसे ही मिल जाती हैं जैसे अपने शहर की घटनाओं की खबर मिलती है। इसमें खबरें या घटनाएं ग्लोबल नहीं हुई हैं, हम हुए हैं। और यह भी कि खबरों या घटनाओं का आदमी से रिश्ता और महंगाई का आदमी से रिश्ता एक जैसा नहीं है। अगर दुनियाभर के देशों में महंगाई व्याप्त है, तब भी उसके व्याप्त होने के हर देश में कारण अलग-अलग हो सकते हैं। और कारण अलग-अलग हैं तो महंगाई 'ग्लोबल` कैसे हुई? अंतत: अगर जिस महंगाई का सामना हमें करना पड़ रहा है उसके कारण हमें अपने इर्दगिर्द या अपने ही देश में ढूंढने पड़ें तो 'ग्लोबल` कहकर उन कारणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

संगठन चुनाव स्थगित होने से कांग्रेसियों में निराशा

इससे पार्टी में अनुशासनहीनता बढ़ सकती है
पी श्रीकुमारन - 2010-08-09 11:59 UTC
तिरुअनंतपुरमः कांग्रेस आलाकमान द्वारा केरल की स्थानीय ईकाई को संगटन चुनाव स्थगित करने करने की अनुमति भले ही पार्टी की तात्कालिक समस्या को घ्यान में रखते हु दी गई हो, लेकिन इसके कारण पार्टी की समस्या और भी बदतर हो सकती है।

कश्मीर घाटी में सीमापार की साजिश से बिगड़े हालात

अलगाववादी नेताओं ने फिर ठुकराया वार्ता का प्रस्ताव
ओ.पी. पाल - 2010-08-09 11:52 UTC
जम्मू-कश्मीर में बिगड़े हालातों को सुधारने के लिए जहां केंद्र सरकार राजनीतिक प्रक्रिया को एक बार फिर से सक्रिय करने की नीति के तहत अलगाववादी संगठन के एक गुट ने फिर एक बार सरकार से वार्ता की पेशकश को ठुकरा दिया है। कश्मीर घाटी में कानून और व्यवस्था पूरी तरह से चरमराने पर चिंतित राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार से राजनीतिक प्रक्रिया को शुरू करने पर जोर दिया जिसके लिए सरकार भी राजी हैं, लेकिन बातचीत की पेशकश को ठुकराने वाले अलगाववादी संगठन जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने सरकार की वार्ता को पाखंड बताते हुए यह कहकर उनके रूख में कोई बदलाव नहीं है से यह सबूत दे दिया है कि सीमापार की नीतियां ही अलगाववादी संगठनों में कूट-कूटकर भरी हुई हैं।

हिंद महासागर पूर्वानुमान प्रणाली

संवाददाता - 2010-08-07 11:47 UTC
विभिन्न समयमान के संदर्भ में पूर्वानुमान समुद्री विज्ञानी मापदण्ड (स्तल और अधस्तल) मौसम विज्ञानियों से लेकर मछुआरों और जलसेना से लेकर अपतटीय उद्योगों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। इस समय भारतीय राष्ट्रीय समुद्र सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) भारतीय समुद्री सीमाओं और पूरे हिंद महासागर में लहरों के बारे में पूर्वानुमान करने का कार्य कर रहा है। हाल में ही इनकोसिस ने हिंद महासागर के डायनेमिक और थर्मोडायनेमिक लक्षणों के पूर्वानुमान के लिए एक नई प्रणाली शुरू की है।
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