सीपीएम के सामने असली चुनौती
अमूल्य गांगुली
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2011-01-22 10:42 UTC
जिन लोगों ने पश्चिम बंगाल में वाम दलों के 1960 के दशक में हुए उत्थान को देखा है, वह यह देखकर विस्मित होंगे कि उनका पतन भी उसी तरह के कारणों से हो रहा हैं। फर्क यह है कि सिनेमा का रील पीछे की ओर चल रहा है। आगे बढ़ने की जगह कामरेड पीछे की ओर जा रहे हैं। और दोनों परिस्थितियों में उनकी प्रतिक्रिया बिल्कुल एक जैसी है। अपने उत्थान के समय कामरेड लोग हिंसा कर रहे थे, तो अपने पतन काल में भी वे हिंसा में लिप्त हैं। उस समय हिंसा करने से उनकी लोकप्रियता बढ़ रही थी। अब हिंसा करने से उनका समर्थन आधार सिकुड़ता जा रहा है।